अनुपम खेर ने कहा मनमोहन सिंह बेजोड़ है, कमलेश्वर पांडे की कलम से

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अपने को मोदी का चमचा कहलाने में फख्र महसूस करने वाले अभिनेता अनुपम खेर ने आज ट्वीटर पर स्वीकार किया है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बारे में उनकी धारणा गलत थी। ‘द एक्सीडेन्टल प्राइम मिनिस्टर’ की शूटिंग खत्म करने के बाद उन्होंने कहा है कि पिछले 1 साल के दौरान मनमोहन सिंह को जीने के बाद उनकी धारणा बदल गई। उन्होंने फिल्म रिलीज होने के बाद मनमोहन सिंह के साथ एक कप चाय पीने की ख्वाहिश भी जाहिर की है।

मनमोहन सिंह के मीडिया एडवाइजर रहे संजय बारू की किताब पर यह फिल्म बनी है। मोदी के कृपा पात्र होकर मनमोहन सिंह और कांग्रेस की अवमानना (चरित्रहरण भारी शब्द हो जाएगा) के लिए संजय बारू ने यह किताब लिखी होगी जो इसके शीर्षक से ही जाहिर हो जाता है। अनुपम खेर ने भी अपनी अभिनय क्षमता से मनमोहन सिंह और कांग्रेस की मिट्टी-पलीद कर मोदी के कुछ काम आने की गरज से यह फिल्म की होगी। लेकिन मनमोहन सिंह के जीवन का पिछले 1 साल तक अभिनय करने के दौरान उन्हें पता चल गया होगा कि उनका अभिनय कहीं सूरज पर थूकने जैसा तो नहीं हो रहा है। इसलिए आखिरकार उन्होंने अपनी गलती स्वीकार कर ली है और मनमोहन सिंह को आश्वस्त किया है कि इतिहास उन्हें कमतर नहीं आँकेगा।

मनमोहन सिंह देश में नव उदारवादी अर्थव्यवस्था के प्रणेता हैं जो पूँजीपतियों के पक्ष में है और जिसे मोदी सरकार कई गुना ज्यादा रफ्तार से चला रही है। मनमोहन सिंह ने अर्थव्यवस्था को बिना किसी दुराव-छिपाव के ईमानदारी से खोला। जनमत का दबाव पड़ने पर झिझके भी। यानी उन्हें कानून और जनता की कुछ तो परवाह थी। वे जो कर रहे थे उसके परिणाम का उन्हें पूरा पता था। विश्व-स्तर के अर्थशास्त्री हैं। लेकिन मोदी ने एक तरफ तो अर्थव्यवस्था को (क्रोनी कैपिटलिज्म ( बेईमानी भारी शब्द है) से जोड़ा और दूसरी तरफ उन्हें पता ही नहीं है कि वे जो कर रहे हैं हैं उसका नतीजा क्या होगा। अभी तक जो किया है उसके परिणाम तो उल्टे ही निकले हैं।
खैर, मनमोहन सिंह के जीवन को 1 साल तक जी कर अनुपम खेर को मोहभंग, हालांकि इसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया है, और उपलब्धि दोनों हुई यह अच्छी बात है।

 

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