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छत्तीसगढ़ में विद्रोही उम्मीदवार बने मुसीबत

Posted on: 10 Nov 2018 16:20 by Rakesh Saini
छत्तीसगढ़ में विद्रोही उम्मीदवार बने मुसीबत

छत्तीसगढ़ में विद्रोही उम्मीदवार कांग्रेस और भाजपा के लिए भारी मुसीबत बन गए है। अभी हाल ही में छत्तीसगढ़ में 90 सीटों पर विधानसभा चुनाव होना है। बता दें कि बीजेपी ने पिछले विधानसभा चुनाव में केवल 0.75 प्रतिशत के अंतर से जीत दर्ज की थी लेकिन चौथी बार बीजेपी सरकार बनने की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है।

वहीं कांग्रेस की मुसीबत भी इसी तरह की कांग्रेस हार जीत के अंतर को खत्म कर 15 सालों के बाद सरकार बनाने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रही है। लेकिन इन बागियों के कारण झटका लग सकता है। दो चरणों में होने वाले चुनाव के लिए नाम वापस लेने की अंतिम तारीख़ के बाद 1338 उम्मीदवार मैदान में बचे रह गए हैं।

बाग़ियों की उम्मीदवारी:

इनमें बीजेपी और विपक्षी दल कांग्रेस के अलावा बसपा, छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, सीपीआई, सीपीएम, छत्तीसगढ़ समाज पार्टी जैसे राजनीतिक दलों के उम्मीदवार तो हैं ही बल्कि कई सीटों पर दोनों बड़े राजनीतिक दलों के नेता निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर ताल ठोक कर खड़े हैं।

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होना है उससे पहले ही राज्य भर से दोनों ही पार्टियों के कार्यालयों में तोड़ फोड़ और प्रदर्शन की घटनाओं की खबर आती रही है। इसमें ऐसा भी कारनामा हुआ की बस्तर में कांग्रेस की विधायक देवती कर्मा के खिलाफ़ उनके ही बेटे मैदान में उतर गए थे। पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष भूपेश बघेल बड़ी मुश्किल से उन्हें समझा पाए।

यही हाल रामानुजगंज, बसना, साजा, बिलाईगढ़ जैसी सीटों का है, जहां भारतीय जनता पार्टी के प्रभावशाली नेता निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में आ गए हैं।

दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी भी इस मुश्किल से दो-चार हो रही है. डौंडी लोहारा से लेकर बिंद्रानवागढ़ तक कई कांग्रेसी निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। ये नेता प्रभावशाली तो हैं और इसलिए कम से कम ‘वोट कटवा’ की भूमिका तो निभा ही सकते हैं।

इसी तरह वैशाली नगर में भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री सरोज पांडेय के भाई राकेश पांडेय और भाभी चारुलता पांडेय ही भाजपा प्रत्याशी के ख़िलाफ़ मैदान में उतर गए। यूं भी इन दमदार बाग़ियों के कारण पिछले चुनाव में कई विधानसभा सीटों पर कांग्रेस या भाजपा तीसरे नंबर पर पहुंच गई थी।

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष भूपेश बघेल कहते हैं, “पार्टी में कई जगहों पर अधिकृत प्रत्याशी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने की ख़बर मिली थी. लेकिन,अधिकांश जगहों पर अब कोई विवाद नहीं है. कांग्रेस का एक-एक कार्यकर्ता जी जान से जुटा हुआ है और छत्तीसगढ़ में अगली सरकार हमारी बनने वाली है।”

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