मध्यप्रदेश के विख्यात कवि एवं व्यंग्यकार ब्रजेश कानूनगो की कविताओं का संग्रह “कोहरे में सुबह” प्रकाशित

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इस संग्रह में उनकी कुल सत्तर चुनिंदा रचनाओं का संयोजन है।

देश की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में आपके – बालगीत ,वैचारिक पत्र,व्यंग्य लेख, कविताएँ ,लघुकथाएँ ,और कहानियाँ प्रकाशित । आपकी कविताओं में अपने आसपास और अकेलेपन के दो छोरों के बीच के कई विषय दर्ज हुए हैं।अब तक आपके चार कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं।

समीक्षा अंश -जिन लोगों को ज़िन्दगी जीती है , वे लोग गहन दुःख में भी सुखद अनुभूति के क्षण खोज ही लेते हैं।उनके लिए जीवन का प्रत्येक पल किसी सुनहरी यादों सा स्मृतियों में चिरकाल तक अमिट हो जाता है । यह कहने में अतिश्योक्ति नहीं है कि ” कोहरे में सुबह ” नामक इस कविता संग्रह में मोजूद सभी कविताएँ उन लोगों के लिए ही सबसे महत्वपूर्ण हैं जिन्हें ज़िन्दगी जीती है ,जो हर पल को किसी उत्सव सा जीकर महसूस करते हैं।

कोहरे में सुबह

रैपर में लिपटी सुबह के भीतर
किलकारियाँ कैद है
किसी बच्चे का दूध छलक गया है तश्तरी में

दृश्य अब शुरू होने को है
लहराने लगा है संवेदनाओं का पर्दा
चूड़ियों की खनक और
गजरों की महक से भरने लगी है हवा

सुबह का रैपर हटेगा
तो दिखाई देगी तश्तरी में छपी तस्वीर

पहाड़ियों के बीच से मुस्कुराने लगेगा सूरज
और तश्तरी के दूध को गटक जाएगा बच्चे की तरह

बबूल में उलझ जाएगा झोपडी से निकला धुआँ
गर्म रोटियों की खुशबू से लद जाएँगी डालियाँ

ठीक इसी वक्त
पक्षियों का एक समूह निकल जाएगा रोज की यात्रा पर.

ब्रजेश कानूनगो

पुस्तक समीक्षा : सुदर्शन वीरेश्वर प्रसाद व्यास
पुस्तक : कोहरे में सुबह { कविता संग्रह }
रचनाकार : ब्रजेश कानूनगो
प्रकाशक : बोधि प्रकाशन
मूल्य : 120 रूपये मात्र

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