भाजपा का आरोप, प्रदेश को एक नहीं, ढाई मुख्यमंत्री चला रहे

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इंदौर। भाजपा नगर अध्यक्ष गोपीकृष्ण नेमा और जिला अध्यक्ष अशोक सोमानी ने पत्रकार वार्ता कर कांग्रेस सरकार के छह माह की उपलब्धियों को झूठा और नाकाम करार दिया है। उन्होंने कहा कि 6 महीने में प्रदेश का बुरा हाल हो गया है, जो सबके सामने है। सरकार ने प्रदेश की जनता को 15 वर्ष पूर्व के हालात पुनः बताने का काम इन 6 माह में किया है।

मप्र की यह कांग्रेस सरकार अपने वचन पत्र में जनता को दिए वचनों को कागजों के ऊपर ही पूरा कर अपनी उपलब्धियां बता रही है। वास्तविकता से इसका कोई लेना देना नहीं है। पिछले 6 महीने में समृद्ध मप्र को कांग्रेस सरकार ने अराजकता, अशांति, अपहरण और हिंसा का गढ़ बना दिया है। पूरे प्रदेश में भय, आतंक, अराजकता का माहौल बन गया है। इंदौर में दिन दहाड़े बच्चे का अपहरण हुआ, चित्रकूट में अपहरण और हत्या हुई और गृहमंत्री ही लापता रहे।

प्रदेश की जनता ने देखा कि कांग्रेस के नेता और गुंडे कैसे चुने हुए जनप्रतिनिधियों का अपमान कर जनादेश को खंडित करने में लगे हैं। मासूम बेटियों के साथ निरंतर हो रही दरिंदगी पर सरकार की खामोशी भी शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि इन 6 महीनों में प्रदेश की जनता ने देखा है कि प्रदेश को एक नहीं, दो नहीं, बल्कि ढाई मुख्यमंत्री चला रहे हैं। प्रदेश की जनता को एक नया अनुभव हुआ है कि राज्य में मुख्यमंत्री के ऊपर भी एक सुपर सीएम है। यही नहीं प्रदेश के मंत्री कन्या विवाह में देशी विदेशी पिलाने की व्यवस्था करने में लग गए। साथ ही प्रदेश सरकार के ये मंत्री बुजुर्ग किसानो को बीड़ी, खैनी, तंबाखू खिलाने की बातें करने लगे हैं।

हम सब देख रहे हैं कि विगत 6 महीनों में प्रदेश के कृषि मंत्री मुख्यमंत्री से बिना पूछे किसान कल्याणकारी योजनाओं को बंद करने में लगे हैं। प्रदेश में श्रमिकों के हित में बनी संबल योजना बंद कर दी गई है। साथ ही प्रदेश प्रदेश की जनता के लिए चलाई जा रही, राज्य बीमारी सहायता योजना भी बंद कर दी जाती है। इनके मुखिया का कथन 10 दिन में किसानों का कर्जा माफ करने का वचन देने वाली धोखेबाज सरकार प्रदेश में है, लेकिन अभी तक किसी भी किसान का 2 लाख तक का कर्जा माफ नहीं हुआ।

कर्जा माफी के नाम पर हरा, लाल, पीला फाॅर्म भराकर किसानों को सिर्फ टहलाने का काम हुआ है। यंू देखा जाए तो प्रदेश में टाइम पास सरकार है। सरकार ने एकमुश्त 2 लाख तक का कर्ज माफ करने की बात कही थी, लेकिन अब इस कर्ज माफी को सरकार चरणों में बांट रही है। दूसरे चरण की घोषणा 2 दिन पहले की गई है, जिसमें 50 हजार तक के कर्ज माफी की बात कही गई, जो कि किसानों के साथ बहुत बड़ा धोखा है। इसी के साथ ओला-पाला से नुकसान हुई फसल का जायजा लेने अब मुख्यमंत्री तो दूर पटवारी, अधिकारी, मंत्री भी किसानों के पास नहीं पहुंच रहे हैं।

मंडियों में किसान भाई गेहूं लेकर खड़े हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला एक अधिकारी नहीं मिल रहा है। सरकार ने फसल खरीदी के परिवहन की व्यवस्था तक नहीं की और किसान रात-रात भर मंडी के बाहर सोने को मजबूर हैं। यहां तक भी हो गया कि सरकार खरीदी केंद्रों में किसानों की बोरियों को सिलने के लिए रस्सी तक उपलब्ध नहीं करा पाई। कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में पंचायतों को रेत खनन का अधिकार देने का वचन दिया था, पर सरकार में आते ही रेत माफिया के सामने उसने अपने घुटने टेक दिए। अब यह अधिकार पंचायतों को नहीं मिलेगा।

प्रदेश में 6 माह पूर्व तक बिजली सप्लाई में किसी तरह की परेशानी नहीं थी, लेकिन इनके सरकार में आने के साथ ही एक बार फिर बिजली की कटौती शुरू हो गई है और लालटेन युग की वापसी हुई है। जनता लगातार बिजली कटौती से परेशान हो रही है, लेकिन सरकार को जनता की कोई परवाह नहीं है। इनकी 6 महीनों की उपलब्धियों के बारे में जो किताब में लिखा हैं, जमीन पर पूर्णतः असत्य है। बिजली की उपलब्धता के आंकड़े सरकार बता रही है, किंतु घरों में बिजली की सप्लाई देने में असमर्थ है, जबकि प्रदेश के अधिकारी कर्मचारी ट्रांसफर (तबादला) से और जनता ट्रांसफाॅर्मर से परेशान है। सरकार थोक बंद तबादले में लगी रही।

प्रशासन और ला एंड ऑर्डर की व्यवस्था चरमरा गई। प्रदेश में 500 से ज्यादा तबादले अब तक हो चुके हैं। 50 से ज्यादा कलेक्टर और एसपी के तो पिछले 6 महीनों में 2 बार से ज्यादा ट्रांसफर हो चुके हैं। प्रदेश में तबादलों से उगाही का उद्योग चल रहा हैं। ट्रांसफर पर से बैन हटने से पहले ही 15000 तबादलें कर डालें गए, जबकि तबादलों के छूट की अवधि में क्या होगा अंदाजा लगाइए। अब की बार मध्यप्रदेश में यू-टर्न सरकार। वंदे मातरम पर यू-टर्न लिया गया भावंतर योजना पर यू-टर्न लिया गया संविदा की सुरक्षा पर यू-टर्न लिया, गया मीसा बंदियों की पेंशन पर यू-टर्न लिया, किसान सम्मान निधि पर भी यू-टर्न लिया गया।

उन्होंने बताया कि जिले की जनता बिजली, सड़क, पानी से पूरी तरह परेशान है। इनके द्वारा विकास को बाधित करते हुए मुख्य मार्गो के निर्माणों को विराम लगा दिया गया। नगर की जनता इनका सुशासन देख रही है, जिसमें इनके नेता सरेआम पुलिस प्रशासन से अभद्रता और हुडदंग कर सरकार का दबाव बनाकर उन्हें अपने कार्य स्थल से लाइन अटैच करवा रहे हैं। इन 6 माह के शासन में ही 2003 के पहले जैसे मध्यप्रदेश का फिर आगाज हो चुका है, जनता को 15 साल के पूर्व वाले मध्यप्रदेश का एहसास दिलाने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ जी का धन्यवाद, जनता आपको समझ गई है और जल्द ही बड़े बदलाव के इंतजार में है।

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