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नवगीत बन गया है आज साहित्य की अभिव्यक्ति का मुखर माध्यम: Shashi Purwar

Posted on: 04 Mar 2019 15:19 by Ravindra Singh Rana
नवगीत बन गया है आज साहित्य की अभिव्यक्ति का मुखर माध्यम: Shashi Purwar

अखिल भारतीय महिला साहित्य समागम इंदौर जोकि वामा साहित्य मंच और घमासान कॉम के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया जा रहा है इसके दूसरे सत्र में आज काव्य के बदलते प्रतिमान पर चर्चा हुई।

Akhil Bharaiy Mahila Sahity Samagam-indore

इसमें शशि पुरवार द्वारा भाग लिया गया उनके नवगीत बेहद प्रसिद्ध हुए हैं उन्हें 100 महिला अचीवर्स पुरस्कार भी मिला है। इस अवसर पर शशि पुरवार ने कहा कि वामा साहित्य मंच और घमासान डॉट कॉम दोनो आयोजन के लिए बधाई के पात्र हैं।

काव्य में अभिव्यक्ति के बदलते प्रतिमान पर बोलते हुए कहा कि कवियों द्वारा प्रेम वात्सल्य मातृत्व सभी को लेकर अलग-अलग अभिव्यक्ति बेहद अच्छे तरीके से की गई है काव्य का समय सापेक्ष परिवर्तन हुआ है डॉ नामवर सिंह द्वारा इसकी बहुत अच्छी व्याख्या की गई है ।

मैथिलीशरण गुप्त ने कृषक नारी का चित्रण बहुत अच्छे से किया है गोबर उठाती थापती है वह रात चक्की चलाने बैठती इसमें ग्रामीण परिवेश का बहुत अच्छा विवरण दिया गया है निराला जी ने बिंबो की बहुत अच्छी अभिव्यक्ति दी है सुंदरता का भाव है रचनात्मकता है लोकगीत समय के साथ संवाद स्थापित कर रहे हैं भाषा और शिल्प की दृष्टि से लोकगीत बेहद आग्रही हैं।

नव गीतों में आंचलिक ता की खनक सुनाई देती है। नवगीत आज अभिव्यक्ति का सबसे अच्छा माध्यम बन गए हैं नदी की सकारात्मकता को लोकगीत बहुत अच्छे से व्यक्त कर रहे हैं उनमें समसामयिक अभिव्यक्ति भी है। शशि पुरवार ने पुलवामा की घटना पर एक बहुत सुंदर गीत सुनाया।

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