प्रति, दिनांक 27 नवम्बर 2022
श्री इक़बाल सिंह जी बैस
मुख्य सचिव
मध्यप्रदेश शासन
भोपाल.

विषय- मध्यप्रदेश की विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्द्ध घुमक्कड़ जनजातियों की प्रमुख मांगें प्राथमिकता से माने जाने बावत

मुख्य सचिव महोदय,

देश को आज़ादी दिलाने के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले विमुक्त क्रांतिवीर और देश की संस्कृति, कला और विशिष्ट ज्ञान की रक्षा करने वाले घुमन्तु समुदाय की आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक स्थिति बद से बदतर है। यह समुदाय अनूसूचित जाति और जनजाति से भी बुरी स्थिति में जीवन यापन कर रहा है। 90 प्रतिशत से अधिक लोगों के समक्ष पहचान का संकट है, क्योंकि उनके पास मतदाता पत्र, आधार कार्ड, राशन कार्ड जैसे दस्तावेज ही नहीं हैं। ऐसे समुदाय के उत्थान के लिए आपने महापंचायत में अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं लेकिन फिर भी बहुत सी अत्यंत आवश्यक और महत्वपूर्ण बातें छूंट गई हैं जिन्हें पूरा किए बिना इन्हें किसी प्रकार की कोई शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाएगा।

मध्यप्रदेश की विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्द्ध घुमक्कड़ जनजातियों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:-

1. मध्यप्रदेश में विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्द्ध घुमक्कड़ जनजातियों की वर्तमान संख्या 51 है , जिसमें विमुक्त जनजाति 21 और घुमक्कड़ जनजाति 30 हैं। केंद्र सरकार के भिकू रामजी इदाते आयोग की रिपोर्ट एवं भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव श्री आर सुब्रमण्यम के पत्र दिनांक 18 अगस्त 2020 के पत्र में दिए गए निर्देशों के मुताबिक इन जनजातियों की संख्या बढ़ाकर 84 की जाना चाहिए, जिसमें विमुक्त जनजाति 26 और घुमक्कड़ की 58 हो जायेगी। इसके पश्चात ही सर्वे होकर कोई योजना बनाई जा सकती है।

2. मध्यप्रदेश में विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्द्ध घुमक्कड़ जनजातियों का कोई डाटा नहीं है। इस हेतु इन जनजातियों की वास्तविक जनसंख्या और स्थान के साथ सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक, आर्थिक स्तर आदि के संबंध में घर-घर सर्वे किया जाना अत्यंत आवश्यक है।
3. प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवासों की उपलब्धता हेतु ग्रामीण विकास विभाग में विमुक्त, घुमक्कड़ जनजाति सेल बनाकर इन जनजातियों की घनी बसाहट का पता लगाकर उनके लिए आवास उपलब्ध कराए जाएं।
4. बैगा, भारिया और सहरिया जनजातियों हेतु प्रदेश में जिस प्रकार विशेष भर्ती अभियान चलाया गया था, उसी प्रकार विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्द्धघुमक्कड़ जनजाति के लिए भी विशेष भर्ती अभियान चलाया जाए।
5. विमुक्त घुमक्कड़ एवं अर्द्धघुमक्कड़ जनजातियों की कला, विशिष्ट ज्ञान एवं संस्कृति को संरक्षित करने हेतु एक संग्रहालय के साथ विश्वविद्यालय 200 एकड़ भूमि पर खोला जाए।
6. महाराष्ट्र में विभागीय बजट 1200 करोड़ रुपए है। इसी तर्ज पर मध्यप्रदेश में बजट फिलहाल बढ़ाकर 200 करोड़ रुपए किया जाए।
7. राजगढ़ के कड़िया सांसी गांव में सांसी समाज के निर्दोष और निरपराध लोगों पर पुलिस द्वारा निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच तुरंत करवाई जाकर दोषी पुलिसकर्मियों पर आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं।
8. कुचबंदिया समाज के लोगों को उनके शराब बनाने के पैतृक व्यवसाय (हैरिटेज वाइन) में 10 लीटर तक निर्माण, भंडारण और विक्रय की अनुमति दी जाए। कृपया उपरोक्त मांगें पूरी करके इस समुदाय का उत्थान करने का कष्ट करें।

उपरोक्त विषय में मेरे द्वारा माननीय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जी को भी पत्र भेजा गया है एवं इंदौर में उन्हें मुलाकात करके उपरोक्त समस्याओ से अवगत कराया था । इस समुदाय से साथ कदम कदम पर अन्याय हुआ है, मेरी संस्था इस समुदाय को लेकर वर्षो से चिंतित है, मेरा आपसे आग्रह है की उपरोक्त मांगो को प्राथमिकता से माना जावे एवं जल्दी से निराकरण किया जावे ।

अग्रिम धन्यवाद।
शुभकामनाओ सहित.

नीरज कुमार राठौर

संभागीय अध्यक्ष , इंदौर संभाग

संयुक्त पिछड़ा वर्ग संघर्ष मोर्चा