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शिखर पर पहुंच कर बहुत अकेला हो जाता है व्यक्ति, अर्जुन राठौर की कलम से….

Posted on: 13 Jun 2018 10:11 by krishnpal rathore
शिखर पर पहुंच कर बहुत अकेला हो जाता है व्यक्ति, अर्जुन राठौर की कलम से….

भय्यूजी महाराज की आत्महत्या के बाद कई सवाल उठ रहे हैं सबसे बड़ा सवाल मनोविज्ञान से जुड़ा है कहा जाता है कि शिखर पर पहुंचने के बाद व्यक्ति अकेला पड़ जाता है उसके पास दूसरों की समस्याएं सुलझाने की सामर्थ और शक्ति तो होती है लेकिन कई बार खुद की समस्याओं को लेकर वह अपने आप को बहुत अकेला और असहाय पाता है।

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संभवत: भय्यूजी महाराज के साथ भी ऐसा ही हुआ होगा राष्ट्र से लेकर प्रदेश की कई समस्याएं सुलझाने के बाद भय्यू जी महाराज अपनी पारिवारिक समस्याओं को किसी से भी शेयर नहीं कर पाए, वे चाहते तो अपनी इन समस्याओं को लेकर अपने दोस्तों और शुभचिंतकों से बात कर सकते थे लेकिन ऐसा नहीं हुआ और उन्होंने एक ऐसा निर्णय लिया जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था।

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शिखर पर पहुंचे व्यक्ति की त्रासदी वास्तव में कुछ ऐसी ही होती है सालों पहले प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता गुरुदत्त ने पारिवारिक विवादों को लेकर जब आत्महत्या की तो पूरा बॉलीवुड स्तब्ध रह गया था गुरुदत्त बहुत गम्भीर और संजीदा फिल्मकार थे उनकी बनाई हुई फिल्में कागज का फूल और प्यासा तो बॉलीवुड की अमर फिल्में बन गई है।

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गुरुदत्त के साथ ही और भी कई शिखर पर पहुंचे व्यक्तियों की आत्महत्याओं ने यह सोचने पर मजबूर किया है कि आखिर वे अपनी समस्याएं किसी और से शेयर क्यों नहीं कर पाए । भय्यूजी महाराज के शुभचिंतकों में बड़े-बड़े नेताओं से लेकर कलाकार तक थे लेकिन परिवार के इस मोर्चे पर उन्होंने संभवत खुद को अकेला पाया और उन्होंने जो निर्णय लिया उसने यह साबित कर दिया की शिखर पर पहुंचा हुआ व्यक्ति कई बार बहुत अकेला हो जाता है ।

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