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कृषि काॅलेजों ने किया कृषि शिक्षा निजीकरण का विरोध, मंत्री सचिन यादव से की मुलाकात

Posted on: 14 Jun 2019 21:11 by bharat prajapat
कृषि काॅलेजों ने किया कृषि शिक्षा निजीकरण का विरोध, मंत्री सचिन यादव से की मुलाकात

इंदौर कृषि महाविद्यालय सहित मध्य प्रदेश के 15 कृषि महाविद्यालयों का प्रतिनिधि मंडल आज भोपाल में मध्य प्रदेश शासन के कृषि मंत्री सचिन यादव से उनके निवास पर जाकर मिला। कृषि मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को 1 घंटे का समय दिया एवं कृषि शिक्षा के निजीकरण समेत और भी बहुत सारे मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसमें उद्यानिकी महाविद्यालय मंदसौर से पास आउट स्टूडेंट्स का बीएससी कृषि की डिग्री के समकक्ष योग्यता का मुद्दा भी उठा, इसके अलावा मध्य प्रदेश की मिट्टी परीक्षण लेबोरेटरी का निजीकरण का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा।

कृषि मंत्री सचिन यादव ने इन सब समस्याओं के सकारात्मक निदान की बात तो कही लेकिन वह कैसे इन समस्याओं को पूरा करेंगे उसका कोई रोडमैप नहीं बता पाए। बच्चों ने कृषि विभाग में लंबे समय से रिक्त पदों का भी मुद्दा उठाया जिस पर भी कृषि मंत्री संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। तात्कालिक मुद्दा जो कि कृषि शिक्षा के निजीकरण का था उसको लेकर भी उनका एटीट्यूड तो सकारात्मक था, लेकिन कृषि मंत्री कोई एक्शन लेने के मूड में नहीं थे।

इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने मध्य प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव कृषि अजीत केसरी से वल्लभ भवन मंत्रालय में मुलाकात की। अजीत केसरी ने भी सहयोग करने से मना कर दिया और कहा कि इस विषय में राज्य सरकार कुछ नहीं कर सकती है।

इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री सचिवालय में मुख्यमंत्री कमलनाथ के प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल को ज्ञापन सौंपा, मुख्यमंत्री कार्यालय से भी यही बताया गया कि इस मामले में विश्वविद्यालय दोषी है, एवं आईसीएआर दोषी है इस तरह 3 हायर अथॉरिटीओं से मिलने के बावजूद भी प्रतिनिधिमंडल के हाथ निराशा ही लगी हैं।

प्रतिनिधिमंडल के राधे जाट, विजय पाटीदार, अनिल मालवीय, रणजीत जाट एवं नीरज राठौर ने शासन के उदासीन रवैए पर निराशा जाहिर की है। राधे जाट ने कहा कि सरकार में बैठे सभी जिम्मेदार लोग इस मामले में एक दूसरे पर जिम्मेदारियां ढोल रहे हैं, एक दूसरे की आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी को तो जिम्मेदारी लेना पड़ेगी उन्होंने कृषि मंत्री द्वारा कमेटी गठित करने के मामले पर कहा कि कमेटी इस मामले में कहीं लीपापोती नहीं कर दे और जब तक कमेटी गठित होगी तब तक कई प्राइवेट कालेजों के अयोग्य कृषि स्नातक दोनों शासकीय विश्वविद्यालय में प्रवेश ले लेंगे।

आंदोलन की रणनीति को बताते हुए इंदौर कृषि महाविद्यालय के भूतपूर्व छात्र दिनेश पटेल ने कहा की मध्य प्रदेश के समस्त कृषि कॉलेज इस मामले को लेकर कल पूरे मध्यप्रदेश में शाम को पत्रकार वार्ता का आयोजन करेंगे, वही जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के भूतपूर्व छात्र सुभाष दुबे द्वारा यह कहा गया की अब कृषि स्नातकों को सरकार से अपनी मांगे मनवाने के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ना होगी और सरकार इसके लिए तैयार रहे।

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