मध्य प्रदेश सरकार को बड़ा झटका, निकाय सीमाओं की प्रक्रिया पर लगी रोक

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KamalNath

मध्य प्रदेश सरकार को बड़ा झटका। पूरे मध्य प्रदेश में नगर पालिका एवं नगर निगम की सीमाओं को घटाने बढ़ाने की प्रक्रिया पर लगा स्टे।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय इंदौर खंडपीठ द्वारा पार्षद दिलीप शर्मा की याचिका पर सुनवाई उपरांत शासन द्वारा कॉलेक्टरों को अधिकृत कर प्रारंभ की गई प्रक्रिया पर रोक लग गयी है। इंदौर में बांक व नैनोद को शामिल करने की प्रक्रिया भी रुकी। याचिकाकर्ता की और से वरिष्ठ अधिवक्ता पीयूष माथुर, पुरुषेन्द्र कौरव व पुष्यमित्र भार्गव ने तर्क रखे थे।

भारतीय जनता पार्टी के वार्ड क्रमांक – 71 के पार्षद भारत पारख द्वारा शासन के नोटिफिकेशन एवं कलेक्टर के नोटिफिकेशन को चुनौती देते हुए याचिका क्रमांक 23484 / 19 उच्च न्यायालय के सम्मुख प्रस्तुत की गई थी , जिस पर सुनवाई उपरांत मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने आदेश सुरक्षित रखा था, मामले की सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति श्री सतीश चंद शर्मा की खंडपीठ ने की
याचिका का मुख्य आधार यह था कि नगर निगम एक्ट की धारा 405 ( 1 ) के अन्तर्गत माननीय महामहिम के अधिकार कलेक्टर को प्रत्यायोजित करना संविधान के विपरीत है . तथा शासन को इस प्रत्यायोजित करने का कोई अधिकार नहीं है । दूसरा आधार यह लिया गया था कि कलेक्टर द्वारा बांक नेनोद को शामिल करने की कार्रवाई बिना किसी आधार के एवं नगर निगम के उद्देश्य के विपरीत की गई थी |
इस आधार पर माननीय उच्च न्यायालय ने सुनवाई कर राज्य सरकार के विरुद्ध स्टे दिया।

याचिकाकर्ता भारत पारख की ओर से पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता श्री पियूष माथुर , श्री पुरुषेन्द्र कौरव एवं पुष्यमित्र भार्गव ने रखा , शासन की ओर से पक्ष अतिरिक्त महाधिवक्ता रविंद्र छाबड़ा ने रखा ।

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