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बसंत पंचमी: मां सरस्वती के साथ क्यों होती है कामदेव की पूजा?

Posted on: 09 Feb 2019 18:49 by Surbhi Bhawsar
बसंत पंचमी: मां सरस्वती के साथ क्यों होती है कामदेव की पूजा?

बसंत पंचमी के त्यौहार के साथ वसंत ऋतु का आगमन होता है। हिंदू धर्म में यह त्यौहार बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। विद्यार्थियों के साथ आम लोग भी विद्या, बुद्धि और ज्ञान के लिए मां सरस्वती की अराधना करते है। लेकिन क्या आप जानते है कि इस दिन मां सरस्वती के साथ कामदेव और भगवान् विष्णु की भी पूजा की जाती है।

क्यों होती है कामदेव की पूजा?

बसंत पंचमी का त्यौहार वसंत ऋतु के आगमन की ख़ुशी में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कामदेव वसंत के बहुत घनिष्ठ मित्र थे और यही कारण है कि बसंत पंचमी के दिन कामदेव की पूजा की जाती है। कामदेव प्रेम के देवता भी माने जाते है, वही वसंत ऋतु को भी प्यार और ख़ुशी का मौसम माना जाता है। इस दिन कामदेव के साथ उनकी पत्नी रति की भी पूजा की जाती है और इसलिए बसंत पंचमी को रतिकाम महोत्सव भी कहा जाता है।

ऐसे करें भगवान् विष्णु की पूजा

बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती के साथ कामदेव और भगवान् विष्णु की पूजा की जाती है। भगवान् विष्णु की पूजा करने के लिए इस दिन सुबह जल्दी उठकर पूरे शारीर पर तेल की मालिश करें और फिर नाहा लें। इसके बाद पीले वस्त्र धारण करें और भगवान् विष्णु की मूर्ति का अच्छी तरह से श्रृंगार करें। भगवान् विष्णु को पीले रंग के वस्त्र पहनाकर फलों का भोग लगाएं। इसके बाद पंडित के बताए अनुसार विधि-विधान से पूजा करें।

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