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अयोध्या केस : मध्यस्थता पैनल की रिपोर्ट के बाद, SC कल करेगा पहली सुनवाई | Ayodhya Case: After the Mediation Panel Report, SC will hear first hearing

Posted on: 09 May 2019 20:51 by bharat prajapat
अयोध्या केस : मध्यस्थता पैनल की रिपोर्ट के बाद, SC कल करेगा पहली सुनवाई | Ayodhya Case: After the Mediation Panel Report, SC will hear first hearing

कई वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित पड़े अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद को लेकर शुक्रवार को एक बार फिर सुनवाई की जाएगी। बता दें कि इस मामले में कोर्ट द्वारा मध्यस्थता का आदेश दिया था जिसके लिए अदालत ने एक समिति भी गठित की थी। जिसमें जस्टिस खलीफुल्लाह, श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील रामपांचु शामिल थे।

सुप्रीम कोर्ट ने पैनल को रिपोर्ट सौंपने के लिए 8 हफ्ते का समय दिया था। फैसला सुनाने वाली संवैधानिक पीठ में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर शामिल थे। वहीं अदालत ने मध्यस्था को बंद कमरे में पूरी गोपनीयता के साथ करने का आदेश दिया था जो की फैजाबाद में होनी थी।

शुक्रवार को होने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट हो जाएगा कि मध्यस्थता पैनल को कितनी सफलता हासिल हुई है। इसके लिए कोर्ट ने 3 मई तक का समय दिया था। साथ ही पीठ ने 4 हफ्तों में मध्यस्था पैनल को अपनी प्रोग्रेस रिपोर्ट सौंपने की भी बादत कही थी। शीर्ष अदालत ने मामले को मध्यस्थता पैनल को भेजते हुए कहा था कि यह मामला 15 स्क्वायर फिट का नहीं है बल्कि लोगों की भावनाओं से जुड़ा है।

इधर निर्मोही अखाड़े का छोड़कर दूसरे हिंदुवादी संगठनों ने इस मामले कोे मध्यस्था पैनल को सौंपे जाने का विरोध किया था। हालांकि मुस्लिम संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया था। उस दौरान रामलला विराजमान की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथ ने मस्जिद के लिए किसी अलग जगह पर बनाने के लिए फंडिंग की बात कही थी। साथ ही उन्होने कहा था कि राम लला की जन्मभूमि को लेकर किसी तरह का कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इसलिए मध्यस्था से कोई हल नहीं निकलने वाला है।

गौरतलब है कि शिया वक्फ बोर्ड विवादित जमीन पर मंदिर बनाए जाने के पक्ष में रहा है। वफा के बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने कहनवा है कि विवादित मस्जिद का निर्माण बाबर के सेनापति मीर बाकी द्वारा करवाया गया था जाक कि बनवाया था जो कि एक शिया मुस्लिम था। इसलिए इस पर शिया वक्फ बोर्ड का अधिकार है। उनका कहना था कि इसके लिए वक्फ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट में पहले ही हलफनामा वह पर्याप्त सबूद दे चुका है।

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