अयोध्या : क्या हैं ASI के सबूत, जो बने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का आधार

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नई दिल्ली। दशकों से लंबित पड़े श्रीराम जन्मभूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने राम जन्मभूमि के पक्ष में फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में मुस्लिम पक्ष को दूसरी जगह 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया गया है, वहीं सरकार को ट्रस्ट बनाकर मंदिर बनाने का आदेश दिया गया है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला इलाहबाद हाईकोर्ट द्वारा 2010 में दिए गए फैसले के खिलाफ दायर की गई याचिकाओं पर सुनाया है।

कोर्ट ने अपने फैसले में विवादित जमीन पर रामलला का हक बताया है और वहां पर श्री राम मंदिर निर्माण की बात कही है। हालांकि कोर्ट ने येभी कहा है कि मुस्लिमों को दूसरे स्थान पर मस्जिद बनाने के लिए जमीन दिए जाने की बात भी कही है।वहीँ इस पूरे मामले में कोर्ट ने एएसआई की रिपोर्ट को आधार बनाया गया। बता दे कि भारतीय पुरातत्विक सर्वेक्षण यानी आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) ने 15 साल पहले इलाहबाद हाई कोर्ट के आदेश पर विवादित जमीन पर खुदाई की थी। जाह्न पर मंदिर के प्रमाण मिले थे।

क्या थी ASI रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई की रिपोर्ट के आधार पर कहा कि खुदाई के सबूतों की अनदेखी नहीं कर सकते हैं। बाबरी मस्जिद खाली जगह पर नहीं बनी थी। साथ ही खुदाई में मिली कलाकृति से मस्जिद से जुड़ी नहीं है। इसके अलावा एएसआई ने 12वीं सदी का मंदिर बताया एएसआई ने अपनी रिपोर्ट में मंदिर की बात कही।

सीजेआई ने से भी कहा कि विवादित ढांचे में पुराने पत्थर और खंभे का इस्तेमाल हुआ। हालांकि एएसआई ये नहीं बता पाया कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनीं हिंदू अयोध्या को रामजन्म मानते हैं। अयोध्या मामलारू आस्था और विश्वास पर कोई विवाद नहीं हो सकता। अयोध्या में राम के जन्म के दावे का किसी ने विरोध नहीं किया, हिंदू विवादित जगह पर हिंदू पूजा करते रहे। चबूतरा, भंडारा, सीता रसोई से भी राम जन्म दावे की पुष्टि होती है, हिंदू परिक्रमा भी किया करते थे।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि गवाहों के क्राॅस से एग्जामिनेशन से हिंदू दावा गलत साबित नहीं और 1856 से 57 तक विवादित जगह पर नमाज पढ़ने के कोई सबूत नहीं है। मुस्लिम के पास जमीन पर विशेष कब्जा नहीं है। उन्होने कहा कि 1856 से पहले अंदरूनी हिस्से में हिंदू भी पूजा करते थे, लेकिन रोकने के बाद बाहर हिंदू चबूतरे पर पूजा करने लगे थे और मुख्य गुंबद के नीचे गर्भगृह मानते थे।

कोर्ट ने कहा, यात्रियों की वृतांत और पुरातात्विक सबूत हिंदुओं के हक में है। विवादित जमीन पर रामलला का हक है, मुस्लिम पक्ष को कहीं ओर जमीन दी जाएगी।

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