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जैविक कपास उत्पादक किसानों को बेहतर रोजगार के लिए सी एडं ए फाउंडेशन और म.प्र. राज्य शासन करेंगे साझा प्रयास

Posted on: 09 May 2018 04:02 by Ravindra Singh Rana
जैविक कपास उत्पादक किसानों को बेहतर रोजगार के लिए सी एडं ए फाउंडेशन और म.प्र. राज्य शासन करेंगे साझा प्रयास

 

भोपाल : ग्लोबल रिटेलर सी एन्ड ए का कॉर्पोरेट फाउंडेशन सी एन्ड ए फाउंडेशन ने आज भोपाल में मध्य प्रदेश शासन के साथ मिलकर एक विशेष सम्मेलन कॉटन ट्रेलब्लेज़र्स का आयोजन किया। इस आयोजन के अंतर्गत जैविक कपास उत्पादन के क्षेत्र में मध्य प्रदेश की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लीडरशिप और मध्य प्रदेश में किसानों की आजीविका के सुधार में जैविक कपास  की पैदावार की भूमिका को विशेष तौर पर दर्शाया गया। आयोजन के दौरान जैविक कपास आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाय चेन) से जुड़े हितधारकों के बीच इस चर्चा को भी आगे बढ़ाया गया कि किस तरह जैविक कपास क्षेत्र को सबके सहयोग से मजबूत और लचीला बनाया जा सकता है।

इस कार्यक्रम में विभिन्न शासकीय प्रतिनिधियों ने शिरकत की जिनमें नीति-निर्धारकों और विभिन्न शैक्षणिक समुदायों के सदस्यों सहित सम्पूर्ण जैविक कपास  आपूर्ति श्रुंखला से जुड़े हितधारक शामिल थे, जैसे अंतर्राष्ट्रीय ब्रांड्स के प्रतिनिधि तथा खुदरा दुकानदारों तथा साथ ही बड़ी संख्या में जैविक कपास  उपजाने वाले किसान, आदि। इन सभी ने राज्य में जैविक कपास की खेती के लिए लाभदायक नीतियों से युक्त वातावरण बनाने के मध्य प्रदेश शासन के प्रयासों का तालियां बजाकर स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस क्षेत्र से संबंधित चुनौतियों पर प्रकाश डाला तथा जैविक कपास  के लिए एक समृद्ध मूल्य वाली श्रृंखला बनाने की ओर साथ मिलकर काम करने के लिए हितधारकों का आह्वान किया, ताकि खेतों से लेकर स्टोर, किसानों, मैन्युफेक्चरर, ब्रांड्स, रिसर्च इंस्टीट्यूट तथा समाज सभी को फायदा मिल सके।

इस आयोजन के बारे में बात करते हुए, सुश्री अनीता चेस्टर, सी एन्ड ए फाउंडेशन की सस्टेनेबल रॉ मटेरियल प्रमुख, ने कहा- ‘भारत के जैविक उत्पादों की खेती के मामले में मध्य प्रदेश अग्रणी है और जैविक कपास  के उत्पादन में यह वैश्विक अधिनायक है। यह उत्साहित करने वाली बात है। हमें इस सेक्टर में मौजूद कई चुनौतियों के बारे में भी विचार करने की आवश्यकता है और इस हिसाब से अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। यह आयोजन इस बात को दर्शाता है कि यह राज्य में जैविक कपास पारिस्थितिक तंत्र से जुड़े सभी हितधारकों के सामूहिक, केंद्रित प्रयासों का  नतीजा है।

ब्रांड्स से लेकर खुदरा दूकानदार, आपूर्ति श्रुंखला के घटक, सभ्य समाज के सदस्य, शैक्षणिक समुदाय तथा राज्य शासन, सभी को एक साथ आगे आने तथा इस क्षेत्र के असली नायकों यानी ‘ जैविक कपास उगाने वाले किसानों’ की सहायता करने की जरूरत है। सी एन्ड ए फाउंडेशन में हम सरकार के साथ सहयोगी के तौर पर जुड़कर प्रसन्नता महसूस कर रहे हैं और विभिन्न हितधारकों से मिलकर बने इस सहयोग को आगे भी निरंतर जारी रखेंगे ताकि जैविक कपास  सेक्टर तथा इसका अभिन्न हिस्सा किसान, दोनों ही फलते-फूलते रहें और मध्य प्रदेश के साथ साथ भारत के ध्वज को भी ऊंचा फहराते रहें।’

