फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा अयोध्या मामला, जमीयत उलेमा ने दायर की पुनर्विचार याचिका

सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच द्वारा अयोध्या मामले को लेकर सुनाए गए फैसले पर जीमयत उलेमा-ए-हिंद ने पुनर्विचार याचिका दायर की है।

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Suprime Court

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच द्वारा अयोध्या मामले को लेकर सुनाए गए फैसले पर जीमयत उलेमा-ए-हिंद ने पुनर्विचार याचिका दायर की है। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो ये याचिका जमीयत उलेमा के उत्तर प्रदेश जनरल सचिव मौलाना अशद रशीदी की तरफ से दायर की गई है। बता दे कि रशीद अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्ष के 10 याचिकाकर्ताओं में से एक हैं। खबरों की माने तो जमीयत प्रमुख मौलाना अरशद मदनी शाम पांच बजे तक पत्रकार वार्ता कर सकते हैं।

वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव जफरयाब जिलानी का कहना है कि हम सुप्रीम कोर्ट में आज पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करेंगे। हम समीक्षा याचिका तैयार कर चुके हैं और इसे 9 दिसंबर से पहले दाखिल कर देंगे।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से सुनाए गए फैसले के प्रत्येक पहलू को देखने के लिए जमीयत उलेमा की कार्यकारी समिति ने 14 नवंबर को पांच सदस्यों के एक पैनल का गठन किया था। जिसमें कानूनी विशेषज्ञ और धार्मिक मामलों के विद्वान शामिल थे। जमीयत प्रमुख मौलाना अरशद मदनी की अध्यक्षता में इस पैनल द्वारा शीर्ष अदालत के निर्णय को चुनौती देने वाली पुनर्विचार याचिका की संभावनाओं को देखा और इस मामले में समीक्षा याचिका दायर करने की सिफारीश की थी।

मुख्तार अब्बास नकवी ने साधा निशाना

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने इस मामले को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद पर निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा कि अयोध्या फैसले को लेकर रिव्यू पीटीशन दायर करने वाले लोग बिखराव और टकराव का माहौल पैदा करने की प्रयास कर रहे हैं। लेकिन समाज इसे नहीं स्वीकारेगा। केन्द्रीय मंत्री ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के बाद बाद अयोध्या मामला खत्म हो गया है और इसे अब उलझाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए क्योंकि देश की उच्चतम अदालत ने सर्वसम्मति से फैसले में इस मामले को हल कर दिया है।

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