वर्तमान समय में ऑनलाइन एजुकेशन बहुत ज्यादा बढ़ गया है यह थियोरोटिकल मीडियम के लिए अच्छा है, लेकिन हैंड्स ऑन ट्रेनिंग सिर्फ फिजिकल टीचिंग या स्किल्स लैब से ही ली जा सकती है, डॉ. राहुल तनवानी इंडेक्स मेडिकल कॉलेज

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इंदौर. कॉविड के बाद से ऑनलाइन टीचिंग एक सशक्त और लोकप्रिय टीचिंग मीडियम बन कर उभरा है. लेकिन हर चीज के दो पहलू होते हैं, कुछ नुकसान और कुछ फायदे भी होते हैं. अगर ऑनलाइन टीचिंग की बात की जाए, तो एक नुकसान यह है कि इनमें फिजिकल क्लास रूम के जितना टू-वे कम्युनिकेशन नहीं हो पाता है. साथ ही, यह थेयोरेटिकल टीचिंग के लिये अच्छा मीडियम है, लेकिन प्रैक्टिकल और हैंड्स ऑन ट्रेनिंग सिर्फ फिजिकल टीचिंग या स्किल्स लैब से ही ली जा सकती है. इसके आलावा, आज एक स्टूडेंट गूगल या यू-ट्यूब से कोई जानकारी हासिल करना चाहता है, तो उसे एक ही पल में ढेर सारे वीडियो और आर्टिकल मिल जाते है. लेकिन इसमें समस्या यह है कि कई बार उसके लिये इन सब में से किसी एक को चुनना मुश्किल हो जाता है, और इस से उसका कन्फ्यूज़न बढ़ जाता है . यह बात डॉ. राहुल तनवानी ने अपने साक्षात्कार के दौरान कही. वह शहर के प्रतिष्ठित इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग में प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

सवाल. मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल से स्टडी पर कैसे प्रभाव पड़ता हैं ?

जवाब: हर चीज की तरह इसके भी सकारात्मक और नकारात्मक दो पहलू हैं। वर्तमान समय में मोबाइल का इस्तेमाल बहुत ज्यादा बढ़ गया है। कुछ स्टूडेंट्स अपना अधिकांश समय सिर्फ सोशल मीडिया पर इंटरटेनमेंट के लिये बिता देते है. दूसरी ओर, कुछ स्टूडेंट्स इस टेक्नोलॉजी को मुख्य रूप से अपनी स्टडी के लिये इस्तेमाल करते है. कुल मिलाकर यह स्टूडेंट पर निर्भर करता है कि वह मोबाइल और इंटरनेट का प्रयोग कैसे कर रहा है. यदि वह इसे 80-90% समय अपनी स्टडी के लिये और बाकि समय इंटरटेनमेंट के लिये इस्तमाल करता है, तो यह उसके लिये फायदेमंद है. लकिन यदि इसका प्रयोग विपरीत रूप से किया जा रहा है, तो यह काफी नुकसानदेह हो सकता है.

सवाल. पढ़ाई के दौरान मानसिक तनाव से कैसे बचें ?

जवाब. कई स्टूडेंट द्वारा पढ़ाई को लेकर मानसिक तनाव लिया जाता जो सही नहीं है. हमें मानसिक तनाव से बचने के लिए अपनी डेली रूटीन एक्टिविटी की सही प्रोग्रामिंग करनी चाहिये. साथ ही हमारी एक्टिविटी में योग, प्राणायाम जैसी चीजें शामिल करना चाहिए. इससे मानसिक तनाव तो कम होता ही है, साथ ही शरीर में स्फूर्ति बनी रहती है। इसके आलावा, सोशल मीडिया से बाहर निकल कर फिजिकली भी सोशल होना जरुरी है, ताकि आप दुनिया से जुड़े रहे हैं और तनाव से मुक्त हो सकें।

सवाल. बेहतर एजुकेशन के लिए स्टूडेंट को किन चीजों के लिए अपडेट रहना चाहिए?

जवाब. आज के समय में बेहतर शिक्षा के लिए स्टूडेंट को आने वाली टेक्नोलॉजी और इन्वेंशन से अपडेट रहना बहुत ज्यादा जरूरी है। आज से 10-12 साल पहले सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी इतनी नहीं थी. वही आजकल धीरे-धीरे एजुकेशन फील्ड में इसका इस्तेमाल बहुत ज्यादा बढ़ गया है. वर्तमान समय में स्टूडेंट्स के साथ साथ टीचर्स भी इस टेक्नोलॉजी से अपडेटेड रहते है। लगभग 10 साल पहले मैने फेसबुक पर SMS : Surgery for Medical Students के नाम से एक एजुकेशनल पेज बनाया था। वहीं कॉविड काल में स्टूडेंट्स को पढ़ाने के लिए यू ट्यूब पर अपना चैनल भी शुरू किया है, जहां पर मैं वीडियो के माध्यम से एजुकेशन से संबंधित जानकारी प्रदान करता हूं।

 

सवाल. आपने अपनी मेडिकल फील्ड की पढ़ाई किस क्षेत्र में और कहां से पूरी की है ?

जवाब. मैंने अपनी एमबीबीएस और एमएस सर्जरी की पढ़ाई एनएससीबी मेडिकल कॉलेज,जबलपुर से पूरी की. उसके बाद एमसीएच पीडियाट्रिक सर्जरी बी जे मेडिकल कॉलेज, अहमदाबाद से की. मैं पिछले 12 वर्षों से इंडेक्स मेडिकल कॉलेज में अपनी सेवायें दे रहा हूँ, और वर्तमान में सर्जरी विभाग में प्रोफेसर के पद पर हूँ . मेरी सर्जरी के साथ-साथ डॉक्टर-पेशंट कम्युनिकेशन के विषय पर भी शिक्षण में विशेष रूचि है. इस विषय पर मैंने वर्ष 2014 में ‘द स्किल्स ऑफ़ हिस्ट्री टेकिंग’ नाम की बुक लिखी, जिसका वर्ष 2021 में तीसरा संस्करण प्रकाशित हुआ है. इसके आलावा अपने कॉलेज में एक सुसज्जित स्किल्स लैब के स्थापना की, जिसमें स्वयं के द्वारा बनाया गया यूरिनरी ब्लैडर केथेटराइज़ेशन का मॉडल भी शामिल है। इसी के साथ कई मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में कम्युनिकेशन के विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिये है। और पिछले कई वर्षों में स्टूडेंट्स को सिखाने के लिए क्लासरूम, ऑनलाइन और सोशल मीडिया टीचिंग के कई नए तरीकों पर कार्य किया हैं ।