यमराज के फ्रेंचाइजी की गाथा सुनकर आप रह जाएंगे दंग, अमित मंडलोई की कलम से| By listening to the saga of Yamraj’s franchise, you will be stunned, with the pen of Amit Mandloi

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अखबार में एक विज्ञापन देखकर चौंक गया। लिखा था यमराज को फ्रेंचाइजी देना है। अधिक सोचने के बजाय दिए गए नंबर पर फोन लगा दिया। उधर से पहले वही हेल्पलाइन वाली रस्म दोहराई गई। अंग्रेजी-हिंदी में बात करने के लिए ये दबाएं, वो दबाएं। लंबे इंतजार के बाद उनकी बिजनेस एक्जीक्यूटिव ने मेरा फोन लिया।

अभिवादन के बाद मैंने सीधे ही फ्रेंचाइजी के बारे में पूछा, मैडम ये फे्रंचाइजी का क्या मामला है। जवाब में उल्टा सवाल मिला, मामले से क्या मतलब है आपका। मैंने झिझकते हुए कहा, यमराज को एजेंसी बांटने की जरूरत क्या आन पड़ी। उन्होंने कहा, आपको क्या लगता है, आपके यहां एक ही सरकारी दफ्तर से सारे काम हो जाते हैं। मैंने इनकार किया तो कहने लगी, पूरे शहर का एक ही अस्पताल में इलाज करा सकते हैं, मैंने फिर मना किया तो कहने लगी यदि आप को एक शहर के लिए कई अस्पताल, स्कूल और शॉपिंग सेंटर चाहिए तो यमराज अकेले अपना काम कैसे कर सकते हैं। उन्हें सर्विस एक्सपांशन के लिए लोगों की आवश्यकता पड़ गई तो क्या बुरा हो गया।

वे कब तक अकेले ये बोझ उठाएंगे। रोज कितने लोगों को लाना पड़ता है। आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते वे कितने थक जाते हैं। इसलिए ही हमने डिसाइड किया है कि अब हर शहर में फ्रेंचाइजी देेंगे। जरूरत पडऩे पर गली-मोहल्लों के हिसाब से भी एरिया बांट सकते हैं। मैंने पूछा, मैडम आप किस तरह के लोगों को ढूंढ रही हैं। उन्होंने कहा, ढूंढने का तो ऐसा है कि हम भरोसेमंद सर्विस पार्टनर चाहते हैं, जो बिना हिलाहवाला किए, समय पर हमारा काम कर दें। अब बिल्डरों को ही देखिए, वे बाकी मामले में कैसे भी हों, लेकिन इस मामले में बहुत दक्ष होते हैं। वे ऐसी स्लैब बनाते हैं, ऐसे खंभे खड़े करते हैं कि भरभराकर कभी भी गिर पड़ते हैं। वे तो अपना काम दिखाकर निकल लेते हैं, मुसीबत यमराज की हो जाती है। इसलिए हम चाहते हैं कि बिल्डर इतना करते ही हैं थोड़ी और मदद कर देंगे तो क्या बिगड़ जाएगा।

मैंने पूछा सिर्फ बिल्डर ही या और भी कोई चलेगा। उन्होंने कहा, देखिए हम तो सब तरह के लोग ढूंढ रहे हैं। बिल्डर तो अपनी जगह है, हमारी सूची में तो खाप पंचायत और भीड़ तंत्र भी है, जो कभी भी किसी को भी यमराज के पास भेज देते हैं। उनके पास फ्रेंचाइजी होगी तो उम्मीद है थोड़ा अनुशासन आ जाए। खाप पंचायत फैसले सुनाकर ही चुप न बैठे, आगे की भी जिम्मेदारी निभाए। डॉक्टर भी चलेंगे। खासकर बड़े नर्सिंग होम वाले। वहां तो आप जानते ही हैं, वेंटिलेटर के साथ मीटर घूमता रहता है। वह थोड़ा और घूम जाएगा। सडक़ बनाने वाले ठेकेदार और काम के हैं, वे इतनी बढिय़ा डिजाइन करते हैं कि हर चौराहे पर यमराज को अपने आदमी खड़े करना पड़ते हैं।

मुझे लगा मैडम ऐसे ही बोलती रहीं तो शायद ही देश में कोई बच पाए। इसलिए मैंने तुरंत बात पलटी और पूछ लिया, आप तो ये बताएं कि आपको सबसे ज्यादा किस तरह के प्रोफेशन वालों की जरूरत है। मैडम ने कहा, इसका जवाब क्या आप नहीं जानते मैंने कहा, मैं कैसे जान सकता हूं। कहने लगी, देखिए, हिंदुस्तान की जनता का यही भोलापन हमें बहुत पसंद है। आप लोग तो ना समझते ही नहीं है। हकीकत यह है कि आपके यहां पहले ही लोगों ने फ्रेंचाइजी ले रखी है। वे ही तो लोग हैं, जो रैलियां निकालते हैं, आंदोलन करते हैं, पत्थर फेंककर छुप जाते हैं और उनके पीछे खड़े लोग लाठी, गोलियां खाते हैं।

वे ही तो सारे आयोजन करते हैं। कहीं रेल की पटरियों के पास रावण जला देते हैं। ऐसी जगह भीड़ इकट्ठा करते हैं, जहां कम लोग भी ज्यादा नजर आएं। बाहर निकलने की कोशिश में उनका दम घुट जाए या फिर कोई ट्रेन उन्हें कुचलती हुई निकल जाए। उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। जवाब आप ढूंढेंगे कि वहां किसने अनुमति दी, किस आधार पर आयोजन हुआ, रेलवे को पहले से सूचना क्यों नहीं दी गई। जैसे यमराज किसी तरह के सवालों की परवाह किए बगैर काम करते हैं, वैसे ही वे भी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

इसके बाद मेरे पास कुछ पूछने को बाकी नहीं था। सिर्फ इतना पूछा कि मैडम इसके बाद भी आपको फ्रेंचाइजी देने की जरूरत क्यों पड़ गई। जवाब में फिर सवाल आया, पूछने लगी आपके यहां अखबार कितनी बजे आता है। मैंने कहा, 7 बजे, वे बोली कई लोगों के यहां पहले आ जाता है, आपके फोन लगाने के पहले ही सारी फे्रंचाइजी दी जा चुकी थी। अब एक भी जगह बाकी नहीं है। सब जगह यमराज की फ्रेंचाइजी दी जा चुकी है. हमें फोन करने का शुक्रिया आपका दिन शुभ हो.

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