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200 पॉइंट रोस्टर के समर्थन में हीरालाल अलावा ने प्रकाश जावड़ेकर को पत्र भेजा

Posted on: 02 Feb 2019 12:55 by Surbhi Bhawsar
200 पॉइंट रोस्टर के समर्थन में हीरालाल अलावा ने प्रकाश जावड़ेकर को पत्र भेजा

मनावर विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर को पत्र भेजकर 13 पॉइंट के रोस्टर के खिलाफ अपनी आपत्ति जताई है। पत्र में उन्होंने कहा की इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2017 के फैसले कि यूनिवर्सिटी में टीचर्स रिक्रूटमेंट का आधार यूनिवर्सिटी या कॉलेज नहीं, डिपार्टमेंट होंगे, से देश के 72 करोड़ ओबीसी, 30 करोड़ एससी एवं एसटी आबादी का संवेधानिक हक़ समाप्त हो चूका है। आपकी सरकार ने हस्तक्षेप करना तो दूर की बात, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत काम करने वाली संस्था यूजीसी ने फौरन तमाम सेंट्रल यूनिवर्सिटी को आदेश जारी किया था कि वे इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला तत्काल लागू करें। यूजीसी के पास केंद्र सरकार से सलाह लेने से लेकर, फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का रास्ता था। लेकिन यूजीसी ने फैसला इतनी जल्दी में लागू किया जिससे लगा कि वह ऐसे किसी फैसले का इंतज़ार कर रही थी।

इस फैसले से पहले सेंट्रल यूनिवर्सिटी में शिक्षक पदों पर भर्तियां पूरी यूनिवर्सिटी या कॉलजों को इकाई मानकर होती थीं। इसके लिए संस्थान 200 प्वाइंट का रोस्टर सिस्टम मानते थे। इसमें एक से 200 तक पदों पर रिज़र्वेशन कैसे और किन पदों पर होगा, इसका क्रमवार ब्यौरा होता है। इस सिस्टम में पूरे संस्थान को यूनिट मानकर रिज़र्वेशन लागू किया जाता है, जिसमें 49.5 परसेंट पद रिज़र्व और 59.5% पद अनरिज़र्व होते थे (अब उसमें 10% सवर्ण आरक्षण अलग से लागू होगा)। लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया है कि रिज़र्वेशन डिपार्टमेंट के आधार पर दिया जाएगा।

इसके लिए 13 प्वाइंट का रोस्टर बनाया गया. इसके तहत पहले से तीसरे पद सामान्य वर्ग को, चौथा पद ओबीसी को, सातवां पद एससी को, आठवां पद ओबीसी को दिया जाएगा। 14वां पद अगर डिपार्टमेंट आता है, तभी वह एसटी को मिलेगा। इनके अलावा सभी पद अनरिज़र्व घोषित कर दिए गए। अगर 13 प्वाइंट के रोस्टर के तहत रिज़र्वेशन को ईमानदारी से लागू कर भी दिया जाए तो भी वास्तविक रिज़र्वेशन 30 परसेंट के आसपास ही रह जाएगा, जबकि अभी केंद्र सरकार की नौकरियों में एससी-एसटी-ओबीसी के लिए 49.5% रिज़र्वेशन का प्रावधान है।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले और उसके बाद यूजीसी के आनन-फानन में लाए गए नोटिफिकेशन के बाद जब यूनिवर्सिटी और संस्थाओं ने नौकरी के विज्ञापन निकाले तो सबको नज़र आने लगा कि नई व्यवस्था में रिज़र्वेशन दरअसल खत्म हो जाएगा। इसका जब संसद के अंदर और बाहर विरोध हुआ तो आपकी सरकार ने कहा कि वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पेटिशन (एसएलपी) के ज़रिए चुनौती देगी। इसके बाद यूजीसी ने तमाम सेंट्रल यूनिवर्सिटीज को रिक्रूटमेंट रोकने को कहा। अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की एसएलपी को खारिज कर दिया है। इससे इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला लागू होने का रास्ता साफ हो गया है।

ये एक राष्ट्रिय स्तर का मुद्दा है जिससे 100 करोड़ बहुजन आबादी ( एससी, एसटी एवं ओबीसी) प्रभावित हो रही है।

कृपया तत्काल अध्यादेश या सत्र के दौरान कानून लाकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए तुरंत फेसला लेवे. अगर आपकी सरकार संविधान की भावना के मुताबिक काम कर रही है तो आपकी सरकार के पास कानून बनाने या अध्यादेश लाने का विकल्प है। अगर सरकार इस मुद्दे पर कानून या अध्यादेश का विकल्प नहीं चुनती है तो हम सभी एससी एसटी एवं ओबीसी के लोग यही मानेंगे कि आपकी सरकार संविधान के तहत लागू हुए आरक्षण के प्रति ईमानदार नहीं है। एवं हम सभी एससी एसटी एवं ओबीसी के 100 करोड़ लोग आपकी सरकार के खिलाफ मतदान करेंगे।
यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में SC, ST, OBC रिजर्वेशन खत्म होने और 13 प्वायंट रोस्टर लागू होने के बाद नौकरियों का पहला विज्ञापन आ गया है।

केंद्र सरकार के अधीन चलने वाली राजस्थान सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने 33 शिक्षकों का विज्ञापन अभी-अभी निकाला है। इसमें एससी-एसटी-ओबीसी के लिए एक भी पद नहीं है। कृपया इस विज्ञापन का अवलोकन करे एवं एससी एसटी एवं ओबीसी के 100 करोड़ लोगो की भावनाओ को ध्यान में रखते हुए इस विज्ञापन को तत्काल निरस्त करते हुए संसद में अध्यादेश लाकर विश्वविद्यालयो में पुराने सिस्टम से भर्ती के आदेश जारी करने का कष्ट करें।

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