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जब राजनीति ने पटखनी दी महानायक को | Amitabh Bachchan was a failure at politics

Posted on: 24 Mar 2019 14:32 by Surbhi Bhawsar
जब राजनीति ने पटखनी दी महानायक को | Amitabh Bachchan was a failure at politics

हिंदी फिल्मों के महानायक अमिताभ बच्चन ने भी एक बार राजनीति का शौक पाला था और इलाहाबाद लोकसभा क्षेत्र से सदस्य चुने गए थे। इस चुनावी मुकाबले में उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति के दिग्गज और कई बार केंद्रीय मंत्री रहे हेमवतीनंदन बहुगुणा को पटखनी दी थी। मुकाबला काफी दिलचस्प था, लेकिन इंदिरा गांधी की हत्या के कारण राजीव गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस के पक्ष में सहानुभूति की लहर चल रही थी। लिहाजा अमिताभ कीर्तिमानी मतों से जीत दर्ज कराई।

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अमिताभ भी अपने मित्र राजीव की मदद करने के लिए ही राजनीति के मैदान में उतरे थे। वह दौर आमसभाओं और दीवारों पर चुनावी नारे लिखने का था। अमिताभ के साथ ही बहुगुणा के पक्ष में जमकर नारे इजाद किए गए। एक नारा बहुगुणा की ओर से लगाया गया जो आज तक लोगों को याद है। वह था- सरल नहीं संसद में जाना, मारो ठुमका गाओ गाना, दम नहीं है पंजे में लंबू फंसा शिकंजे में। समय ने साबित किया कि सचमुच लंबू यानी अमिताभ राजनीति के शिंकजे में ही फंस गए थे।

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बोफ़ोर्स तोप सौदा और उसमें दलाली खाने का शोर मचा और उसमें अमिताभ बच्चन के भाई अजिताभ बच्चन का नाम भी लिया जाने लगा। इस बदनामी को दूर करने के लिए वे अदालत भी गए औऱ मुक्ति पाई, लेकिन उन्हें तीन साल में ही लग गया कि राजनीति उनके बस की नहीं। उन्होंने तीन साल बाद ही संसद से इस्तीफा देकर राजनीति से तौबा कर ली। इसके बाद उन्होंने अपने मित्र अमरसिंह के कहने पर पत्नी जया बच्चन को समाजवादी पार्टी के बैनर तले राजनीति में उतारा। वे आज भी राज्यसभा सदस्य हैं।

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