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भय्यूजी महाराज बने ब्लैकमेलिंग व साजिश का शिकार

Posted on: 08 Feb 2019 15:13 by Ravindra Singh Rana
भय्यूजी महाराज बने ब्लैकमेलिंग व साजिश का शिकार

हाईप्रोफाइल संत भय्यूजी महाराज की आत्महत्या के मामले से पुलिस ने पर्दा उठाने का दावा करते हुए उनके सबसे अधिक विश्वास पात्र सेवादार विनायक दुधाले, उसके साथ शरद देशमुख और महाराज के यहां पिछले 3 सालों से केयरटेकर के रूप में नौकरी कर रही युवती पलक पुराणिक को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि सेवादार विनायक दुधाले ने साजिशतन पलक पुराणिक को महाराज के घर पर उनकी बीमार मां के केयरटेकर के रूप में नौकरी दिलाई थी।

उसके बाद पलक ने धीरे-धीरे महाराज से करीबी बढ़ाई और उनसे संबंध बना लिये। बाद में वह विनायक व शरद के इशारे पर महाराज को शादी करने के लिए ब्लैकमेल करने लगी और लाखों की वसूली भी की। एक समय ऐसा आया कि ब्लैकमेलिंग से त्रस्त महाराज ने अपनी बेटी के कमरे में खुद को गोली मारकर सुसाइड कर लिया। पुलिस ने पलक, विनायक व शरद के खिलाफ सुसाइड के लिए मजबूर करने, साजिश रचने सहित अनेक धाराओं के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया और जेल भिजवा दिया है। पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ कर जो खुलासा किया है उससे कहानी कुछ इस प्रकार बनती है।

भय्यूजी महाराज ने 12 जून 2018 की सुबह सिल्वर स्प्रिंग कॉलोनी स्थित अपने निवास पर बेटी के कमरे में खुद को गोली मार ली थी। उनकी मौत के बाद उनकी पत्नी आयुषी व बेटी कुहू ने महाराज की मौत को साजिश बताते हुए उसी समय इसके लिए पलक और विनायक पर आरोप लगाए थे, लेकिन महाराज के कुछ प्रभावशाली भक्तों व ट्रस्ट के वजनदान लोगों ने महाराज की बदनामी होने का भय बताकर दोनों को चुप करवा दिया था। बाद में पुलिस को जांच के दौरान यह पता चला कि महाराज को गिरफ्तार आरोपियों द्वारा लंबे समय से ब्लैकमेल किया जा रहा था। आरोपियों की मोबाइल काल डिटेल्स, चैटिंग आदि की रिकॉर्डिंग से इसका खुलासा हुआ और तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

पूछताछ में जो सामने आया उसके अनुसार, 2015 में विनायक ने भय्यूजी महाराज से पैसे ऐंठने और ट्रस्ट पर कब्जा जमाने की साजिश शुरू कर दी। वह महाराज का सबसे विश्वासपात्र सेवादार था और इतना प्रभावी था कि महाराज की पत्नी आयुषी तक को उनसे मिलने के लिए रोक देता था। बिना विनायक की अनुमति के उनकी पत्नी आयुषी तक उनके कमरे में प्रवेश नहीं ले पाती थी। 2015 में पलक पुराणिक नामक युवती को मनमीत अरोरा नामक व्यक्ति ने विनायक व शरद से मिलवाया। विनायक ने उसे जरूरतमंद बताकर भय्यूजी महाराज से नौकरी पर रखने को कहा। पलक को महाराज की बीमार मां की केयरटेकर के रूप में नौकरी दी गई।

पहले तो महाराज उसे बेटी की तरह रखते, लेकिन बाद में पलक ने अपनी जवानी का ऐसा रंग बिखेरा कि दोनों के अंतरंग संबंध बन गए (पलक द्वारा बना लिए गए)। इनका इरादा था कि पलक महाराज को गेयर में लेकर उनसे शादी करेगी और फिर पूरे ट्रस्ट और महाराज की करोड़ों की संपत्ति उनके कब्जे में होगी और महाराज भी उनकी उंगलियों के इशारे पर नाचेंगे। दरअसल, महाराज पहली पत्नी माधवी की मौत के बाद अकेलापन महसूस करते थे। इसी पलों का फायदा उठाते हुए पलक उनके बेहद करीब पहुंचने में सफल हुई थी। पलक उनके बेडरूम में ही रहने लगी। महाराज की आलमारी में ही कपड़े रखती थी।

