क्या हमारे देश में आज भी लोगों की जान इतनी सस्ती है, लोगों को गोलियों से भून दिया जाए वरिष्ठ पत्रकार अर्जुन राठौर की टिप्पणी

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वेदांता समूह की स्टरलाइट यूनिट के कॉपर प्लांट में हो रहे प्रदूषण के खिलाफ इकट्ठा हुए लोगों को गोलियों से भून दिया गया इस घटना में 9 लोगों ने अपनी जान गवाई । सवाल इस बात का है कि आज भी प्रदूषण जैसे मुद्दे पर विरोध करने वाले लोगों को गोलियों से भून दिया जाता है , हम कैसी व्यवस्था में जी रहे हैं।

वेदांता ग्रुप पहले ही विवादों में घिरा रहा है यहां यह बात विचारणीय है कि स्टरलाइट इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड से होने वाले प्रदूषण के विरोध में यहां के लोग कई महीनों से धरना प्रदर्शन कर रहे थे । मंगलवार को इस धरना प्रदर्शन का सौवां दिन था और उसी दिन 9 से ज्यादा लोगों को न केवल अपनी जान गंवानी पड़ी बल्कि अनेक लोग घायल हो गए।

क्या प्रदूषण के मुद्दे पर जनता को विरोध करने का कोई अधिकार नहीं है पूरे देश के प्रभावशाली उद्योगपतियों ने प्रदूषण के नियमों की अवहेलना कर रखी है नदियों से लेकर हवा पानी सब कुछ खराब कर के रख दिया है मध्य प्रदेश का नागदा और वहां चल रही यूनिट ग्रासिम सबसे बड़ा उदाहरण है जहां चंबल का पानी न केवल प्रदूषित है बल्कि नागदा की आबोहवा भी पूरी तरह से खराब हो चुकी है।

आखिर सरकार इन उद्योगपतियों के आगे इतनी लाचार कैसे हो जाती है कि प्रदूषण के नियमों का पालन कराने की बजाय उसे यह ज्यादा बेहतर लगता है कि लोगों को गोलियों से भून दिया जाए ताकि कोई विरोध ना कर सके। आंध्र प्रदेश की घटना क्या इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में पर्यावरण को उद्योगपतियों के भरोसे ही छोड़ दिया जाएगा और सरकार मूकदर्शक बनकर बैठी रहेगी, क्या आम आदमी की नियति बस यही रहेगी कि वह जब भी विरोध करने के लिए उठे तो उसे सरकार की गोलियों का सामना करना पड़े।

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