आया मौसम सिर फुटव्वल का

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मुकेश तिवारी
( [email protected])
मप्र विधानसभा चुनाव के लिए टिकट वितरण की बेला बहुत करीब आ चुकी है और आ गया है मौसम राजनीतिक सिर फुटव्वल का। आने वाले कुछ दिन में टिकट ना मिलने, कट जाने से नाराज नेताओं की बगावत, आहत समर्थकों द्वारा बड़े नेताओं के बंगले, पार्टी कार्यालयों का घेराव, प्रदर्शन, तोड़फोड़ भी हर बार की तरह देखने को मिल सकती है। फिर बागियों और रूठों को मनाने, ना मानने वाले नेताओं और उनके समर्थकों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने की तयशुदा रस्म भी अदा की जाएगी।
क्या कांग्रेस, क्या भाजपा दोनों ही पार्टियों में एक-एक टिकट के लिए पांच-पांच, सात-सात दावेदार हैं। पिछले तीन-चार महीने से इन दावेदारों ने अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रियता खूब बढ़ाई और टिकट की बेला में इनमें से ज्यादातर दिल्ली-भोपाल भी एक किए हुए हैं। हरेक अपने को प्रबल दावेदार मानकर चल रहा है । ऐसे में किसी एक को टिकट मिलने पर बाकी के समर्थकों का गुस्से से उबल जाना स्वभाविक ही है।
राजनीतिक दल इससे भलीभांति अवगत भी हैं और उनके पास इसका तगड़ा पुराना और कड़वा अनुभव भी। इसलिए पार्टी कार्यालयों पर पुलिस की तैनाती नजर आने लगी है। पहले कांग्रेस में ही यह सब होता था अब भाजपा भी कोई कम पीछे नहीं है। भाजपा बड़ी संख्या में अपने मंत्री-विधायकों के टिकट काटने जा रही है इसलिए उसे बड़ी बगावत होने का खतरा भी शायद ज्यादा महसूस हो रहा हो। कांग्रेस को भी 15 साल बाद इस बार सत्ता में वापसी का बहुत भरोसा है इसलिए वहां भी टिकट दावेदारों की भरमार है। दोनों दलों के सामने आंतरिक असंतोष पर काबू पाना टिकट वितरण के बाद पहली बड़ी और कठिन चुनौती होगी। बाकी बड़े नेताओं के टकराने की आवाज तो दिल्ली-भोपाल से आने ही लगी है। हां, चलते चुनाव में बड़े दलबदल की संभावना भी तो जिंदा है।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार और ghmasan.com के संपादक हैं।

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