उसने महाराज का अश्लील वीडियो भी बना लिया था। वह दुनिया के सामने महाराज की बेटी बनकर रहती थी, लेकिन वाट्सएप पर महाराज से लगातार अश्लील चैटिंग किया करती थी और उस चैटिंग को सेव कर लेती थी। इसी दौरान 17 अप्रैल, 2017को महाराज ने आयुषी से शादी कर ली। इसके बाद पलक ने अपना रंग दिखाना शुरू किया। उसने महाराज को अल्टीमेटम दिया कि तुम्हारे पास शादी के लिए एक साल का समय है, अगर उसके बाद मुझसे शादी नहीं की तो वह वीडियो, चैटिंग आदि सार्वजनिक कर उन्हें कहीं का नहीं छोड़ेगी। इस दौरान पलक ने अपनी बहन की शादी के लिए 30-40 लाख रुपए ऐंठ लिए। वह जूलरी, मोबाइल तो कभी किसी नाम से लाखों रुपए ऐंठती रही। उसे हर महीने डेढ़ लाख रुपए बतौर मानधन दिया जाता था, जिसे उसने बढ़ाकर ढाई लाख रुपए कर दिया था। महाराज पलक की ब्लैकमेलिंग से परेशान हो गए थे।

भय्यूजी महाराज को कई तरह की बीमारी हो गई थी। उन्हें रातभर नींद भी नहीं आती थी, जिसकी दवाइयां चल रही थीं। सारी दवाएं सेवादार विनायक दुधाले उन्हें दिया करता था। पूछताछ में जांच में यह पता चला कि जिस विनायक पर वे सबसे अधिक भरोसा करते थे वही उन्हें नींद की गोली जेलफ्रेश का ओवर डोज हर रोज दे रहा था। नशीली दवा के प्रभाव में भय्यूजी महाराज दिनों-दिन कमजोर और बीमार होते जा रहे थे। वे उनींदी अवस्था में रहने लगे थे। बीमारी से त्रस्त होकर उन्होंने लेन-देन की पूरी जिम्मेदारी भी विनायक को सौंप दी थी। वही घर की तिजोरी की चाबी पलक ने हथिया ली थी।

भय्यूजी महाराज की मौत के बाद उनकी पत्नी आयुषी ने इसकी शिकायत पुलिस से की थी। जांच में पता चला कि विनायक और शरद महाराज को उनसे पारिवारिक सदस्यों से भी मिलने नहीं देते थे। उन्हें तनाव में रखने के लिए नशीली दवा खिला कर उन्हें एडिक्ट बनाया जा रहा था। पलक ने उन्हें शादी के लिए 16 जून 2018 तक का समय दिया हुआ था। जैसे-जैसे समय नजदीक आता जा रहा था महाराज तनाव में आते जा रहे थे। इधर, सेवादार विनायक और शरद भी पलक के नाम से उन्हें डरा रहे थे। पलक का मुंह बंद करने के लिए पैसे देने के नाम पर विनायक व शरद ने भी लाखों रुपये लेकर महाराज की तिजोरी से खाली किए।

इसी दौरान 10 जून को शनि महाराज उर्फ दाती महाराज के खिलाफ एक युवती ने बलात्कार का मामला दर्ज करवा दिया, जिसकी सुर्खियां मीडिया पल चल रही थीं। भय्यूजी महाराज पूरी रात दाती महाराज पर चल रही रिपोर्ट को देखते रहे। इसी दौरान विनायक उन्हें यह कहकर डराता रहा कि यदि उन्होंने भी पलक की बातें नहीं मानीं तो वह भी दाती महाराज की तरह आपको बदनाम कर कहीं का नहीं छोड़ेगी। पलक ने भी उन्हें धमकाया कि वह दाती महाराज की तरह उनका हाल करेगी। ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर अंतत: भय्यू महाराज ने 12 जून की सुबह खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।

दरअसल, महाराज के सुसाइड के पीछे सारे रहस्य दबे के दबे रह जाते अगर भय्यू महाराज की दूसरी पत्नी आयुषी के वकील, जो महाराज से 22 सालों से जुड़े हुए थे, उनसे महाराज के पूर्व ड्राइयवर ने 5 करोड़ रुपये की फिरौती न मांगी होती। पुलिस ने वकील को धमकाने के मामले में भय्यू महाराज के पुराने ड्राइयवर कैलाश पाटिल, सुमित चौधरी और अनुराग रोजिया के साथ गिरफ्तार किया था। पूछताछ में कैलाश पाटिल ने ही यह बताया था कि महाराज के खिलाफ षड्यंत्र रचने का मास्टरमाइंड उनका विश्वासपात्र सेवादार विनायक दुधाले है। चूंकि वह भय्यू जी महाराज का निजी ड्राइवर था इसलिए उसे महाराज के अनेक राज भी मालूम थे।

कैलाश ने पुलिस को कई रहस्य की बातें बताईं। कैलाश ने यह भी बताया कि महाराज का लंबे समय से वकील होने के नाते उसे लगा कि महाराज का करोड़ों रुपया वकील के पास होगा। इसीलिए उसने 5 करोड़ की मांग की थी। उसने पुलिस को यह भी बताया कि विनायक दुधाले महाराज के 12 करोड़ रुपये और घर की करोड़ों की जूलरी लेकर भागा है। मुंह बंद करने के लिए उसने उसे 2 करोड़ रुपए देने का वादा भी किया था। विनायक को उसने ही छोड़ा था, जिसके बदले उसने 25 लाख रुपये दिये थे। कैलाश के खुलासे के बाद पुलिस ने विनायक दुधाले, शरद देशमुख और पलक के मोबाइल के रिकाड्र्स खंगालना शुरू किया।

