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आनंद यानी आज का महानतम जादूगर

Posted on: 31 May 2018 17:59 by Lokandra sharma
आनंद यानी आज का महानतम जादूगर

(राजेश बादल का आलेख)

कभी तो कोई थकता है, कभी तो कोई बोर होता है, कभी तो बूढ़ा होता है, कभी तो रोज़ रोज़ वही करते रहने से ऊबता है। एक यार है जो अपवाद है। नाम है, आनंद अवस्थी दुनिया उसे जादूगर आनंद के नाम से जानती है। तीस बरस पुरानी दोस्ती तब से आज तक जस की तस आनंद में भी कोई तब्दीली नहीं आई सदाबहार जितनी शिद्दत से तब अपना शो करता था,आज भी वही समर्पण। नए नए प्रयोग,नए ज़माने के हिसाब से प्रस्तुति में बदलाव। अपने आप को खोकर अपने शो में उसे आकार देना आनंद की ख़ास पहचान है। सिर्फ़ सात साल की उम्र में इस शौक से रिश्ता पालने वाले आनंद जबलपुर से निकलकर आज दुनिया के मौजूदा जादूगरों में महानतम बन बैठे हैं। वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ,लंदन ने इसके लिए हाल ही में आनंद को सम्मानित किया है।

संसार के सभी प्रायद्वीपों अफ़्रीका, ऑस्ट्रेलिया, एशिया, अमेरिका, यूरोप सभी के छत्तीस देशों में छत्तीस हज़ार शो। आँकड़ा बेहोश करने वाला है, 40साल में छत्तीस हज़ार यानी प्रतिदिन क़रीब क़रीब ढाई शो। आंधी हो या तूफान, बरसात हो भीषण लू, तबियत ठीक हो या ख़राब,परिवार की चिंता हो या सामाजिक लोक व्यवहार। आनंद सबमें भागीदार। एक शो देख लीजिए – मरते दम तक यादों में रहेगा, यह ग्यारंटी है मेरी।

एक ऐसा कलाकार, जो पाखण्ड और अन्धविश्वासको बढ़ावा नहीं देता, जो जादू का वैज्ञानिक विश्लेषण करता है, जो सम्मोहन की वैज्ञानिक व्याख्या करता है और जो पूरी दुनिया में भारत की इस पुरानी कला का प्रतिनिधित्व कर रहा है। सारा संसार पीसी सरकार के बाद आनंद को सेल्यूट करता है। हम उसे पद्मश्री के लायक भी नहीं समझते। पच्चीस बरस पहले आनंद ने जादू अकादमी खोलने के लिए सरकार से ज़मीन का एक टुकड़ा माँगा था। आज तक नहीं मिला।
आनंद!तुम्हें और तुम्हारे सफ़र को सलाम !

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