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बजट भाषण के दौरान गूंजती आई है कविता और शेर

Posted on: 01 Feb 2019 15:45 by Surbhi Bhawsar
बजट भाषण के दौरान गूंजती आई है कविता और शेर

किसानों, युवाओं और मिडल क्लास को बंपर गिफ्ट देते हुए वित्तमंत्री पीयूष गोयल ने मोदी सरकार के कार्यकाल का अंतरिम बजट पेश कर दिया है। बजट के दौरान लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे जोश में नजर आ रहे थे। गोयल ने भाषण का समापन कुछ पक्तियों के साथ किया। उन्होंने कहा ‘एक पांव रखता हूं, हजार राहें फूट पड़ती हैं। यह पंक्तियां गजानन माधव मुक्तिबोध की कविता ‘मुझे कदम-कदम पर’ से ली गईं हैं।

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हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है जब बजट भाषण के दौरान कोई कविता की पंक्स्तियाँ पढ़ी गई हो. इससे पहले भी वित्त मंत्रियों ने बजट को इंटरेस्टिंग बनाने के लिए शायरियों और कविता की पंक्तियों को अपने बजट भाषण में शामिल किया।

मनमोहन सिंह

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बतौर वित्तमंत्री साल 1991 में बजट पेश किया था. इस दौरान उन्होंने शायर इकबाल का एक शेर सुनाया था- ‘यूनान-ओ-मिस्र-रोम सब मिट गए जहां से, अब तक मगर है बाकी, नाम-ओ-निशा हमारा’।

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पी चिदंबरम

साल 1997 वित्त मंत्री के तौर पर पी चिदंबरम ने बजट पेश किया था और तमिल कवि तिरुवल्लुवर की कविता सुनाई थी- ‘इदिप्परई इल्लाथा इमारा मन्नान केदुप्पार इलानुअम केदुम’।

अरुण जेटली

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साल 2017 में मोदी सरकार का चौथा बजट पेश करते हुए वित्तमंत्री अरुण जेटली ने शायराना अंदाज में कहा था कि ‘इस मोड़ पर घबरा के न थम जाएं आप, जो बात नई है उसे अपनाएं आप, डरते हैं नई राह पे ये क्यूं चलने से, हम आगे-आगे चलते हैं, आ जाएं आप’।

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