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भय्यू महाराज के जीवन का अंतिम कार्यक्रम था हमसाज

Posted on: 12 Jun 2018 11:04 by Praveen Rathore
भय्यू महाराज के जीवन का अंतिम कार्यक्रम था हमसाज

इंदौर। भय्यू महाराज ने 11 से 13 अप्रैल तक इंदौर में एक सर्वधर्म समभाव कॉन्क्लेव हमसाज का आयोजन किया था, जिसमें सभी धर्म के धर्मगुरु और शहर की प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं थीं। बता दें कि हमसाज का मीडिया पार्टनर घमासान डॉटकॉम था।
भय्यू महाराज ने इंदौर में अपने जीवन के अंतिम कार्यक्रम में कहा था कि धर्म जीवन जीने की आचार संहिता है, जो प्रति कुलता से अनुकूलता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सामान्य स्वभाव से समझ है कि लोग अच्छा ही सुनना चाहते हैं। भय्यू महाराज ने कहा था, हर जीव का अपना धर्म है। जब हम महाभारत पढ़ते हैं तो हमें कुटिलता और षड्यंत्रों का पता होता है, इसके बाद भी भाइयो में झगड़े होते हैं। जब गुरुओं की संख्या शिष्यों से ज्यादा हो जाए तो सब उपदेश ही देंगे, अमल में कोई नहीं लाएगा। समझने वाले भी होना चाहिए। मनुष्य सत्य से भागता है, जो अनुभव से ख़ुद को सुधारते हैं, वही धर्म है।

हिन्दू राष्ट्र एक विचारधारा है। विचारों का प्रभाव सभी मानवों पर पड़ता है तो संसकृति कहते हैं। हम हिन्दू की बात करते हैं तो राष्ट्र की बात नहीं करते। अस्तिव को धारण कर मनुष्य मोक्ष तक ले जाता है। मनुष्य अपने दिनभर के कामों का आंकलन कर ले तो ख़ुद ही सुधार जाएगा।

ये लोग शामिल हुए थे हमसाज में
दो दिन के इस कान्क्लेव में आध्यात्मिक गुरु श्री भय्यूजी महाराज, वरिष्ठ पत्रकार राजेश राठौर, अहिंसा विश्व भारती के संथापक आचार्य लोकेश मुनिजी ,जमीयत उलेमा ए हिन्द के महासचिव मौलाना महमूद मदनी, अमृतसर साहिब से संत सबरत सिंह जी, असम के महामंडलेश्वर स्वामी केशवदासजी महाराज, महाराष्ट्र से इस्लामी विद्वान मौलाना गुलाम वस्तानवी, लोकमत के पत्रकार डॉ उदय निरगुणकर, मौलाना अबुल कलाम आजाद यूनिवर्सिटी जोधपुर के अध्यक्ष पद्मश्री प्रोफेसर अख्तरुल वासे, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से शिया स्कॉलर डॉ.सैयद अली मोहम्मद नक़वी, ईसाई धर्म गुरु मारन मारक बासेलियम,मुम्बई से बोहरा समाज के शहज़ादा डॉ अब्देली सैफुद्दीन,पीठाधीश्वर इंटरनेशनल सद्गुरु फाउंडेशन – तपोभूमी गोवा से धर्मभूषण ब्रह्मेशानंदाचार्य स्वामीजी, भोपाल से फादर जोस, मुरादाबाद से स्लामिक स्कॉलर डॉ सय्यद अब्दुल्लाह तारिक़, गुजरात हज कमेटी के सूफी संत एमके चिश्ती,फिल्मी कलाकार मकरंद देशपांडे, माउंटआबू से ब्रह्माकुमारी उर्मिला औरंगाबाद से इस्लामी विद्वान तैयबा मोइन फातिमा,,मैनेजमेंट गुरु एन. रघुरमन, वृंदावन से साध्वी प्रज्ञा भारतीजी, महर्षि महेश योगी यूनिवर्सिटी भोपाल से प्रो.निलिम्प त्रिपाठी, अजमेर दरगाह के खादिम सूफी सैयद सलमान चिश्ती, इस्कान से निमाई सुंदर दास जी,मौलाना अबुल कलाम आजाद कॉलेज औरंगाबाद के प्रोफेसर वाजिद अली खान, गया बिहार से भिक्खु प्रिया दीपजी,कवि सत्यनारायण सत्तन ,मुम्बई की कार्यकर्ता लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, बहाई समाज से समाजसेवी समीर शर्मा सहित कई हस्तियां शामिल हुईं थीं।

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