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इंदौर: आयकर के सर्च एंड सीजर संबंधित प्रावधानों पर सेमिनार हुआ

Posted on: 31 Jan 2019 22:28 by mangleshwar singh
इंदौर: आयकर के सर्च एंड सीजर संबंधित प्रावधानों पर सेमिनार हुआ

इंदौर सीए शाखा द्वारा आयकर के सर्च एंड सीजर संबंधित प्रावधानों पर परिचर्चा हेतु सेमिनार तथा सीए तथा सीएस एसोसिएशन के नवनिर्वाचित सेंट्रल काउंसिल तथा रीजनल काउंसिल मेंबर्स का स्वागत समारोह गुरुवार को सीए भवन इंदौर में किया गया

इंदौर सीए शाखा द्वारा आयकर के सर्च एंड सीजर संबंधित प्रावधानों पर परिचर्चा हेतु सेमिनार का आयोजन तथा सीए तथा सीएस एसोसिएशन के नवनिर्वाचित सेंट्रल काउंसिल तथा रीजनल काउंसिल मेंबर्स का स्वागत समारोह गुरुवार को
सीए भवन इंदौर में आयोजित किया गया।

इंदौर सीए शाखा के चेयरमैन सीए अभय शर्मा ने बताया कि वर्तमान में आयकर के अधिकांश एसेसमेंट सेल्फ एसेसमेंट द्वारा किए जा रहे हैं। इसमें विभाग को वांछित कर संग्रह नहीं हो पाता है। करअपवंचन रोकने के लिए विभाग द्वारा सर्च एंड सीजर (छापे तथा जब्ती) की कार्यवाही समूचे भारतवर्ष में तेजी से की का रही है। आयकर कानून में सर्च एंड सीजर से संबंधित प्रावधानों में कई जगह अस्पष्टताएं तथा भ्रांतियां मौजूद हैं जिन्हें दूर करने के लिए तथा महत्वपूर्ण प्रावधानों के अध्ययन तथा परिचर्चा हेतु एक महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन गुरुवार को सीए भवन इंदौर में किया गया है। सीए शर्मा ने बताया कि सर्च एंड सर्वे की कार्यवाही किसी भी करदाता के जीवनकाल में होने वाली सबसे बड़ी और कठोर कार्यवाही है तथा इसमें स्टेटमेंट देने से लेकर केस के सभी स्टेज पर सावधानी रखने की आवश्यकता होती है।

सीए अभय शर्मा ने आगे बताया कि इस अवसर पर सीएस इंस्टीट्यूट के नवनिर्वाचित नेशनल वाइस प्रेसिडेंट सीएस आशीष गर्ग, रीजनल चेयरमैन सीएस आशीष करोडिया, सीए रीजनल काउंसिल मेंबर सीए निलेश गुप्ता सहित सीएस इंदौर चैप्टर के नवनिर्वाचित मैनेजिंग कमेटी मेंबर्स का स्वागत भी किया गया।

मुख्य वक्ता एडवोकेट महेश अग्रवाल ने बताया कि आयकर में सर्च करने का उद्देश्य तत्वों की खोज करना है ऐसे दस्तावेज और तथ्य जिनमें कर चोरी और बेनामी कारोबार व्यापार का साक्ष्य मिले उन्हें इकट्ठा कर उस आधार पर कर निर्धारण करना है। अघोषित आय / काले धन को उजागर करने के लिए आयकर अधिनियम, 1961 की धाराए 132 व 133A के तहत आयकर प्राधिकारीगण आयकर सर्च व सर्वे की कार्यवाही को अंजाम देते है लेकिन इन प्रावधानों के तहत आयकर सर्च व सर्वे में आय व आयकर का सरेंडर लेने का कोई प्रावधान ही नहीं है। इसके बावजूद आयकर प्राधिकारीगण कई वर्षो से आयकर सर्च व सर्वे में आय व आयकर का सरेंडर ले रहे है या करवा रहे है जो कि प्रतिबंधित , उत्पीडन व अतिवादी कृत्यों के जीते जागते उदाहरण है।

यही नहीं, ऐसे आयकर प्राधिकारीगणों के नकेल डालने के लिए, आयकर विभाग की उच्चतम संस्था केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT, New Delhi) ने बकायदा निर्देश जारी कर आयकर प्राधिकारीगणों को पाबन्द किया कि वो सरेंडर नहीं ले। कई केसेस में देखा गया है रिसर्च के दौरान किया गया सरेंडर लोग रिट्रेक्ट कर लेते हैं और सारे एडिशन छूट जाते हैं। क्योंकि सर्च के दौरान जो साक्ष्य ढूंढने थे वह सरेंडर मिल जाने के कारण विभाग नहीं ढूंढता।

नोटबंदी के बाद आए हुए आयकर कानून में बदलाव के कारण सरेंडर की हुई आय पर 65% से 137.25% टैक्स लगता है।
सर्च के केसेस में कर निर्धारण भी हायर साइड होता है कई ऐसे कैसे देखे गए हैं जिसमें एसेसमेंट के दौरान एक इनकम पर दो बार टैक्स लग जाता है। उदाहरण के तौर पर अघोषित आय को भी जोड़ लिया जाता है और उससे किए गए निवेश को भी अघोषित आय मान लिया जाता है जबकि कानून के हिसाब से डिक्लेअर की गई अघोषित आय से आप अघोषित निवेश को एक्सप्लेन कर सकते हैं जिसे टेलीस्कोपिंग कहते हैं

सेमिनार का संचालन सचिव सीए हर्ष फिरोदा ने किया तथा स्वागत अभिभाषण सीए पंकज शाह ने दिया । इस अवसर पर सीए आनंद जैन, सीए निलेश गुप्ता, मनोज गुप्ता, सीए विक्रम गुप्ते, सीए सुनील जी खंडेलवाल, सीए सत्यनारायण गोयल, सीए शैलेन्द्र सोलंकी सहित बड़ी संख्या में सीए मौजूद थे।

आपके समक्ष सादर प्रकाशनार्थ प्रस्तुत है।

भवदीय
सीए अभय शर्मा
चेयरमैन इंदौर सीए शाखा
9827 067 732

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