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” जैसे हो तुम वैसे ही रहना “

Posted on: 29 Apr 2019 11:14 by Pawan Yadav
” जैसे हो तुम वैसे ही रहना “

प्रसिद्ध लेखिका पद्मा राजेंद्र की कलम से

बेटे आज वो दिन है जब तुमने जन्म लिया था और तुम्हारा जन्म भी भय्या की फरमाइश पर हुवा था…शायद इसीलिये तुममें याराना कुछ ज्यादा है…| इस बर्थडे पर हम साथ नहीं है,पर बर्थडे के पहले तुम्हारा आना दो-तीन दिन हमारे साथ रहना छुटकू से मिलकर जाना हम साथ नहीं पर पास है इस बात का धोतक है …|

विचारों में धुन व होठों पर नग़मे, आंखों में सपने व इरादों में दृढ़ता…अपने काम में मशरूफ़ आज से कोई शिकायत नहीं और कल के प्रति भरोसे का भाव प्रबल,जीवन को देखने,समझने की बेहतरीन नजर व नजरिया…तुम्हें औरों से अलग करता है..अभिव्यक्ति के साथ-साथ संवेदनाओं से भी भरपूर अपने संगी-साथियों के लिये हमेशा मन में यह भाव कि यह कमाने घर से निकले है….|

कई बार मुझे लगता है यह मेरा बेटा है या ‘माँ’ मां कि तरह ध्यान रखना और वैसे ही समझना भी ‘मां, बेटा’ तू अब बड़ी हो गई है बात-बात पर आंसू मत बहाया कर,कह कर हमेशा मुझे गले लगा कर समझाने वाला प्यारा बेटा… शायद ही कोई ऐसा बेटा होगा जो अपनी माँ को ‘ बेटा ‘कहता होगा..मेरे लिये दुनिया का वो शख्स जिसे मेरे आसुओं की सबसे ज्यादा फिक्र है, जो मेरी उदासी इतनी दूर से भी समझ जाता है,और जब कभी मैं परेशान होती हूं पता नहीं कैसे अचानक उसका फोन आ जाता है.., संवेदनाओं के साथ-साथ विचारों व भावनाओं को व्यक्त करने में न कभी कोताही बरती न कंजूसी…’मां लव यू’ कह मां के मन में शीतलता भर हमेशा अपनी संवेदनशीलता से उसे दूर होकर भी पास का अहसास करवाया है ….|

थोड़ी देर मुझ से लिपट कर सोना,थोड़ी देर पापा से तो थोड़ी देर भय्या से भी गलबहियां लेना कितना बेलेंस बना कर ,सबसे प्यार जता कर और सब को भरपूर प्यार दे कर तुम तृप्त करने की कोशिश करते हो पर माँ की ममता का क्या वो तो हमेशा यह सोचती है कि वहां तुम कितने अकेले हो…| बनावटीपन से कोसो दूर सहज-सरल जब मैं कहती मेरे को तेरी याद आ रही है तुझे आती है ..? तो स्पष्ट (पर सपाट नहीं ) जवाब देता ‘मां बेटा,टाइम ही कहां मिलता है याद करने को ,दिन -रात काम व ज्यादा समय तो ट्रेवलिंग व शो …और थोड़े दिनों में तो आ ही जाता हूं ….|
तुम्हारी मेहनत लगन व जुनून ही तुम्हें आज इस मुकाम पर लाया है व बहुत आगे भी ले जाएगा…तुम्हें वो सब मिले जो तुम डिजर्व करते हो ..तुम्हारे सारे सपने पूरे हो…अभी बहुत कुछ पाना है मंजिल बस थोड़ी ही दूर है,कर्म बस अच्छे व सच्चे मन से करते रहना…भावनाएं उमड़-घुमड़ रही है बहुत कुछ लिखना चाहती हूं पर ज्यादा लम्बा लिखा तो तुम नहीं पढ़ोगे यह भी जानती हूं…

तुम्हें बहुत प्यार,आशीष,स्नेह,
दुलार..अपना ख्याल रखना हमेशा व जैसे हो वैसे ही बने रहना हमेशा मेरे लिये….

जन्मदिन की, हर दिन की,हर उपलब्धि की बहुत सारी बधाई….

दिल की कलम से…✍

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