तो संघ और मोदी लगाएंगे नैया पार

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मुकेश तिवारी
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जो सर्वे और जमीनी रिपोर्ट लगातार आ रहीं हैं उनमें साफ नजर आ रहा है कि तीनों हिंदी भाषी राज्यों में भाजपा की नैया भंवर में फंसी हुई है। इसे पार लगाने की जिम्मेदारी एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कंधों पर आ गई है। भाजपा बहुत अच्छी तरह से जानती है कि ये दोनों ही उसे इस संकट से उबार सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक पहले भाजपा संगठन के पास जो आंकलन था उसमें केवल राजस्थान में ही सत्ता में वापसी करने में दिक्कत दिख रही थी। जब संघ से जमीनी फीडबैक लिया गया और अनेक सर्वे आए तो लगा कि मप्र और छत्तीसगढ़ में भी नैया डोल रही है। इसके बाद कई बड़े रणनीतिक बदलाव किए गये है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की भोपाल यात्रा और संघ के आला पदाधिकारियों से मंथन के बाद संघ की सक्रियता बढ़ी है। संघ की ओर से वरिष्ठ स्वयंसेवकों को विधानसभा क्षेत्रवार नजर रखने का जिम्मा सौंपा गया है।

दूसरी ओर उप्र और गुजरात की तरह इन तीनों राज्यों में प्रधानमंत्री मोदी की ज्यादा से ज्यादा सभाएं और रोड शो कराने की तैयारी है। ऐसी जानकारी आई है कि मोदी अकेले मप्र में ही करीब एक दर्जन बड़ी रैली और सभा करने वाले हैं। हर सभा और रैली का स्थान ऐसा रखा जा रहा है ताकि आसपास की करीब बीस विधानसभा सीटों पर इसका व्यापक असर हो। अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों के साथ ही मोदी की सभा और रैली उन क्षेत्रों में भी कराने की योजना है जहां पिछली बार भाजपा हार गई थी। कांग्रेस के बड़े नेताओं के क्षेत्रों में भी मोदी की सभा की तैयारी है। किसान आंदोलन और जातीय आंदोलन से प्रभावित रहे क्षेत्रों के लिए विशेष रणनीति बनाई गई है। एक वरिष्ठ भाजपा नेता के मुताबिक गुजरात और कर्नाटक जैसी चूक यहां नहीं हो पाए ऐसी तैयारी की गई है।

लेखक, वरिष्ठ पत्रकार और Ghamasan.com के संपादक हैं।

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