सत्ताईस साल में मंदिर नही बना,800 करोड़ का BJP दफ्तर बना- मिश्रा | Temple not built in twenty-seven years, Rs 800 crore BJP office- Mishra

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भाजपा संकल्प-पत्र में राम मंदिर का मुद्दा पुनः उछालकर कर धर्म की आड़ में अपनी राजनैतिक-आर्थिक समृद्धि करना चाह रही है….आखिरकार, वह कब तक चलेगी पैतरेबाजी व दोहरे चरित्रों के मापदंड….. 27 सालों में मंदिर तो नहीं,सिर्फ 4सालों में 800 करोड़ का भाजपा कार्यालय कैसे बन गया….मंदिर निर्माण पर भाजपा(BJP) नेताओं के ही विरोधाभासी बयान उसके चाल, चरित्र और चेहरे को उजागर कर रहे हैं – के.के.मिश्रा

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता के.के.मिश्रा ने सोमवार को भाजपा द्वारा जारी संकल्प-पत्र में राम मंदिर निर्माण अनुच्छेद-370 और समान कानून जैसे मुद्दों को एक बार फिर उछालने की कोशिशों को अपनी राजनैतिक-आर्थिक समृद्धि को संवारने का उपक्रम व राजनैतिक जुमला बताया है। उन्होंने उक्त आरोप को स्पष्ट करते हुए अपनी राजनैतिक सुविधा की दृष्टि से मंदिर निर्माण को लेकर भाजपा नेताओं के विरोधाभासी बयानों के संकलित बयानों को आधार बनाते हुए कहा है कि आखिरकर भाजपा देश और हिन्दू धर्मावलंबियों को कब तक पैतरेबाजी व दोहरे मापदंडों से मूर्ख बनाती रहेगी?

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मिश्रा ने निम्न प्रामाणिक तथ्यों के आधार पर मंदिर निर्माण को लेकर भाजपा से अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है –

(1) 8 जून,98 को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटलबिहारी बाजपेयी  ने लोकसभा में कहा कि “अयोध्या विवाद पर अदालत का फैसला मान्य होगा,बाद में भाजपा ने कहा यह मुद्दा जनता की अदालत तय करेगी?

(2) 2 दिसम्बर,2002 को बाबरी विध्वंस के बाद उन्होंने मन्दिर निर्माण को राष्ट्रीय भावनाओं का प्रकटीकरण बताया,कहा वह कार्य अभी भी अधूरा है?

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(3)17 दिस.1992 को तत्कालीन राव सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में बहस शुरू करते हुए श्री अटलबिहारी बाजपेयी ने कहा था ” अयोध्या में विवादित ढांचे को ध्वस्त करने वाले कारसेवक अपनी जिम्मेदारी स्वीकारें,इसके लिए यदि उन्हें सजा भी मिलती है तो वे उसे भोगें,क्योंकि राम मंदिर का निर्माण छल व छद्म के सहारे नहीं हो सकता है।सत्ता प्राप्ति के बाद बदली हुई  परिस्थितियों में वे अदालती कार्यवाही में आरोपियों के बचाव में बदली हुई भूमिका में दिखाई दिए!

(4) 13 जन. 2003 को विहिप के तत्कालीन अंतर्राष्ट्रीय महासचिव डॉ. प्रवीण तोगड़िया ने कहा,”6 दिस.2002 को हमने विवादास्पद स्थल ढहाया, जहां राम का वास्तविक व विधिसम्मत मंदिर था”!

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(5) 14 जन. 2003 को जबलपुर में तोगड़िया ने ही कहा “हमने 6 दिस. को राम के वास्तविक व विधि सम्मत मंदिर को ढहाया,जो जीर्णशीर्ण हालत में था! अब प्रश्न यह है कि क्या मंदिर गिराने वाले कारसेवक हिन्दू हो सकते हैं,उनका यह कथन किस हिंदुत्व का परिचायक है,जिस विचारधारा ने खुद ही मंदिर ढहाने की बात सार्वजनिक रूप से कबूली है, आज वे ही अपने संकल्प-पत्र में किस मंदिर निर्माण की बात कर रहे हैं?

