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जानिए एक दिन के भारत बंद के दौरान देश को कितना होता है नुकसान

Posted on: 10 Sep 2018 12:04 by Surbhi Bhawsar
जानिए एक दिन के भारत बंद के दौरान देश को कितना होता है नुकसान

पेट्रोल-डीजल की बढती कीमतों को लेकर आज विपक्षी दलों ने भारत बंद बुलाया है। कुछ लोगों के लिए बंद जश्न जैसा हो सकता है लेकिन इस जश्न से जो नुक्सान होता है उसकी भरपाई कहीं न कहीं उस एक दिन के जश्न की कीमत चुका कर दी जाती है. एक दिन के बंद का असर सीधे देश की अर्थव्यस्था पर पड़ता हैं।

आज भारतबंद को देखते हुए एक सवाल उठ रहा है कि रक दिन के बंद से देश की अर्थव्यवस्था पर क्या असर होता है और इस नंद का क्या नुक्सान हो सकता है?

क्या होता है प्रभावित?


एक दिन के बंद के दौरान प्रतिदिन फैक्ट्रियों में होने वाला उत्पादन, शेयर बाजार में शेयरों की खरीदारी और बिकवाली, रियल एस्टेट सेक्टर में प्रतिदिन रखी जा रही एक-एक ईंट, मॉल से लेकर छोटे किराना स्टोर की बिक्री, सरकारी से लेकर निजी क्षेत्र के दफ्तरों में कामकाज समेत टूरिज्म, बैंकिंग और ट्रांस्पोर्टेशन (रेल, हवाई सफर, सड़क इत्यादी) ऐसे अनेक क्षेत्र हैं जो बंद या हड़ताल से सीधे तौर प्रभावित होते हैं।

बंद का नुकसान
गौरतलब है कि सितंबर 2015 में देश के ट्रेड यूनियनों ने एक दिन के बंद का आह्वान किया था। इस एक दिन के बंद में देश की बैंकिंग व्यवस्था समेत ट्रांस्पोर्टशन और अन्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई थी। इस एक दिन के बंद के बाद चैंबर ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज (सीआईआई) ने आकलन किया कि देश की अर्थव्यवस्था को कुल 25 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।

एक बार फिर सितंबर 2016 में सेंट्रल ट्रेड यूनियन ने एक दिन के भारत बंद का आह्वान किया। इस एक दिन के दौरान देशभर में ट्रांस्पोर्ट, मैन्यूफैक्चरिंग और बैंकिंग सेवा बुरी तरह प्रभावित हुई और इंडस्ट्री चैंबर एसोचैम ने इस एक दिन के बंद से अर्थव्यवस्था को 18 हजार करोड़ रुपये के नुकसान पहुंचने का दावा किया।

जनवरी 2018 में दलित संगठनों ने एक दिन के महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया और बंद के दौरान जहां राज्य में कारोबार समेट ट्रांस्पोर्टेशन पूरी तरह ठप पड़ गया था, वहीं बंद में हिंसा के चलते राज्य की संपत्ति को बड़ा नुकसान पहुंचा था। इस बंद के बाद राज्य में रीटेल कारोबार ने 700 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा किया तो राज्य के होटल और रेस्तरां ने 100 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का दावा किया था।

जुलाई 2018 के दौरान देश में 8 दिनों तक ट्रक चालकों की हड़ताल रही. इन आठ दिनों के दौरान अर्थव्यवस्था को लगभग 50 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किया गया। इस हड़ताल के चलते 20 जुलाई से लेकर 28 जुलाई तक देशभर में लगभग 90 लाख ट्रक सड़कों पर खड़े हो गए और इसका सीधा असर सरकारी और निजी क्षेत्र के कामकाज के साथ-साथ देश में खाने-पीने की वस्तुओं से लेकर फैक्ट्रियों के उत्पाद पर पड़ा। लिहाजा, महज ट्रक की हड़ताल के चलते अर्थव्यवस्था को प्रतिदिन 6 से 7 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

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