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कविता आज मंदिरों से निकलकर आम सड़क पर आ गई है: Shobana Shyam Mittal | Poetry today has come out of the temples and came on the common road: Shobana Shyam Mittal

Posted on: 04 Mar 2019 15:33 by Ravindra Singh Rana
कविता आज मंदिरों से निकलकर आम सड़क पर आ गई है: Shobana Shyam Mittal | Poetry today has come out of the temples and came on the common road: Shobana Shyam Mittal

अखिल भारतीय महिला साहित्य समागम इंदौर के आज दूसरे सत्र में प्रसिद्ध कवियत्री शोभना श्याम मित्तल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जीवनशैली बदलने के साथ ही साहित्य के प्रतिमान भी निश्चित रूप से बदलेंगे।

कविता के अलग अलग स्वरूप हमारे सामने आए वह कभी भक्ति का रूप लेती है तो कभी भक्ति का जो कविता शयन कक्ष के बाहर खड़ी दरवाजा खटखटाने से भी हिचक ती थी वह अब पूरी तरह से बदल गई है कविता के स्वरूप लगातार बदलते ही जा रहे हैं।

कुंवर नारायण ने कहा था कि जीवन के इस सबसे बड़े कार्निवाल में कवि विदूषक की तरह है। पाक सरीखा हो गया सर्दी का व्यवहार इस कविता में बिल्कुल नया प्रयोग किया गया है। अब कविता के प्रतिमान पूरी तरह से बदलते जा रहे हैं और उसमें रोजमर्रा के संघर्ष पूरी तरह से व्यक्त हो रहे हैं जो जीवन मूल्य पहले काव्य के अपरिहार्य थे उनके खिलाफ विद्रोह खड़ा हो गया है।

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