सिन्धन् खे एतरो न रजा़यों….

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कीर्ति राणा

कहा तो जाता है कि माल बेचने की कला चीनी जानते हैं जो गंजे को भी कंघा बेच देते हैं।चीन की इस कला का जिक्र करते वक्त हम भूल जाते हैं कि सिंधी समाज मेड इन चाइना वाले माल को मेड इन इंडिया बनाकर चीन में बेच आने का हुनर रखता है। अंग्रेजों ने यदि मुफ्त में चाय पिलाकर भारत को चाय की लत लगाई तो सिंधी समाज ने खट्टे-मीठे स्वाद वाली नारंगी (ईनाम) गोली की तरकीब से अपनी किराना दुकानों पर बच्चों को स्थायी ग्राहक बना कर मोहल्ले के हर रसोईघर तक अपनी दुकान का सामान आसानी से पहुंचाया।

एक कहावत अकसर सुनने में आती है जिसने की शरम, उसके फूटे करम। कम से कम सिंधी समाज पर तो यह कहावत लागू नहीं होती।यह समाज मेहनत का तो पर्याय है ही प्रदेश सहित देश की आर्थिक तरक्की में भी बराबर का भागीदार है।ऐसा क्या हुआ कि भोपाल का सिंधी समाज काम धंधा छोड़कर भाजपा विधायक के खिलाफ सड़कों पर उतर आया?

जैसे पहले भाजपा में यह बात प्रचलित थी कि मुस्लिम वोट तो कांग्रेस को जाते हैं, वैसे ही सिंधी समाज को लेकर कांग्रेस में यह माना जाता था यह तो बीजेपी का वोट बैंक है।इस बार ऐसा क्या हुआ कि भाजपा ने इस समाज को एक भी टिकट लायक नहीं समझा और कांग्रेस ने भोपाल की जिस हुजूर सीट से नरेश मेघचंदानी को प्रत्याशी बनाया वहां भाजपा प्रत्याशी (वर्तमान विधायक) रामेश्वर शर्मा के ऐसे बोल बिगड़े कि सिंधी समाज उन्हें पार्टी से बर्खास्त करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आया।

हांलाकि अभी यह सिद्ध नहीं हुआ है और रामेश्वर शर्मा को भी यह कहने का हक है कि जो ऑडियो क्लिप वॉयरल हुई है उसमें उनकी (शर्मा की) आवाज नहीं है। जिस ऑडियो क्लिप को लेकर सिंधी समाज गुस्से में है वह हुजूर विधानसभा क्षेत्र से संबंधित है जिसमें (कथित) रामेश्वर शर्मा हुजूर क्षेत्र के किसी सोनू तोमर से मदद करने का अनुरोध करते हुए क्षेत्र में हिंदी, सिंधी का मुद्दा फैलाने के साथ ही सिंधियों को गाली देते सुनाई दे रहे हैं। यह वीडियो मतदान के दौरान वॉयरल हुआ था, चुनाव शांतिपूर्ण निपट जाने के बाद अब सिंधी समाज ने पहला जंगी प्रदर्शन सिंधी पंचायत प्रदेश अध्यक्ष भगवान देव इसरानी के नेतृत्व में भोपाल में किया है। बहुत संभव है कि असंतोष की आग पूरे प्रदेश में फैल जाए, उससे पहले भाजपा को डेमेज कंट्रोल की दिशा में पहल करना ही चाहिए। सिन्धन् खे एतरो न रजा़यों (अर्थात सिंधी समाज को इतना नाराज तो मत करो।)

भाजपा को यह तो याद होगा कि प्रदेश ही नहीं देश का सिंधी समाज उसके प्रति समर्पित है। समाज को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि एलके आडवाणी को जो सम्मान मिलना था वो मिला कि नहीं या कि वर्तमान सत्ता-संगठन प्रमुख ने उन्हें परिदृश्य से गायब क्यों कर दिया।सिंधी समाज ने बंटवारे का दर्द भोगा है, जब अपना घर-संपत्ति आदि छोड़कर पाकिस्तान से रोटी वाला तवा सीने से लगाकर जैसे तैसे भारत में आए थे तब सरकार ने जितनी मदद करना थी कि लेकिन जख्मों पर मरहम लगाने, बहन-बेटियों की रक्षा से लेकर सिंधियों के आवास-भोजन आदि जरूरतों में आरएसएस चट्टान की तरह साथ रहा था।मुसीबत में मिले संघ के साथ के कारण ही सिंधी समाज ने बैलजोड़ी, गाय-बछड़े को पुचकारने में दिलचस्पी नहीं दिखाई लेकिन विधायक शर्मा का ये कथित अमर्यादित आचरण संकेत दे रहा है कि सिंधी समाज ने पंजे को कस कर पकड़ना शुरु कर दिया है।

इस के पीछे भोपाल में यही एक कारण हो सकता है लेकिन देश भर में सिंधी समाज हाल के वर्षों में वैचारिक बदलाव की और कदम बढ़ाने लगा है तो उसका कारण जीएसटी और नोटबंदी जैसे प्रमुख कारण भी हैं।अब जबकि इन दोनों निर्णयों में सरकार के कल तक सहायक रहे जानकार भी इस्तीफा देने के बाद दबे स्वर में जल्दबाजी में उठाए कदम के नुकसान को स्वीकारने लगे हैं तो देश का आम व्यापारी तो उनसे अधिक समझदार निकला जो काफी पहले से कहता रहा है कि नोटबंदी और जीएसटी ने धंधा चौपट कर दिया, बाजार ठंडा है। इस बाजार में होने वाले हर तरह के व्यापार में सिंधी समाज का योगदान कम नहीं है, टिकट नहीं मिलेगा चलेगा, आडवानी को गुमनामी के अंधेरे में ढकेल दिया वो भी चलेगा लेकिन धंधा नहीं चलेगा, पेट पर लात पड़ेगी तो बाबा ये नहीं चलेगा। भोपाल में सिंधी समाज ने जो गुस्सा दिखाया है उसके अदृश्य कारण ये सब भी हैं, रामेश्वर शर्मा या प्रदेश भाजपा उदारता दिखाए तो समाज मान भी जाएगा लेकिन बाकी मुद्दों का क्या होगा।

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