अयोध्या: जिलानी के बयान से वक्फ बोर्ड का किनारा, कहा- नहीं देंगे फैसले को चुनौती

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लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में विववादित श्री रामजन्मभूमि विवाद पर अपना फैसला सुना दिया है। जिसके तहत विवादित जमीन को रामलला को सौंपी गई है और मुस्लिमों को मस्जिद बनाने के लिए दूसरे स्थान पर पांच एकड़ जमीन सौंपी जाएगी। हालांकि कोर्ट ने फैसले के बाद सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील ने इस पर असहमति जताई थी और फैसले को चुनौती देने की बात कही थी। लेकिन वक्फ बोर्ड ने जिलानी के इस बयान से किनारा कर लिया है और कहा है कि वह इस फैसले को चुनौती नहीं देगा।

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष जफर फारूकी ने ‘भाषा‘ से कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। उन्होंने साफ किया कि बोर्ड का इस निर्णय को को चुनौती देने का कोई इरादा नहीं है। यदि कोई व्यक्ति या वकीय शीर्ष अदालत के फैसले को चुनौती देने की बात कहता है तो उसे सही न माना जाए।

गौरतलब है कि अदालत के फैसले के बाद सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने दिल्ली में हुई एक प्रेस काॅन्फ्रेंस के दौरान कहा था कि अयोध्या मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए फैसले को चुनौती दी जाएगी। हालांकि, जिलानी ने बाद में साफ किया था कि उन्होने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की प्रेस काॅन्फ्रेंस में ये बाद बात बोर्ड के सचिव के तौर पर कही थी न कि वक्फ बोर्ड के वकील के तौर पर।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला

दशकों से लंबित पड़े श्रीराम जन्मभूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने राम जन्मभूमि के पक्ष में फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में मुस्लिम पक्ष को दूसरी जगह 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया गया है, वहीं सरकार को ट्रस्ट बनाकर मंदिर बनाने का आदेश दिया गया है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला इलाहबाद हाईकोर्ट द्वारा 2010 में दिए गए फैसले के खिलाफ दायर की गई याचिकाओं पर सुनाया है।

कोर्ट ने अपने फैसले में विवादित जमीन पर रामलला का हक बताया है और वहां पर श्री राम मंदिर निर्माण की बात कही है। हालांकि कोर्ट ने येभी कहा है कि मुस्लिमों को दूसरे स्थान पर मस्जिद बनाने के लिए जमीन दिए जाने की बात भी कही है।वहीँ इस पूरे मामले में कोर्ट ने एएसआई की रिपोर्ट को आधार बनाया गया। बता दे कि भारतीय पुरातत्विक सर्वेक्षण यानी आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) ने 15 साल पहले इलाहबाद हाई कोर्ट के आदेश पर विवादित जमीन पर खुदाई की थी। जाह्न पर मंदिर के प्रमाण मिले थे।

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