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Birthday Special: आज अमृता प्रीतम जी के जन्मदिवस पर सादर सुमन,नमन। प्रतिभा सिंह राठौर की कलम से….

Posted on: 31 Aug 2018 21:58 by krishnpal rathore
Birthday Special: आज अमृता प्रीतम जी के जन्मदिवस पर सादर सुमन,नमन। प्रतिभा सिंह राठौर की कलम से….

हिंदी और पंजाबी भाषा में,लिखने वाली अमृता जी लेखक ,कवि ,उपन्यासकार के रूप में शीर्षस्थ हैं।अमृता प्रीतम जी लोकप्रिय पंजाबी लेखकों में से एक थी। पंजाबी भाषा की पहली कवयित्री के रूप में इन्हें माना जाता है। लगभग 100 पुस्तकें इनके नाम हैं,जिन्हें अपनी अद्भुत लेखन शैली से इन्होंने संवारा है। आत्मकथा ‘रसीदी टिकट’ बेहद चर्चित रही। साहित्य अकादमी पुरस्कार,ज्ञानपीठ पुरस्कार औऱ ‘पद्मविभूषण ‘ सम्मान से नवाजी गईं अमृता जी की पुस्तकों का, कई भाषाओं में अनुवाद हुआ। जाने कितनी उपलब्धियाँ, कितने सम्मान उनके हिस्से में है।
नमन पुनः।

उनके शब्दों के साथ….

अमृता प्रीतम की वसीयत

अपने पूरे होश-ओ-हवास में
लिख रही हूँ आज… मैं
वसीयत ..अपनी
मेरे मरने के बाद
खंगालना.. मेरा कमरा
टटोलना.. हर एक चीज़
घर भर में ..बिन ताले के
मेरा सामान.. बिखरा पड़ा है

दे देना… मेरे खवाब
उन तमाम.. स्त्रियों को
जो किचेन से बेडरूम
तक सिमट गयी ..अपनी दुनिया में
गुम गयी हैं
वे भूल चुकी हैं सालों पहले
खवाब देखना

बाँट देना.. मेरे ठहाके
वृद्धाश्रम के.. उन बूढों में
जिनके बच्चे
अमरीका के जगमगाते शहरों में
लापता हो गए हैं

टेबल पर.. मेरे देखना
कुछ रंग पड़े होंगे
इस रंग से ..रंग देना उस बेवा की साड़ी
जिसके आदमी के खून से
बोर्डर… रंगा हुआ है
तिरंगे में लिपटकर
वो कल शाम सो गया है

आंसू मेरे दे देना
तमाम शायरों को
हर बूँद से
होगी ग़ज़ल पैदा
मेरा वादा है

मेरा मान , मेरी आबरु
उस वैश्या के नाम है
बेचती है जिस्म जो
बेटी को पढ़ाने के लिए

इस देश के एक-एक युवक को
पकड़ के
लगा देना इंजेक्शन
मेरे आक्रोश का
पड़ेगी इसकी ज़रुरत
क्रांति के दिन उन्हें

दीवानगी मेरी
हिस्से में है
उस सूफी के
निकला है जो
सब छोड़कर
खुदा की तलाश में

बस !
बाक़ी बची
मेरी ईर्ष्या
मेरा लालच
मेरा क्रोध
मेरा झूठ
मेरा स्वार्थ
तो
ऐसा करना
उन्हें मेरे संग ही जला देना..

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