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और इंदौर के मकान के साथ वो मूर्ति भी टूट गई…

Posted on: 07 Jul 2019 10:59 by Surbhi Bhawsar
और इंदौर के मकान के साथ वो मूर्ति भी टूट गई…

इंदौर के गंजी कंपाउंड की गली के अंदर वो छोटा सा तीन तरफ का प्लाट था जिस पर तीनों ओर से पुराने जर्जर से मकान पर नगर निगम की तीन जेसीबी और दो पोकलैंड मशीनें चौतरफा हमला सा किये हुयी थीं। मशीनों की गडगडाहट के बीच मकान के तीन तरफ की गलियें पुलिस के ढेरों महिला पुरूष जवान और नगर निगम की डंडा फौज के हवाले थीं। धूल के गुबार के बीच में हर तरफ बिखरे हुये थे वो ढेर सारे मीडिया मेन थे जो इंदौर से लेकर भोपाल तक से आये थे और जिनके अनवरत चल रहे कैमरे हर क्षण गिर रहे इस मकान के दर्द की परवाह किये बगैर रिकार्डिंग कर रहे थे।

मकान की तीन तरफ की छतों पर सैंकडों तमाशबीन भी थे अपने मोबाइल कैमरों से इसे रिकार्ड कर रहे थे और कुछ नयी उमर के लोग इन फोटो को फेसबुक और टि्वटर पर धडाधड अपलोड कर रहे थे और इन सबके बीच में ये पुराना सा मकान चौरतफा हो रहे हमले को झेल नहीं पा रहा था और उसकी उंची उंची चूना मिटटी से बनी दीवारें, सड चुकी लकडी के दरवाजे खिडकियां और जंग लगी टीन से बना छप्पर ढह रहा था। दो प्लाट पर तना तकरीबन दो हजार वर्गफीट का ये अस्सी साल पुराना मकान भी गिरने की जल्दबाजी में था क्योंकि उसे भी ये अपमान और जिल्लत बर्दाश्त नहीं हो रही थी जो उसके नाम पर पिछले आठ दिनों से जारी थी। जिसमें उसका प्यारा शहर इंदौर बदनाम हो रहा था।

वो 26 जून का दिन था जब भोपाल में कैबिनेट बैठक का ब्यौरा देने सरकार के प्रचार मंत्री पीसी शर्मा वल्लभ भवन के मीटिंग रूम में पहुंचे ही थे कि उसी वक्त वहां बैठे तकरीबन सारे पत्रकारों के मोबाइल पर एक कांग्रेस नेता की तरफ से वो वीडियो आ गया जिसमें बीजेपी के युवा विधायक आकाश विजयवर्गीय नगर निगम कर्मचारियों पर क्रिकेट के बैट से हमला तो नहीं हां बल्लेबाजी करते दिख रहे थे। उन्होंने इस मकान को गिराने आये नगर निगम के कर्मचारी पर क्रिकेट से बेट से प्रहार किया उसके बाद विधायक जी की वानर सेना ने तोडफोड और उपद्रव शुरू कर दिया नगर निगम के कर्मचारी पुलिस की मौजूदगी में ही पिटे। ये इंदौर में ही संभव था कि नगर निगम के कर्मचारी अपने अधिकारियों को ही पिटते देख रहे थे ये तथ्य तब उजागर हुया जब नगर निगम आयुक्त ने घटना का वीडियो देखकर करीब 21 नगर निगम के कर्मचारियों को हटाया जो घटना के दौरान मौजूद थे।

युवा विधायक जी की बल्लेबाजी के वीडियो को टीवी चैनलों ने आईसीसी वर्ल्डकप से जोडकर ऐसा चलाया कि हर जगह चर्चा होने लगी इस बल्लेबाजी की। कुछ चैनल ने तो इसे शिखर धवन के घायल होकर टीम से हटने ओर आकाश को टीम में शामिल करने से जोडने में भी कोई कसर नहीं छोडी। क्षेत्रीय चैनलों में शाम को चर्चाएं हुयीं जिनमें विधायक के क्रिकेट प्रेम से लेकर उनकी बल्लेबाजी के अंदाज पर विद्वानों ने घंटों खर्च किये। इस बल्लेबाजी पर चुटकुले, कार्टून पैरोडी और टिक टाक भी कुछ घंटों में ही बन कर वाइरल हो चुके थे।

