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बीपी मंडल जिनकी सिफ़ारिशों ने देश की राजनीति की दिशा बदल दी थी | BP Division whose references had changed the direction of the Country’s Politics

Posted on: 13 Apr 2019 16:59 by Surbhi Bhawsar
बीपी मंडल जिनकी सिफ़ारिशों ने देश की राजनीति की दिशा बदल दी थी | BP Division whose references had changed the direction of the Country’s Politics

नीरज राठौर

13 अप्रैल बी पी मंडल जी की पुण्यतिथि पर उन्हें सादर नमन करता हु वो इस देश के 72 करोड़ ओबीसी समुदाय के प्रेरणा स्त्रोत है। माननीय बी.पी.मंडल जी की अध्यक्षता में 1 जनवरी,1979 को दूसरा पिछड़ावर्ग आयोग बना था। इस संवैधानिक मंडल आयोग ने पूरे देश में घूम-घूमकर 3743 जातियों को सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से सही जांच के बाद अपने रिपोर्ट में ओबीसी की सूची में शामिल किया था। 31 दिसम्बर,1980 को अपनी संवैधानिक रिपोर्ट भारत सरकार को सौंप दी थी। जिसमें आयोग ने मुख्य रूप से निम्न संवैधानिक सिफारिशें कि थी:-

  1. ओबीसी को सरकारी सेवाओं में 27% आरक्षण (जिसे 1980 से 1989 तक किसी सरकार ने लागु नहीं किया लेकिन 7 अगस्त 1990 को वी.पी. सिंह सरकार ने लागू किया)
  2. प्रोन्नति में ओबीसी को आरक्षण (जिसे 1980 से आज 2017 तक किसी सरकार ने लागू नहीं किया)
  3. ओबीसी का कोटा न भरने पर तीन साल तक खाली रखने (जिसे 1980 से आज 2017 तक किसी सरकार ने लागू नहीं किया)
  4. SC/ST की तरह ही आयु सीमा में ओबीसी को छूट देने (जिसे 1980 से आज 2017 तक किसी सरकार ने लागू नहीं किया)
  5. SC/ST की तरह ही पदों के प्रत्येक वर्ग के लिए सम्बन्धित पदाधिकारियों द्वारा रोस्टर प्रणाली अपनाने (जिसे 1980 से आज 2017 तक किसी सरकार ने लागू नहीं किया)
  6. वित्तीय सहायता प्राप्त निजी क्षेत्र में ओबीसी का आरक्षण बाध्यकारी बनाने (जिसे 1980 से आज 2017 तक किसी सरकार ने लागू नहीं किया)
  7. कालेज, विश्वविद्यालय में आरक्षण योजना लागू करने (जिसे 2006 में अर्जुनसिंह ने लागु किया.)
  8. ओबीसी को फ़ीस राहत, वजीफा, छात्रावास, मुफ्त भोजन, किताब, कपड़ा उपलब्ध कराने (जिसे 1980 से आज 2017 तक किसी सरकार ने लागू नहीं किया)
  9. वैज्ञानिक, तकनीकी, व्यवसायिक संस्थानों में ओबीसी को 27% आरक्षण देने (जिसे वी पी सिंह ने नहीं, अर्जुन सिंह ने लागू किया था )
  10. ओबीसी के छात्रो को विशेष कोचिंग का इंतजाम करने (जिसे 1980 से आज 2017 तक किसी सरकार ने लागू नहीं किया)
  11. ओबीसी के भूमिहीन मजदूरों को भूमि देने (जिसे 1980 से आज 2017 तक किसी सरकार ने लागू नहीं किया)
  12. पिछड़ों की तरक्की के लिए पिछड़ावर्ग विकास निगम बनाने (जिसे 1980 से आज 2017 तक किसी सरकार ने लागू नहीं किया)
  13. राज्य व केंद्र स्तर पर ओबीसी का अलग मंत्रालय बनाने (जिसे 1980 से आज 2017 तक किसी सरकार ने लागू नहीं किया)

मंडल कमीशन की कई सिफ़ारिशें लागू होना बाक़ी है :-

मंडल आयोग की सिफारिशों के आधार पर पहले 1990 में पिछड़ा वर्ग को नौकरियों में आरक्षण मिला और बाद में मनमोहन सिंह की सरकार के कार्यकाल के दौरान साल 2006 में उच्च शिक्षा में ये व्यवस्था लागू की गई।

मंडल आयोग की सिफ़ारिशें लागू होने, ख़ास कर नौकरी संबंधी सिफ़ारिश के लागू होने के बाद पिछड़ा वर्ग से आने वाली एक बड़ी आबादी अब जवान हो चुकी है।

ऐसे में मैंने युवा नेता और अखिल भारतीय ओबीसी महासभा के नेशनल प्रेसिडेंट ललित गौर से पूछा कि युवा पीढ़ी उन्हें किस रूप में याद करती है?

ललित गौर कहते हैं, ”मंडल कमीशन ने इस देश में एक नई चेतना का विस्तार किया है। मंडल के दौर में हम बच्चे थे. सिफ़ारिशों के लागू होने से हुई सामाजिक हलचल को मैंने देखा है। पिछड़ा वर्ग से आने वाले युवा उन्हें एक नायक, एक आइकन, एक उद्धारक के रूप में याद करते हैं।’

दूसरी ओर मंडल आयोग की कई अहम सिफ़ारिशों को अभी भी ज़मीन पर उतारा जाना बाकी है। ये जानना दिलचस्प है कि एक जमींदार परिवार से ताल्लुक रखते हुए भी मंडल आयोग की सिफ़ारिशों में भूमि सुधार संबंधी सिफ़ारिश भी है।

विश्व हिन्दू सत्य शोधक मिशन के स्वामी सत्यानन्द जी महाराज ने ओबीसी की समस्याओ पर बहुत रिसर्च की है वो कहते हैं, ”देश की विशाल आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले पिछड़ा वर्ग को आज़ादी के क़रीब पांच दशक बाद मंडल आयोग की एक सिफ़ारिश लागू होने से अधिकार मिला। लेकिन सामाजिक न्याय को पूरी तरह से ज़मीन पर उतारने के लिए उनकी दूसरी कई सिफ़ारिशों को भी लागू किया जाना ज़रूरी है. जिनमें शिक्षा-सुधार, भूमि-सुधार, पेशागत जातियों को सरकारी स्तर पर नई तकनीक और व्यापार के लिए वित्तीय मदद मुहैया कराने से जुड़ी सिफ़ारिशें शामिल हैं। इन्हें लागू करना ही बीपी मंडल को सही मायनों में श्रद्धांजलि देना होगा।”

स्वामी जी कहते है की बी जे पी एवं कांग्रेस हो या कोई भी राजनैतिक दल उन्हें मंडल कमीशन की सारी सिफ़ारिशो को इमानदारी से मान लेना चाहिए एवं 72 करोड़ ओबीसी के साथ बेईमानी नहीं करनी चाहिए।

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