रहिए बेखबर, रावण रेल पटरी पर भी जलेगा!

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जांच होगी, दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी, मृतकों के परिजन को इतने लाख रुपये मुआवजा देंगे जैसे मरहम तुरंत लगाने या कहें पोतने की कोशिश सरकार करती है। पर क्या ऐसा करने से उस मां का लाल आप लौटा पाएंगे, उस बहन का भाई या भाई की बहन लौट आएगी जो खुशी-खुशी दशहरा पर रावण दहन के लिए कुछ देर पहले घर से रवाना हुई थी।

नहीं कभी नहीं। तो फिर यह जांच-वांच सब कोरा दिखावा ही माना जाए? देश में इतने रेल हादसे अमृतसर में कल हुए बेहद दर्दनाक हादसे के पहले हुए। हजारों लोग ने अपनी जान गंवाई। लंबी-चौड़ी जांचें हुईं। हजारों पेजों में उनकी रिपोर्ट आईं। ज्यादातर मामले में दो-चार छोटे कर्मचारी और अधिकारी निलंबित हुए। कुछ समय बाद बहाल भी हो गये। किसी सरकार, मंत्री या नेता ने कभी चिंता पाली उन परिवार की खुशी बहाली की जिन्होंने ऐसे हादसों में अपनों को खो दिया था।

अमृतसर हादसा सरकारों की, जिम्मेदारों की लापरवाही का बहुत ही बड़ा नमूना पेश कर रहा है। रेलवे पटरी के इतने पास आखिर रावण दहन की अनुमति क्यों और कैसे दी गई? अगर अनुमति नहीं दी गई थी तो यह आयोजन कैसे होने दिया गया? बरसों मैंने रेलवे की रिपोर्टिंग की है। मेरा सामान्य ज्ञान कहता है कि जब – जब रेलवे क्रासिंग या पटरी के पास के क्षेत्र में कोई बड़ा धार्मिक, सामाजिक या सांस्कृतिक आयोजन होता है तो वहां विशेष इंतजाम किए जाते हैं। उस दिन या समय पर ट्रेनों के लिए उक्त रेलवे क्रासिंग या क्षेत्र से बेहद धीमी गति से गुजरने के काॅशन आर्डर रहते हैं। इस रफ्तार से ट्रेन दौड़ाने की अनुमति कतई नहीं दी जाती जिस रफ्तार से मौत की ट्रेन अमृतसर के जौड़ा फाटक के पास पटरी पर दशहरा की शाम दौड़ी। अब अगर रेलवे की ओर से यह बयान आए कि हमें इस आयोजन की खबर ही नहीं थी तो आश्चर्य मत कीजिएगा। सब जिम्मेदार इस तरह बेखबर सोते रहे तो मौत की ट्रेन इसी तरह दौड़ती रहेगी। कोई बड़ी बात नहीं रेलवे ट्रेक पर ही कोई रावण किसी दशहरा पर जलता भी नजर आए, पास में तो जल ही रहा है।

मुकेश तिवारी
( [email protected])

( लेखक वरिष्ठ पत्रकार और घमासान डाॅट काॅम के संपादक हैं।)

 

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