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वाजपेयी सरकार में ही बन गई थी एयरस्ट्राइक की योजना लेकिन…

Posted on: 01 Jul 2019 17:13 by Surbhi Bhawsar
वाजपेयी सरकार में ही बन गई थी एयरस्ट्राइक की योजना लेकिन…

नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान में घुसकर की एयरस्ट्राइक पर मोदी सरकार की वाहवाही हो रही है लेकिन हाल ही में इसको लेकर एक बड़ा एक खुलासा हुआ है। एयर स्ट्राइक की योजना 2001 में अटल बिहारी वाजपेई की सरकार के समय ही बन गई थी।

दरअसल 13 दिसंबर 2001 को आतंकियों ने दुस्साहस की सारी हदें पार कर देश की संसद को निशाना बनाया था। उसके बाद वाजपेई सरकार ने पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक की योजना बनाई थी। इस बात का खुलासा नौसेना प्रमुख एडमिरल सुशील कुमार की एक किताब में हुआ है।

एडमिरल सुशील कुमार की ‘ए प्राइम मिनिस्टर टू रिमेंबर’ 28 जून को राजधानी दिल्ली में विमोचितन हुई है। इस किताब में सुशील कुमार ने लिखा है कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के पांच आतंकियों द्वारा भारत की संसद पर हमला करने के तुरंत बाद ही अटल सरकार ने तीनों सेना के चीफ, रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ब्रजेश मिश्रा से आर्मी ऑपरेशन रूम में मुलाकात की थी। इस दौरान एलओसी को पार कर और पीओके में आतंकी शिविरों को नष्ट करने के लिए एयर स्ट्राइक की योजना बनाई गई थी।

इस किताब में बताया गया है कि ग्वालियर स्थित मिराज 2000 लड़ाकू विमान एक्शन के लिए तैयार थे लेकिन आखिरी मिनट में एक खुफिया रिपोर्ट आई जिसके बाद पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक का यह प्लान कैंसिल कर दिया गया। दरअसल खुफिया रिपोर्ट मैं बताया गया था कि पाकिस्तान की सेना ने एक स्कूल और बड़े अस्पताल के बीच आतंकी कैंप को स्थानांतरित कर दिया।

हालांकि एडमिरल सुशील कुमार ने किताब में इस बात का उल्लेख नहीं किया है कि एयर स्ट्राइक को अंजाम देने की योजना कैसे बनाई गई थी। आखिरकार चर्चा के बाद तय हुआ कि सीमा पर फोर्स तैनात कर दी जाए। भारत सरकार ने इसके तहत 10 महीने तक सीमा पर फोर्स तैनात रखी। इस ऑपरेशन को ‘पराक्रम’ नाम दिया गया था।

इतना ही नहीं एडमिरल सुशील कुमार ने अपनी किताब में यह भी खुलासा किया है कि उस बैठक में स्पष्ट हो गया था कि वाजपेई तीनों सशस्त्र बलों के सीमा पर जमावड़े को अपने ठोस रणनीति के तौर पर देख चुके हैं। इन सभी के बाद अटल बिहारी वाजपेई ने रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नाडिस के साथ मुलाकात की।

एडमिरल कुमार के मुताबिक सशस्त्र बलों ने सीमा पर जनवरी से अक्टूबर 2002 तक आदेश का इंतजार किया जो आया ही नहीं। सीमा पर सेना की तैनाती के दौरान सात सैनिक मारे गए। एडमिरल का कहना है कि ऑपरेशन पराक्रम बिना किसी उद्देश्य से चलाया गया। इसने सशस्त्र बलों की तैनाती नेतृत्व से जुड़ी तमाम कमियों को उजागर किया।

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