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मां भवानी शिव मंदिर में नारियल पर मुरादें लिखकर चढ़ाते हैं भक्त

Posted on: 11 Feb 2019 15:31 by Umesh Sharma
मां भवानी शिव मंदिर में नारियल पर मुरादें लिखकर चढ़ाते हैं भक्त

हबीबगंज स्टेशन स्थित मां भवानी शिव मंदिर शहर के ख्यात मंदिरों में से एक है। इस मंदिर की मां भवानी की मूर्ति मंदिर के संस्थापक की मां को सपना देकर स्थापित हुई हैं। इस ख्याति प्राप्त मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी-अपनी मान्यताएं लेकर पहुंचते हैं, इतना ही स्टेशन परिसर में होने के कारण कई यात्री भी इस मंदिर में दर्शन करते हैं। इस मंदिर में श्रद्धालु नारियल पर अपनी मुरादें लिखकर चढ़ाते हैं और मातारानी भी अपने भक्तों की मुरादें पूरा करती हैं।

मंदिर के पुजारी पंडित गौरीशंकर शर्मा ने बताया कि मंदिर संस्थापक स्व. ईश्वर सिंह चौहान की मां के सपने में माता रानी आईं और बोली मुझे हबीबगंज के मंदिर में स्थापित करो। यह मंदिर हबीबगंज स्टेशन के प्रांगण में बना हुआ है। इस मंदिर के अंदर एक विशाल पीपल का वृक्ष भी है। इस वृक्ष की शाखाएं मंदिर के शिखर में से बाहर निकलकर मंदिर को शोभायमान बनाती हैं। बताया जाता है कि यह पीपल का वृक्ष लगभग 100 साल पुराना है। श्री शर्मा ने बताया कि इस स्थान पर पहले ईश्वर नगर नाम की एक झुग्गी बस्ती हुआ करती थी, उसमें कांग्रेस नेता ठाकुर ईश्वर सिंह चौहान का परिवार भी निवास करता था। उनके परिवार वालों व संगी साथियों ने मिलकर इस वृक्ष के नीचे वर्ष 1968 के करीब एक चबूतरा का निर्माण किया और इस पीपल वृक्ष के नीचे बस्ती के लोग माता की छोटी सी मूर्ति की स्थापना कर पूजा-अर्चना करने लगे। वर्ष 1994 के लगभग जब यहां से झुग्गी बस्ती का विस्थापन हुआ, तब उस समय इस मंदिर का विस्तार किया गया।

नरसिंहपुर से लेकर आए थे मूर्ति

श्री शर्मा के अनुसार स्व. चौहान की माताजी द्रोपदी बाई के सपने में माता रानी ने दर्शन देकर कहा था कि जहां मूर्ति देने जा रहे हो, वहां मैं मिट्टी में दबी हुई हूं, मुझे यहां से ले चलो। इस सपने की बात सुनकर जब श्री चौहान नरसिंहपुर के मूर्तिकार के पास गए, तो वहां उस मूर्तिकार को बताया कि यहां कोई दुर्गा जी की प्रतिमा मिट्टी में दबी हुई है, तो मूर्तिकार ने बताया कि वह तो रिजेक्ट मूर्ति है, कोई काम की नहीं है। आपको कैसे पता है कि मिट्टी में मूर्ति दबी हुई है, तब उन्होंने सारी कहानी सुनाई और वही मूर्ति लेकर भोपाल आ गए। इसके बाद विधि-विधान से यहां पर माता की मूर्ति की स्थापना की गई। मंदिर की स्थापना के समय यहां पर पंडित जगदीश शर्मा ज्योतिषाचार्य के सानिध्य में एक विशाल शतचंडी यज्ञ किया गया। इसके मुख्य यजमान पीसी शर्मा थे। इस मंदिर में वर्ष 1997 से अखंड ज्योति जल रही है। मां भवानी व ज्योति की जो भी भक्त दर्शन करते हैं उनके सारे बिगड़े काम बन जाते हैं।

मां भवानी भरती हैं सूनी गोद

मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित गौरीशंकर शर्मा के अनुसार इस मंदिर से जुड़ी कई अलग-अलग मान्यताएं हैं। कहा जाता है कि जिन माता-बहनों की गोद सूनी होती है वह श्रद्धाभाव से यहां उल्टे हाथ लगाती हैं, तो मान्यता अवश्य पूरी होती है। माता रानी के दरबार में मन्नत के लिए लोग नारियल में माता रानी के लिए अर्जी लिखकर लगाते हैं, इससे श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है। अश्वनी व चैत्र की नवरात्रि में विशेष अनुष्ठान और पूजा की जाती है।

शिवलिंग पर साक्षात आकर लिपट जाते हैं नाग देवता

इस मंदिर में शिवलिंग भी स्थापित है। इस शिवलिंग की विशेषता है कि यहां कई बार साक्षात नाग देवता प्रकट होते हैं और शिवलिंग से आकर लिपट जाते हैं। इस नजारे को देखने के लिए मंदिर में भक्तों का तांता लग जाता है। यहां आने वाले भक्त शिव से जो भी प्रार्थना करते वह पूरी भी होती हैं।

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