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जन्म के पहले, बन गई सिंगर- पढ़िए सपना केकरे की अनोखी कहानी

Posted on: 23 May 2018 11:44 by hemlata lovanshi
जन्म के पहले, बन गई सिंगर- पढ़िए सपना केकरे की अनोखी कहानी

इंदौर: दुनिया में आने के बाद ही सभी का भाग्य तय होता है, लेकिन मेरा भाग्य मेरी मां सुषमा भाटे ने मेरे जन्म के पहले ही तय कर दिया था। जी हां, असल में हुआ यूं कि मेरी मां चाहती थी कि बेटी का जन्म हो और वो सिंगर ही बने। मां की इस तमन्ना को भगवान ने पूरा किया और मेरा जन्म हुआ।

अरे? आप चौकिए मत, यह कोई कल्पना या कहानी नहीं हकिकत है, जिसे घमासान डॉटकॉम बता रहा है। तो आईए आपको बताते हैं, जी टीवी के संगीत कार्यक्रम अंताक्षरी और सारेगामा के क्वार्टर फाइनल तक जगह बना चुकी  इंदौर शहर की बेटी  सिंगर सपना केकरे के बारे में।  शास्त्रीय, उपशास्त्रीय, गजल, गीत, चित्रपट गीत, भक्ति-संगीत और मराठी नाट्य संगीत के क्षेत्र चमकता नाम है।

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मुश्किल है, नामुमकिन नहीं
रेडियो, टीवी और प्रतिष्ठित संगीत समारोह में प्रस्तुति दे चुकी सपना जी ने, मां की ख्वाहिश को पूरा किया बल्कि अपनी लगन और मेहनत से एक मुकम्मल मुकाम भी ​हासिल किया। सपना जी ने बताया कि गुरू से संगीत की विधिवत शिक्षा सात साल की उम्र से ली। पंडित माधव जोशी, नीलिमा छापेकर और पंडित स्वतंत्र कुमार ओझा जैसे गुरुजनों से गायन सीखा ।  संगीत की राह इतनी आसान  भी नहीं थी। बेटे अर्णव के जन्म के बाद चार साल तक संगीत से दूरी हो गई। धीरे-धीरे फिर से रियाज शुरू किया। अब तो बेटा भी मुझे सपोर्ट करता है। मुझे ऐसा लगता है कि यदि अपना लक्ष्य तय हो तो उसे पाना मुश्किल हो सकता है लेकिन नामुमकिन नहीं।

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बैठने की जगह नहीं मिली घरवालों को
अर्णव के जन्म के पांच साल बाद पहला संगीत कार्यक्रम यादगार रहा। 2011 में मदन मोहन साहब पर आ​धारित संगीत कार्यक्रम हुआ। इतने सालों बाद स्टेज पर आना मेरे लिए नया अनुभव ही था। खैर संगीत की दूसरी  पारी  शानदार रही। ये मेरी आवाज का जादू नहीं मदन मोहन साहब के गीतों का  जादू ही था कि कार्यक्रम में श्रोताओं की इतनी भीड़ थी। हॉल के बाहर खड़े होकर दर्शकों ने संगीत सुना। कार्यक्रम में फैमिली मेंबर्स को ही बैठने की जगह नहीं मिली। 8 सालों से सतत मदन मोहन साहब पर आधारित संगीत कार्यक्रम में प्रस्तुति दे रही हूं, क्योंकि यहीं से मेरी शानदार शुरूआत हुई।

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चुनौतियां तो हैं
संगीत कार्यक्रमों के लिए स्पॉन्सरशिप नहीं मिलती । मुश्किल होती है,लेकिन फिर भी शहर के संगीत र​सिकों को हम निरंतर मधुर संगीत कार्यक्रमों की शौगात दे रहे हैं। संगीत कार्यक्रमों में अब शहर के सिंगर्स को छोड़कर बाहर से सिंगर्स बुलाते हैं। मुझे लगता है कि शहर में कई अच्छे सिंगर है, उन्हें मौका मिलना चाहिए।

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