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नाराज को राजी करने वाला बजट

Posted on: 01 Feb 2019 14:40 by Surbhi Bhawsar
नाराज को राजी करने वाला बजट

मुकेश तिवारी
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भाजपा द्वारा तीन प्रमुख राज्यों की सत्ता खो देने के बाद लोकसभा चुनाव की नजदीक आती बेला के बीच जैसा अंतरिम बजट मोदी सरकार की ओर से आने की उम्मीद की जा रही थी लगभग वैसा ही यह आया है। कार्यवाहक वित्तमंत्री के रूप में बजट पेश करने के लिए लोकसभा में खड़े हुए पीयूष गोयल के कांधे पर एक बड़ी जिम्मेदारी शायद यह भी थी कि वह भाजपा के परंपरागत वोटर की नाराजगी खत्म करें। अपने बजट भाषण में वह बड़ी चतुराई से ऐसा करते नजर भी आए। किसान, मजदूर और नौकरीपेशा मध्यम वर्ग का खास ख्याल बजट में रखा गया है। यही वह वर्ग है जिसकी नाराजगी का खामियाजा मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी को उठाना पड़ा था।

आयकर में छूट की सीमा बढ़ाए जाने की मांग मध्यमवर्ग की पुरानी मांग में से एक थी। इस मांग को पूरा किया जाना चुनाव के पहले स्वाभाविक था। ऐसा करके देश के करोड़ों मध्यमवर्गीय परिवारों को खुश करने की कोशिश वित्त मंत्री ने की। मध्यम वर्ग को भाजपा का मजबूत वोट बैंक माना जाता है। इधर विपक्ष भाजपा पर लगातार इस बात के लिए हमलावर रहता आया है कि वह किसानों और गरीब लोगों के लिए कुछ नहीं कर रही है। मोदी सरकार बड़े और अमीर लोगों को लगातार फायदा पहुंचा रही है। विपक्ष के इस हमले की धार को कम करने के लिए वित्त मंत्री ने किसानों और मजदूरों के लिए कई घोषणाएं बजट में की। किसानों का खास ध्यान रखा गया क्योंकि जिन प्रदेशों में हाल में कांग्रेस सत्ता में आई है वहां किसानों के हित में कई फैसले ताबड़तोड़ किए गए हैं। देश में गोवंश की बिगड़ती हालत को लेकर भी विपक्ष और सरकार के सहयोगी दलों के निशाने पर भी मोदी सरकार रहती आई है। इसलिए बजट में ‘कामधेनु योजना’ लाई गई है।

गोयल द्वारा आयकर की सीमा बढ़ाकर 5 लाख किए जाने पर लोकसभा में मोदी-मोदी के नारे की गूंज और किसान के खाते में 6000 रुपये हर साल डालने की घोषणा के वक्त ‘जय किसान’ के नारे लगना बताता है कि इन दोनों घोषणाओं का इस वक्त कितना महत्त्व है। फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर बजट के दौरान चमक और मुस्कान दिखना उनके द्वारा मेज थपथपाना भी बहुत कुछ कहता है।

लेखक Ghamasan.com के संपादक हैं।

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