बस फिर क्या था सरकार बदल चुकी थी लिहाजा देखते ही देखते इंदौर पुलिस ने विधायक जी के खिलाफ पहले एमजी थाने में मारपीट और सरकारी कामकाज में बाधा डालने का मामला दर्ज किया ओर फिर उनको गिरफतार कर जेल भेजने में भी देरी नही की। क्योंकि क्या गृहमंत्री और क्या नगरीय निकाय मंत्री सब कोई इस हरकत पर लगातार बाइट देकर मामले को गर्माने में कोई कसर नहीं छोड रहे थे। हां जाने से पहले युवा उत्साही विधायक ने ऐसा जुमला टीवी की बाइट में दिया जिसकी चर्चा बहुत दूर तक बडे बडे लोगों ने बंद कमरों की बैठकों में की ये चर्चित जुमला था पहले आवेदन फिर निवेदन और बाद में दनादन।

अगली सुबह अपन भी इंदौर में ही थे जहां पर जेल में बंद विधायक की जमानत पर सुनवाई होनी थी। दिनभर की भागदौड के बाद इंदौर की अदालत ने जमानत की अर्जी एक तरफ रख कर ये कह दिया गया कि इस मामले को तो भोपाल की विशेष अदालत में ही सुना जायेगा क्योंकि भोपाल में माननीय विधायकों के ऐसे खास कारनामों की सुनवाई के लिये खास कोर्ट बैठी हुयी है। बस फिर क्या था अगले दिन भोपाल की जिला अदालत में इंदौर के वकीलों का जमावडा जहां पर फिर उनको अदालत की परंपरा के मुताबिक अगले दिन की तारीख मिल गयी। अगले दिन फिर कोर्ट बैठी मगर आज इंतजार हो रहा था उस केस डायरी का जिसके आधार और अध्ययन के बाद जज साहब को जमानत पर फैसला करना था। और ये कोर्ट डायरी थी कि इंदौर के थाने से चलकर भोपाल कोर्ट के रास्ते में कहीं गायब सी हो गयी थी। उधर इंदौर से आये वकीलों की सांस उपर नीचे हो रही थी क्यों कि जेल में बंद विधायक जी को तीन दिन हो चुके थे इस कोर्ट कोर्ट के चक्कर में और ये नयी मुसीबत केस डायरी की यदि डायरी आज नहीं आयी तो फिर अगले दिन रविवार का चक्कर भी था जब कोर्ट बंद रहनी थी।

खैर कई फोन खडकाने और धमकाने के बाद दो पुलिस वाले दोपहर डेढ बजे केस डायरी लेकर अपनी गति से कोर्ट पहुंचे तब जाकर वकीलों और विधायक प्रशंसकों की जान में जान आई और कोर्ट बंद होने से कुछ पहले जमानत मंजूरी की खबर आ गयी। बस फिर क्या था इंदौर से आये लोग फोन फोन में लगे दूर दूर तक एक दूसरे को बधाइयां देने। कोई जमानत केस के फैसले से भी ज्यादा महत्वपूर्ण होती है ये हमने उस दिन जाना। उसके बाद तो अगले दिन सवा सात बजे विधायक जी जेल से तब बाहर आये जब हम भोपाल से चले रिपोर्टर इंदौर भोपाल रोड के बीच पप्पू के ढाबे पर पोहा जलेबियां खा रहे थे और अपने दफतर की डांट का एक्सटा डोज भी ले रहे थे कि कमाल है पहुंचे नहीं और देखो वो रिहा हो गया अब उनको कौन बताये कि जो लोग एक रात पहले इंदौर पहुंच कर सोये थे वो भी जेल नहीं पहुंच पाये ओर हमारे बल्लेबाज विधायक जी घर पहुंच गये थे।

खैर ये किस्सा बडा लंबा है जिसमें बाद में हमारे पीएम मोदी जी की धमाकेदार एंट्री होती है और यही वजह थी कि जब मकान गिर रहा था तो मौके पर मौजूद हम टीवी रिपोर्टर माइक पर कह रहे थे कि इस मकान के साथ इंदौर के बीजेपी के एक बडे नेता की प्रतिष्ठा भी धूल धूसरित हुयी है उनकी मूर्ति भी खंडित हुयी है आप ये बात मानते हैं कि नहीं।

ब्रजेश राजपूत

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