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बजट 2019 -आयकर में संशोधन और प्रभाव, जाने

Posted on: 03 Feb 2019 12:32 by Ravindra Singh Rana
बजट 2019 -आयकर में संशोधन और प्रभाव, जाने

इस वर्ष 5 लाख तक आय वालो को कुछ भी टैक्स नहीं भरना है लेकिन आयकर में बेसिक छुट 250000/- की ही यथावत रखी गयी है लेकिन 5 लाख की छुट इसलिए मानी जाती है की यदि आपकी आय 2,50,000 से ऊपर है तो रिटर्न भरते वक्त टैक्स कैलकुलेशन में वह टैक्स कैलकुलेट तो करता है लेकिन धारा 87A के अंतर्गत मैक्सिमम 12500 की छुट दे देता है इस प्रकार जिनकी आय 5 लाख से कम होती है उनपर टैक्स की लायबिलिटी भी जीरो आती है  क्योकि सरकार की मंशा 5 लाख के ऊपर आय होनेवाले को उपरोक्त 12500 की छुट नहीं देना है.

मतलब जिनकी आय सभी छुट जैसे बीमा, बैंक व्याज वगेरह की छुट घटाने के बाद 5 लाख से ऊपर आती है तो उन्हें 12500 की छुट नहीं मिलेगी और उन्हें इस बजट से कोई राहत नहीं रहेगी. 250000 की बेसिक छुट बनाये रखने के पीछे सरकार का उद्देश्य यह रहा है की कुछ ट्रांसेक्शन के लिए रिटर्न भरना जरुरी होता है वे लोग कम आय होने पर भी रिटर्न रेगुलर भरते रहे. 60 से 79 वर्ष की उम्र वालो के लिए आयकर की बेसिक छुट 3,00,000 और 79 से ऊपर की उम्र वालो के लिए 5,00,000 है.

अब वेतनभोगी लोगो को जो पिछले बजट में 40000 का स्टैण्डर्ड डिडक्शन की छुट दी थी वह इस वर्ष 50000 की कर दी गयी है.

रेजिडेंशियल हाउस के संभंध में दो संशोधन किये है एक स्वय के रहने हेतु एक मकान पर आय को ‘जीरो’ लिया जाता था और जो लोन पर ब्याज देते थे उसकी छुट लेने के बाद ब्याज का घाटा होता था उसको दूसरी अन्य आय में से घटा देते थे इस प्रकार ब्याज की छुट उपलब्ध हो जाती थी. यदि दूसरा मकान भी है और वह किराये पर नहीं दिया गया है तो उसकी किराये की काल्पनिक आय लेना होती थी अब यह छुट यदि स्वय के रहने के लिए दो मकान है तो दोनों के लिए मिलेगी. मतलब दो मकानों को सेल्फ आकुपायड माना जायेगा. यदि मकान बनाने हेतु लोन लिया है तो दोनों मकान को मिलाकर टोटल २ लाख की छुट को यथावत रखा है. यदि हाउस प्रॉपर्टी में ब्याज 2 लाख से ज्यादा है  तो उसकी छुट नहीं मिलेगी और न ही कैर्री फॉरवर्ड मिलेगा लेकिन मकान या अन्य प्रॉपर्टी  किराये पर दी है तो ब्याज की मैक्सिमम छुट २ लाख उस वर्ष में मिलेगी अन्य दूसरी आय में से मिलेगी और बाकि लास को आनेवाले 8 सालो में प्रॉपर्टी की आय से सेट ऑफ मिलेगा.

परिवार में एक पुराना मकान बेचकर दो अलग अलग मकान दो सदस्यों के लिए ख़रीदे जाते है धारा 54 में पहले एक ही मकान खरीदने की छुट थी इस समस्या का समाधान किया है अब यदि कैपिटल गेन किसी पुराने रेजिडेंशियल हाउस को बेचकर दो नए मकान ख़रीदे जाते है और यदि कैपिटल गेन २ करोड़ तक है तो दोनों के में निवेश करने पर कैपिटल गेन टैक्स से छुट मिलेगी. यह जीवन में एक बार सुविधा उपलब्ध रहेगी और एक ही वर्ष में ही मिलेगी. मतलब एक बार ही आप्शन ले सकते है  बाकि केस में पुराना काननों लागु रहेगा. यदि कैपिटल गेन 2 करोड़ से ज्यादा है तो भी यह सुविधा नहीं मिलेगी.

धारा 80IBA के अंतर्गत उन लोगो को 100% प्रॉफिट की छुट मिलती है जो  21520 SQ.FT. के ऊपर की जमीन पर 645 SQ.FT. के कम के फ्लेट बनाता है उसे 5 वर्ष में प्रोजेक्ट पूरा करना होता है.  यदि वह 31.03.2020 तक नगर निगम से नक्शा पास कराकर आयकर नियमो का पालन करके प्रोजेक्ट करता है पहले इसकी परमिशन 2019 तक ही थी. डेवेलपर्स को इस और ध्यान देना चाहिए.

धारा 194-I जो ब्याज पर TDS काटने की बाध्यता के लिए है अब यदि आपको बैंक ब्याज 40000 तक वर्ष में मिलता है तो बैंक ,पोस्ट ऑफिस, बैंकिंग सोसाइटी आपका टीडीएस नहीं काटेगी. यदि ऑडिट की धारा में आनेवाला इंडिविजुअल /HUF ब्याज देता है और वह 5000 से ज्यादा ब्याज आपको देता है तो टीडीएस कटता है इसमें कोई परिवर्तन नहीं है.

CA Bharat Neema

9827539432 (कोई समस्या हो तो whastapp, ईमेल करके या फ़ोन करके पूछ सकते है)

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