अयोध्या केस : SC के जजों ने फैसले के लिए बनाई रणनीति, इस दिन मिल सकता है शुभ समाचार

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नई दिल्ली। अयोध्या के रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है। हिन्दू और मुस्लिम पक्ष की ओर से वकील अपनी दलीलें भी रख चुके हैं। अब देशभर की नजरें फैसले पर टिकी हुई है। बताया जा रहा है कि नवंबर के दूसरे सप्ताह में अयोध्या विवाद पर फैसला हो जाएगा। इधर, फैसला लिखने से पहले चीफ जस्टिस रंजन गोगाई सहित पांच जजों ने बैठक कर कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। बताया जा रहा है कि फैसला लिखने के लिए समय कम है और इसमें सभी पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी है।

जजों की बैठक में चर्चा की गई है कि अयोध्या मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को किस रूप में लिया जाए। जजों ने मुकदमे में पक्षकारों के दावों और फैसले को लेकर अपने-अपने दृष्टिकोण को लेकर भी चर्चा की। इतना ही नहीं, इस बैठक में मध्यस्थता समिति की रिपोर्ट और फैसले की रूपरेखा पर भी बातचीत की गई। गौरतलब है कि मध्यस्थता समिति की ओर सीलबंद रिपोर्ट पांच जजों को सौंप दी गई है। सूत्रों के मुताबिक मध्यस्थता समिति ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कुछ पक्षकारों के सुलह प्रस्तावों का जिक्र किया है। चीफ जस्टिस के साथ हुई पांच जजों की बैठक में 17 नवंबर तक फैसला सुनाने का निर्णय लिया गया है।

हालांकि मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राम मंदिर निर्माण पर 10 से 15 नवंबर के बीच निर्णय सुनाया जा सकता है। इधर, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जुफर फारूकी ने अयोध्या मामले को वापस लेने की खबरों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने बताया कि हमने सुप्रीम कोर्ट में ऐसा कोई आवेदन नहीं दिया है, जिसमें यह कहा गया हो कि हम केस को वापस कर रहे हैं। जहां तक मध्यस्थता पैनल का सवाल है, तो जो हमने मध्यस्थता पैनल से कहा है, वह जानकारी सार्वजनिक नहीं कर सकते हैं।

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