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इंदौर नगर निगम कमिश्नर मनीष सिंह के तबादले पर वरिष्ठ पत्रकार अर्जुन राठौर की टिप्पणी

Posted on: 01 May 2018 07:27 by Ravindra Singh Rana
इंदौर नगर निगम कमिश्नर मनीष सिंह के तबादले पर वरिष्ठ पत्रकार अर्जुन राठौर की टिप्पणी

नगर निगम के नए आयुक्त आशीष सिंह के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे किस तरह से मनीष सिंह की जगह ले पाएंगे इसकी सबसे बड़ी वजह यह है की मनीषसिंह ने अपनी एक अनुशासनात्मक कार्यशैली से अलग ही पहचान इंदौर शहर में बनाई थी और इसी कार्य शैली के चलते इंदौर शहर में कई ऐसे कार्य हुए जिन्होंने शहर की फिजा ही बदल दी।

राज मोहल्ला सड़क का विकास स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट बियाबानी रोड और सरवटे से गंगवाल का नया मार्ग इसके अलावा इंदौर को साफ स्वच्छ शहर का दर्जा दिलाने में भी मनीष सिंह का अहम योगदान रहा है उन्होंने अपने जिस कठोर अनुशासन और कठोर कार्यशैली के जरिए नगर निगम में एक काम करने की शैली विकसित की थी उसी का नतीजा है कि आज नगर निगम के कर्मचारी कार्य करके ही नौकरी में रह पा रहे हैं।

नगर निगम में नई कार्य शैली विकसित करने का श्रेय भी मनीषसिंह को दिया जा सकता है इसके अलावा उनके और महापौर के बीच जो तालमेल था उस तालमेल को कायम रखना भी आशीष सिंह के लिए सबसे बड़ी चुनौती रहेगी। क्योंकि महापौर के साथ अनेक उल्लेखनीय कार्यों को करने के बाद भी मनीष सिंह ने कभी भी यह इच्छा जाहिर नहीं की कि उन्हें इसका कोई पुरस्कार या पब्लिसिटी मिलना चाहिए उन्होंने पुरस्कार और पब्लिसिटी दोनों महापौर के खाते में ही डाले हैं।

इंदौर शहर में अक्सर ऐसा भी होता है की एक कठोर अधिकारी के कार्य काल के बाद पूरा प्रशासन तंत्र ढीला पड़ने लगता है और कर्मचारी से लेकर आम नागरिक तक उसका लाभ उठाने लगते हैं मनीष सिंह ने इंदौर को अतिक्रमण मुक्त , गुमटी ओर ठेला मुक्त कर दिया था अब सवाल इस बात का है क्या उनके जाने के बाद यह स्थिति कायम रह पाएगी।

इंदौर नगर में जिस तरह से शौचालयों का निर्माण हुआ है वह नागरिकों के लिए बहुत बड़ी सुविधा है लेकिन अब यह सवाल आएगा कि क्या इन शौचालयों का मेंटेनेंस ठीक से हो पाता है अथवा नहीं । मनीष सिंह अपनी कार्यशैली के कारण लगभग 18 घंटे तक काम करते थे और अचानक कभी भी किसी भी समय पहुंच जाते थे। उनका खोफ हर जगह बना ही रहता था कि कहीं ऐसा ना हो कि वे आ जाएं और रंगे हाथों पकड़ लें आशीष सिंह को भी अब अपनी कार्यशैली को मनीषसिंह की स्टाइल में ढालना ही होगा। देखना तो यह भी है कि क्या आशीष सिंह भी अपनी कार्य शैली विकसित कर पाते हैं।

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