अयोध्या फैसले के बाद बोले जस्टिस बोबडे, सबसे कठिन मामलों में से एक था यह केस

जस्टिस अरविन्द बोबडे ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि जब अयोध्या मामले पर फैसला देने का समय आया तो हु, सभी जजों की सहमती थी कि फैसला एक होना चाहिए। हम सभी अयोध्या के फैसले को लेकर एक मत थे।

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Sharad arvind bobde

नई दिल्ली: सालों से लंबित चल रहे अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन रामलला को सौंप दी है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद को ख़त्म कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया है। सबसे बड़ा फैसला देने वाली पांच जजों की बेंच के एक जज जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने इसको लेकर बड़ी बात कही है।

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर के मुताबिक जस्टिस अरविन्द बोबडे ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि जब अयोध्या मामले पर फैसला देने का समय आया तो हु, सभी जजों की सहमती थी कि फैसला एक होना चाहिए। हम सभी अयोध्या के फैसले को लेकर एक मत थे। उन्होंने माना कि अयोध्या का मामला सबसे कठिन मामलों में से एक था।

जस्टिस बोबडे ने बताया कि इस फैसले को देने से पहले वह कानून व्यवस्था को लेकर चिंतित थे। हम संतुष्ट हैं कि हमने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि फैसले के बाद मैं एक ही सन्देश देना चाहता हूं कि कई सालों से चला आ रहा यह विवाद अब खत्म हो गया है।

गौरतलब है कि अयोध्या मामले पर फैसले से पहले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने मुख्य सचिव और डीजीपी से मुलाक़ात की थी। अयोध्या मामले पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ने मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया था। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को तीन महीने का समय दिया है।

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