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बहुमत तो पराजय और जमानत जब्ती का है कुमारान्ना जी अंदाज़ अपना✒सुरेन्द्र बंसल जी की टिपण्णी

Posted on: 22 May 2018 05:53 by Munmun Verma
बहुमत तो पराजय और जमानत जब्ती का है कुमारान्ना जी अंदाज़ अपना✒सुरेन्द्र बंसल जी की टिपण्णी

हाँ वही हरदनल्ली देवगौड़ा कुमारस्वामी जो कर्नाटक के हमसफर मुख्यमंत्री होने जा रहे हैं उनका ही उपनाम कुमारान्ना है। साठ के अंदर के हैं दो पत्नियां हैं,एक फ़िल्म एक्ट्रेस है खुद रचनात्मक हैं फिल्में बनाते ,बेचते हैं। पांच साल के लिए हमसफर एक्सप्रेस का ट्रैक तय करने दिल्ली पहुंचे है। इसलिए भी कि गुलामनबी ने लतिया दिया था, इस हमसफर का ड्राइवर बनना है तो  तुरतफुरत हाँ या ना बोलिये। बकौल कुमारान्ना जी वे दौड़े दौड़े गए अपने पिता पूर्व प्रधानमंत्री देवगौड़ा जी के पास जिन्हें इस बात का मलाल था कि 2006 में समाजवादी होकर भी बीजेपी से समझौता कर मुख्यमंत्री बन गए थे। पिताश्री को मना लिया इस बात पर कि यह पुरानी गलती पर पारम्परिक समाजवाद का कवर है और इसी बूते उन्होंने गुलामनबी को जता दिया मंजूर है मंजूर है। लिहाजा अब यह तय किया जा रहा है इस हमसफर एक्सप्रेस का सेकंड ड्राइवर कौन होगा एक या दो, साथ में डिब्बे किसके कितने लगेंगें।

कुमारान्ना जी मैं आपको बधाई देना चाहता हूँ आपके पदारोहण समतोह के लिए, पर मैं आंकड़ों का जरा समझ नहीं पा रहा हूँ। आखिर कितना बड़ा इंद्रजाल है यह, देखिएगा आपने जेडीएस के नाम पर 222 में से 218 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा। उसमें से 37 आप जीत गए याने करीब 17 फीसदी जीत हुई। आपके 180 उम्मीदवार हार गए। मतलब यह कुमारान्ना जी कि आपके लगभग 83 फीसदी उम्मीदवारों को पराजय देखना पड़ी। यह भी ठीक है कुमारान्ना जी जरा आगे देखो । आपके 218 में से 80 से अधिक उम्मीदवारों की जमानत लोकतंत्र ने जब्त की है। मतलब लगभग 40 फीसदी उम्मीदवार अपनी जमानत नहीं बचा पाए ।

कुमारान्ना जी मैं आपको बधाई दे दूं लेकिन थोड़ा आप समझो यार या थोड़ा मुझे समझा दो यार! ये अपने 40 फीसदी उम्मीदवार जमानत नहीं बचा पाए तो बताओ यार लोकतंत्र कैसे बच गया? और समाजवाद की पुनर्स्थापना कैसे हो गयी? मतलब कुमारान्ना जी बहुमत तो पराजय और जमानत जब्ती का है । देखो कांग्रेस की मजबूरी मैं समझता हूं, वह एक राष्ट्रीय राजनैतिक दल है, पुरखों के ज़माने की ,उसे अपनी जान बचाना है यार। देश भर से उन्हें मुक्त करने का अभियान मोदी और शाह चलाये हुए हैं ,समझो कर्नाटक भी जाता तो क्या होता। आपने दया की अच्छा किया लेकिन माननीय देवगौड़ा साब का ख्याल रखने का आपने बताया है वह अपने को जंचा नहीं। कौनसा समाजवाद बच गया…. सेकुलरिज्म कैसे इस दया की भीख से बच गया….बताओ यार यहां मप्र से बधाई भेज रहा हूँ…।लोकतंत्र तो भाई सही मायने में बचा ही नहीं ,आखिर बहुत कम हैं न संख्या में फिर बताओ कैसे बच गया। हाँ, कांग्रेस सरकार बनाती तो शायद मैं यह नहीं पूछता। क्यों? इसलिए कि वह दूसरी बड़ी पार्टी है, लेकिन वह घबरा गई यार इसलिए कि उनके सिद्दारमैया साब को हरदम कोसते रहे हो और सीबीआई भी उनके पीछे आप ही लगवा रहे थे , बेचारे घबरा गए उनको आप पर विश्वास नहीं था कब आप टंगी मार दो इसलिए उन्होंने आपको इज़्ज़तदार बना दिया ताकि आप टंगी मारने का खेल नहीं कर सको । अब आप उनको उन सबको बचकर चलोगे पूरे पांच साल नहीं तो आप खुद उनकी टंगी से गिर पड़ोगे। कुमारान्ना जी आ रही है न बात समझ में। यही होना है । पर मेरा आपके चक्षुओं को जागृत करने का कोई प्रभाव नही पड़ेगा आप मुख्यमंत्री तो हो ही गये हैं शपथ से भी हो जाओगे।
बस इतना है मैं आपको दिल से बधाई देना चाहता हूँ , मेरी अंतर उपजी अक्ल को कुछ ताकत दो यार , बताओ पराजय का माह भाव के बाद भी लोकतंत्र कैसे बच गया,ताकि जल्दी से जल्दी आत्मतृप्ति के लिए आपको बधाई और शुभकामना प्रेषित कर सकूं।
सुरेंद्र बंसल

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