(6) 3 अप्रेल,2003 इन्होंने ही यह भी स्वीकारा कि बाबरी मस्जिद विध्वंस व गुजरात के दंगों में विहिप का हाथ था।यदि यह सच है तो भाजपा से विहिप के रिश्ते क्या हैं, स्पष्ट होना चाहिए ? इसी दिन उन्होंने यह भी घोषणा की कि हमारा भगवा संगठन शांतिपूर्ण आंदोलन के साथ अराजकतापूर्ण रवैया भी अपना सकता है! लोकतंत्र में धर्म के नाम पर किसी भी समूह या संगठन द्वारा अराजकता परोसने की खुले रूप से बात करना क्या न्यायोचित है?

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मंदिर निर्माण को लेकर अपनी राजनैतिक सुविधाओं को दृष्टिगत रख भाजपा ने अपने विरोधाभासी बयानों से देश को कब-कब व कैसे-कैसे छला, अब उसकी बानगी देखिए—

(1) 26 अगस्त,2001 को नागपुर में भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बंगारू लक्ष्मण ने कहा अब इन मुद्दों पर जनता की रुचि नही है!

(2) 2 फरवरी,2002 को दिल्ली में पार्टी के एक अन्य राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जनाकृष्ण मूर्ति ने कहा कि भाजपा ने न केवल मंदिर मुद्दा छोड़ दिया है,बल्कि उन्होंने अदालती आदेश की अवहेलना पर विहिप को परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दे डाली थी!मंदिर निर्माण को लेकर ऐसे ही विरोधाभासी बयान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में श्री राजनाथसिंह ने भी दिए थे?

(3) लोकसभा व कुछ प्रान्तों में विधानसभा चुनावों की निकटता देख 21 जन.2003 को दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में तत्कालीन उप प्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी ने कहा,भाजपा आगामी चुनावों में अपनी विचारधारा पर लौटेगी,यानि तीनों मुद्दे बरकरार हैं। राजग न्यूनतम साझा कार्यक्रम सरकार चलाने के लिए है।भाजपा एजेंडे में वह बंधनकारी नहीं है!

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(4) 6 दिस.92 की घटना के बाद उ.प्र. विधानसभा चुनाव में कल्याणसिंह के नेतृत्व वाली सरकार को मंदिर बनाने के पक्ष में प्राप्त जनादेश बताने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी 17 मई,1992 को जयपुर में यह कह गए कि -” भाजपा कोई कंस्ट्रक्शन कंपनी नहीं है,जो मंदिर निर्माण करे, वह तो केवल इसके निर्माण में आ रही बाधाओं को दूर करेगी।यह काम तो मंदिर निर्माण यज्ञ समिति,कारसेवा समिति व न्यास मंडल पर निर्भर है!

मिश्रा ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक तथ्य है कि भाजपा व उससे जूड़े नेताओं ने मूल्यों,नीतियों से परे सिद्धांतविहीन होकर विध्वंस के सहारे अपने दोहरे चाल, चरित्र,चेहरों व भाषा से अपनी राजनैतिक-आर्थिक ताकत में इजाफ़ा किया है,राजनैतिक लक्ष्यपूर्ति के लिए ऐसी घृणित राजनीति लोकतंत्र के लिए घातक है।

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उन्होंने लोकसभा चुनाव में अपने संकल्प-पत्र में इस बार फिर राममंदिर मुद्दे को शामिल करने वाली भाजपा से पूछा है कि राममंदिर निर्माण के नाम पर हुए आंदोलन के दौरान 27 सालों पहले एकत्र 8 हजार करोड़ रु.कहाँ,किस बैंक व खाते में जमा है,उसका संचालन कौन कर रहा है, ब्याज सहित यह राशि कितनी होकर किसके नियंत्रण में है?

मिश्रा ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि पिछले 27 सालों में राममंदिर तो नहीं बन सका किन्तु मोदी सरकार काबिज़ होने के मात्र 4 सालों में ही देश की राजधानी नई दिल्ली में 800 करोड़ रु.का भाजपा मुख्यालय कैसे बन गया,सार्वजनिक होना चाहिए। ईमानदार भाजपा के पास इतना पैसा कहां से आया?

सादर प्रकाशनार्थ,

के.के.मिश्रा

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