डिलीट किये गए मैसेजेस और वीडियो को रिकवर करने का प्रयास भी किया गया। वीडियो तो नहीं मिल पाये, लेकिन पलक व भय्यू महाराज के बीच हुई चैटिंग, पलक व विनायक के बीच हुई चैटिंग व काल रिकार्ड की ऑडियो क्लिपिंग रिकवर हो गई। आडियो रिकार्डिंग सुनने पर पता चला कि बात आयुषी के संबंध में हो रही है। कई बातें कोडवर्ड में हैं, जिसमें आयुषी को रास्ते से हटाने की बात कही जा रही थी। बातचीत से पता चलता है कि दोनों को आशंका है कि आयुषी ने महाराज को किसी तरह से सम्मोहित कर लिया है। आयुषी के सुरक्षा कवच को तोडऩे के लिए महाराज को गुना के किसी तांत्रिक के पास ले जाने की प्लानिंग कर रहे हैं, ताकि महाराज आयुषी से दूर हो जाएं। पलक व महाराज के बीच अश्लील चैटिंग की रिकार्ड भी पलक के मोबाइल रिकवरिंग से मिला।

पूछताछ में यह भी उजागर हुआ कि जब पलक से बचने के लिए भय्यूजी महाराज मोबाइल का नंबर बदलकर कमरे में छिप जाते थे, तो विनायक उसे फोन कर बता देता था। तब पलक धमक जाती थी। जून 2017 में भी जब महाराज आयुषी से शादी कर रहे थे, विनायक ने पलक को फोन कर बुला लिया था और पलक ने शादी समारोह में यह कहकर हंगामा किया था कि उन्होंने मुझसे शादी करने का वादा किया था। तब घर वालों ने उसे रुपये देकर शांत किया था और वहां से रवाना किया था। उसके बाद आयुषी और बेटी कुहू के कहने पर पलक को नौकरी से निकाल दिया गया था, लेकिन वह महाराज को ब्लैकमेल कर रही थी।

आयुषी ने तो पुलिस को बताया था कि विनायक व शरद ने महाराज को कब्जे में कर लिया था। 2- 3 दिन तक उसे उनसे मिलने नहीं दिया जाता था। पलक संबंधों के कारण महाराज पर शादी का दबाव बना रही थी और विनायक व शरद आयुषी को रास्ते से हटाने की तैयारी कर चुके थे। मलब आयुषी की हत्या की साजिश भी मास्टरमाइंड विनायक ने कर रखी थी, लेकिन इसी दौरान महाराज ने ही सुसाइड कर लिया। विनायक व पलक के बीच चैटिंग में दोनों योजना को लेकर बात करते थे। पलक ने मैसेज किया कि दादा वे लोग ठीक तो कर रहे हैं ना? कोई गड़बड़ तो नहीं होगी? विनायक का जवाब था, तुम चिंता मत करो, अपनी बात और डिसीजन सही है।

इनकी साजिश के संदर्भ में पुलिस को भय्यू महाराज की बहनों मधुमिता व अनुराधा ने भी बताया था, लेकिन पहले के जांच अधिकारी मनोज रत्नाकर ने बीमारी व पारिवारिक कारणों से आत्महत्या बताते हुए जांच पूरी कर ली और मामले को खत्म कर दिया था। उनके तबादले के बाद आयुषी ने मामले की गंभीरता से जांच की मांग की तब दूसरे सीएसपी को जांच सौंपी गई, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला। जब कैलाश पाटिल द्वारा महाराज के वकील बडज़ात्या से 5 करोड़ की मांग की गई तब उसकी गिरफ्तारी के बाद मास्टरमाइंड विनायक और पलक की पूरी पोल ही खुल गई।

यह भी पता चला कि लाखों रुपये की वसूली करने वाली पलक हरदा में रहने वाले अपने जीजा के लिए बिजनेस सेट करना चाहती थी और उसके लिए पैसों की मांग कर ही थी। वहीं सेवादार विनायक व शरद बैतूल में 100 करोड़ की जमीन को लेकर उन पर दबाव बना रहे थे। कुछ स्थानीय सेवादार और महाराष्ट्र से आए सेवादारों ने विनायक को ट्रस्ट की गद्दी पर बिठाने की तैयार ही कर ली थी, लेकिन परिवार से जुड़े पुरुष सदस्यों के विरोध के चलते उनके मंसूबे कामयाब नहीं हो पाए। पुलिस अब पलक को विनायक के जरिए भय्यू महाराज के घर तक पहुंचने वाले मनमीत अरोरा की भूमिका की भी जांच कर रही है।

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