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आखिर कौन थे शनिदेव और क्या था उनका रहस्य

Posted on: 31 Jan 2019 21:06 by Amit Shukla
आखिर कौन थे शनिदेव और क्या था उनका रहस्य

कालों के काल महाकाल के दरबार में शनि नामक भी एक देवता थे, जिन्हें भगवान सूर्यदेव और माता छाया का पुत्र कहा जाता है। उनकी बहन का नाम देवी यमुना और भाई यमराज है। उनकी पत्नी और पुत्र भी है। शनिदेव का किसी शनिग्रह से कोई संबंध नहीं है। शास्त्रों के अनुसार शनि का जन्म, सूर्य की पत्नी छाया से हुआ। उन्होंने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से शिवजी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी । तपस्या के लिए आठों प्रहर गर्मी और धूप में रहने के कारण छाया के गर्भ में पल रहे शिशु का रंग काला पड़ गया इसी के प्रभाव से ही छाया के गर्भ से शनिदेव का जन्म शिंगणापुर में हुआ। शनि का जन्म ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को रात के समय हुआ। पुत्र जन्म के बाद जब सूर्यदेव अपने नवजात पुत्र से मिलने गये, तो उन्होंने देखा कि छाया का पुत्र काला है। शिशु का रंग काला देखकर सूर्य ने इसे अपना पुत्र मानने से इंकार कर दिया और वहां से चले गए, तभी से यह माना जाता है कि शनिदेव के क्रोध की एक वजह यह भी है, तभी से शनि इतने क्रोधित हुए और उनके क्रोध की ज्वाला को शांत करना आसान नहीं है। हमारे जीवन में शनि का बहुत महत्व है ऐसा कहा जाता है कि जिनके ऊपर इनकी कृपा बनी हो उनका तो सौभाग्य जाग जाता है और जिन पर उनकी क्रोध की दृष्टि पड़ी उनको जीवन में बहुत कष्ट भोगना पड़ता है।

तो आइये जानते हैं कि क्या हैं उनके क्रोध कि ज्वाला से बचने के उपाए :

1. ऐसा कहा जाता है कि भगवान शनिदेव माता भक्त थे और उन्हें अपनी माता से अत्यधिक प्रेम था इसलिए उनके क्रोध से बचने के लिए हमे उनके साथ-साथ उनकी माता छाया कि आराधना करनी चाहिए और माता की सेवा करनी चाहिए।
2. उनको सूरज उगने से पहले या सूरज डूबने के बाद सरसों का तेल चढ़ाना एवं उनके नाम का दिया जलाना चाहिए।
3. हर शनीवार को काली तिल और सरसों का तेल चढ़ाना चाहिए।

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