श्री गौरी शंकर बिसेन, माननीय मंत्री- कृषक कल्याण एवं कृषि विकास विभाग, मध्य प्रदेश शासन ने कहा- हमने शिवराज सिंह जी के नेतृत्व में जैविक खेती को ना केवल प्रोत्साहित किया है अपितु उसके लिए संस्थागत व्यवस्था भी की है। आज हम दो लाख  हेक्टेयर से अधिक भूमि पर जैविक खेती कर रहे हैं। इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के सम्मलेन के माध्यम से हमारे किसान जैविक खेती करने के लिए प्रेरित हो और इस तरह जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए हमें इसी तरह के सम्मलेन का आयोजन लगातार करना होगा जिससे हम किसानों में जागरूकता पैदा कर सके और उन्हें प्रोत्साहित कर सकें।

श्री बिसेन ने आगे कहा कि इस क्षेत्र में जो हमारी राष्ट्रीय स्तर पर गणना होती है उसमें हम आगे हैं किंतु कपास के क्षेत्र में और भी कार्य करने की आवश्यकता है। आज हम दो लाख  हेक्टेयर से अधिक भूमि पर जैविक खेती कर रहे हैं उसका मूल कारण है गोवंश की उपलब्धता गोबर का होना और हमारे परंपरागत खेती जिसमें वह रासायनिक कीटनाशक का उपयोग कम से कम हुआ है। आज आयोजित इस संगोष्ठी से जो भी परिणाम आएंगे उसे हमें धरातल पर लाने की आवश्यकता होगी और उसे किसानों तक भी पहुचाएं।

कार्यक्रम में पी सी मीणा एग्रीकल्चर प्रोडक्शन कंसर्न, डॉ. राजेश राजौरा मुख्य सचिव कृषक कल्याण एवं कृषि विकास, बागवानी एवं खाद्य प्रसंस्करण, लेसली जॉनस्टोन एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर, सी एण्ड ए फाउण्डेशन उपस्थित थे।

इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. राजेश राजौरा, माननीय प्रमुख सचिव, किसान कल्याण एवम कृषि विकास विभाग, मध्य प्रदेश शासन ने कहा-  ‘हमें जैविक कपास के क्षेत्र में क्रांति की अगुआई करके उपलब्धियां हासिल करने के लिए मध्य प्रदेश पर गर्व है और अगले 3 वर्षों में जैविक कपास की खेती को 30,000 से बढ़ाकर 75,000 हेक्टेयर करना हमारा लक्ष्य है। जैविक कपास अभियान को और मजबूत बनाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने परंपरागत कृषि विकास योजना (पी के वी वाय) के अंतर्गत कम से कम 100 जैविक कपास समूह को स्वीकृति प्रदान की है।

राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों के जरिये इस संदर्भ में शोधकार्यों को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से,  राज्य द्वारा कीटनाशक अवशिष्ट जांच केंद्र भी स्थापित किये हैं ताकि निर्यात किये जाने वाले कपास की गुणवत्ता को और सुधारा जा सके। इसके साथ ही हम खण्डवा में जैविक कपास की अनुसन्धान के लिए समर्पित भारत का पहला उत्कृष्ट केंद्र तथा मंडला में जैविक अनुसन्धान केन्द्र भी स्थापित करने जा रहे हैं।

जल्द ही मध्य प्रदेश कृषि उत्पादन तथा निर्यात को बढ़ावा देने वाली एक समर्पित एजेंसी से युक्त भारत का पहला ऐसा राज्य बन जायेगा जो कि जैविक कपास के निर्यात में भी बढ़ोत्तरी करेगा। हमें पूरा विश्वास है कि यह कदम जैविक कपास की खेती के रास्ते मे आने वाली बाधाओं को पार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और एक स्थाई तरीके से किसानों के लिए खेती से जुड़े मुद्दों को हल करेंगे।

गौरतलब तथ्य है कि जैविक कपास की खेती पर्यावरण के लिए फायदेमंद है और यह खेती में प्राकृतिक साधनों (नॉन-कैमिकल) को अपनाकर किसानों को खेती की लागत कम करने में भी मदद करता है, इसके बावजूद वैश्विक स्तर पर जैविक कपास का उत्पादन 1 प्रतिशत से भी कम रह गया है। मध्य प्रदेश शासन तथा सी एन्ड ए फाउंडेशन इस परिदृश्य को बदलने के लिए प्रयासरत है। ‘कॉटन ट्रेलब्लेज़र्स’ का आयोजन इस दिशा में बढ़ाया गया ऐसा ही एक कदम था जो मध्य प्रदेश को अपनी जैविक कपास की इस यात्रा में और भी आगे ले जायेगा।

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