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बजट 2019 : इस शायरी के साथ वित्त मंत्री ने खोला बजट का पिटारा

Posted on: 05 Jul 2019 12:41 by Pinal patidar
बजट 2019 : इस शायरी के साथ वित्त मंत्री ने खोला बजट का पिटारा

नई दिल्ली : देश की पहली पूर्ण कालिक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को लोकसभा में अपना पहला आम बजट पेश किया। बजट भाषण में शायरी और कविता को जगह मिलती रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी शेरों-शायरी के साथ अपनी बात कहने में माहिर हैं। हर वित्तमंत्री की बजट पेशी करने की शैली अलग रही है। निर्मला सीतारमण ने अपने बजट अभिभाषण की शुरुआत ‘यकीन हो तो कोई रास्ता निकलता है, हवा की ओट भी ले कर चराग जलता है’, शायरी से की।

ये शायरी उर्दू के मशहूर शायर मंजूर हाशमी की है जिसका मतलब है कि अगर आपको खुद पर यकीन हो तो हवा का सहारा लेकर भी चिराग जल जाता है। दरअसल, वित्त मंत्री ने चाणक्य नीति और मंजूर हाशमी की शायरी का उदाहरण इसलिए दिया क्योंकि वह उस वक्त भारतीय अर्थव्यवस्था के 5 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य की बात कर रही थीं। उन्होंने कहा, कार्य पुरुष करे ना लक्ष्यम संपा दायते। अर्थात मानव अगर दृढ़ संकल्प के साथ प्रयास करे तो कार्य जरूर सफल होता है।

साथ ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 5 ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था तक पहुंचने के लिए मुख्य तौर पर तीन बिंदुओं का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए बुनियादी ढांचे में भारी निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था के साथ रोजगार निर्माण और लोगों की आशा, विश्वास और आकांक्षाएं जरूरी हैं। साथ ही मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले आम बजट में वित्त मंत्री ने बताया कि मेक इन इंडिया के तहत जल, जल प्रबंधन, स्वच्छ नदियां, ब्लू इकॉनोमी, अतंरिक्ष कार्यक्रम, गगनयान, चंद्रयान और सेटेलाइट कार्यक्रमों पर खासतौर पर ध्यान दिया गया है।

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