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सात करोड़ खुदरा व्यापारियों के सर पर लटकी तलवार

Posted on: 07 Feb 2019 10:54 by Surbhi Bhawsar
सात करोड़ खुदरा व्यापारियों के सर पर लटकी तलवार

नीरज राठौर

भारत के सालाना 42 लाख करोड़ से अधिक के खुदरा बाज़ार में घमासान का नया दौर आया है। इस व्यापार से जुड़े सात करोड़ व्यापारी अस्थिर हो गए हैं। मुकेश अंबानी ने ई-कामर्स प्लेटफार्म बनाने के एलान ने खलबली मचा दी है। 7 करोड़ खुदरा व्यापारियों के सर पर लटकी तलवार है।

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लेकिन क्या अंबानी दोषी है ???

नहीं अम्बानी बिलकुल भी दोषी नहीं है खुदरा व्यपारियों पर छाये संकट के बादल के लिए। मुकेश अंबानी एक व्यापारी और व्यापार का सिद्धांत है विस्तार, प्रगति और उन्नति। तो मुकेश अंबानी ने ई-कॉमर्स क्षेत्र में प्रवेश कर अपनी योग्यता का ही परिचय दिया है।

दोषी हैं वे सभी व्यापारी जो अपनेआप को अपग्रेड नहीं कर पाए या करना चाहते। दोषी हैं वे सभी व्यापारी जो आधुनिक तकनीकी का प्रयोग करना नहीं सीखे। आज दुनिया तेजी आगे बढ़ रही है तकनीकी के क्षेत्र में। ऐसे में व्यापारी यदि किसानों की तरह ठहर गये, तकनीकी का प्रयोग करने से चूक गये, तो वे भी किसानों की तरह बर्बाद हो जायेंगे।

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किसान भी बर्बाद हुए तो केवल इसलिए क्योंकि उन्होंने अपने आप को अपग्रेड नहीं किया। उनकी संताने शिक्षा के नाम पर डिग्रियाँ बटोरकर बेरोजगारी की कतार में खड़ी हो गयी, न कि अपने ही किसान माता-पिता की सहायता करने के लिए कोई कदम उठाया | आज कितने ऐसे नौजवान है, जो विदेशों की बड़ी बड़ी नौकरियाँ ठुकरा कर भारत वापस लौट रहे हैं और कृषि को अपना रहे हैं। वे कृषि क्षेत्र में ही लाखों रूपये कमा रहे हैं। जबकि यहां के परंपरिक किसान कर्ज व भुखमरी से बदहाल जीवन जी रहे हैं | उन्हें उनकी लागत मूल्य तक नहीं मिल पा रही कृषि से।

यह सब केवल इसलिए क्योंकि वे तकनीकी का प्रयोग करने में पिछड़ गये। आज भारतीय सब्जियां विदेशों में प्रतिबंधित हो रहीं हैं कैमिकल के प्रयोग के कारण | क्योंकि विदेशों में जैविक उत्पाद को बहुत महत्व दिया जा रहा है। लेकिन भारतीय किसान आज भी कैमिकल युक्त कृषि को महत्व दे रहा है। तो स्वाभाविक ही है कि जल्दी ही उनकी उपज मार्किट से गायब हो जाएँगी और वे भूखों मरेंगे।

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सारांश यह कि समय के साथ स्वयं को अपग्रेड करना अनिवार्य है यही प्रकृति का नियम है। जो अपने आप को अपग्रेड नहीं कर पाता, उसे प्रकृति मिटा देती है।

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