आखिर कब तक चलेगी ज्योतिरादित्य सिंधिया- डॉ.गोविंद सिंह की यह दोस्ती !

दोनों नेताओं के बीच तीन दशक से मतभेद किसी से छुपे नहीं हैं। दोनों के समर्थक अचानक दोनों के मिलने से आश्चर्यचकित हैं। सभी की जुबान पर एक ही सवाल है कि यह दोस्ती कब तक चलेगी?

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रवीन्द्र जैन

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में आजकल एक सवाल पूछा जा रहा है कि ग्वालियर चंबल संभाग में तीन दशक बाद एक हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय समर्थक दबंग नेता डॉ. गोविंद सिंह की दोस्ती आखिर कब तक चलेगी? दो दिन पहले सिंधिया ने भिंड में डॉ. गोविंद सिंह के घर डिनर करके पूरे संभाग में कांग्रेस की राजनीति के समीकरण बदलने के संकेत दिए। दोनों नेताओं के बीच तीन दशक से मतभेद किसी से छुपे नहीं हैं। दोनों के समर्थक अचानक दोनों के मिलने से आश्चर्यचकित हैं। सभी की जुबान पर एक ही सवाल है कि यह दोस्ती कब तक चलेगी?

कुछ घटनाओं को समझें

  1. 6 अक्टूबर 2016 को ग्वालियर में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मीडिया में बयान दिया था कि डॉ. गोविंद सिंह कौन हैं मैं इस नाम के नेता को नहीं जानता।
  2. 6 अक्टूबर 2019 को यानि ठीक तीन साल बाद स्वयं ज्योतिरादित्य सिंधिया ने डॉ. गोविंद सिंह को अचानक फोन किया और कहा कि दस अक्टूबर को वे भिंड प्रवास पर आ रहे हैं, रात्रि भोज उनके साथ उनके घर करेंगे। डॉ. सिंह ने उनके प्रस्ताव को न केवल स्वीकारा बल्कि उनके सम्मान में शानदार डिनर का आयोजन भी किया।

नदी के दो किनारे

सिंधिया और गोविंद सिंह का मिलना नदी के दो किनारों के मिलने जैसा है। सिंधिया परिवार की राजनीति के खिलाफ समाजवादी आंदोलन से निकलकर डॉ. गोविंद सिंह पूरे क्षेत्र में एक कद्दावर नेता के रूप में पहचाने जाते हैं। 1990 से लगातार विधायक डॉ. गोविंद सिंह को हरवाने में ग्वालियर महल ने कभी कोई कसर नहीं रखी। लहार में तो महल का ज्यादा दखल नहीं है, लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने डॉ. गोविंद सिंह को टिकट दिया तो महल ने अपने खास सिपाहसलार वृन्दावन सिंह सिकरवार को बसपा से टिकट दिलाकर गोविंद सिंह को हराने का रास्ता तैयार किया था। 2016 में मुरैना जिले में कांग्रेस के ही कार्यकर्ताओं ने सिंधिया के खिलाफ प्रदर्शन किया तो गोविंद सिंह ने कटाक्ष में बयान दे दिया कि कार्यकर्ता महाराज को पहचान नहीं पाए होंगे। बदले में सिंधिया का बयान आया कि गोविंद सिंह कौन हैं मैं उन्हें नहीं जानता। ग्वालियर चंबल संभाग की कांग्रेस की राजनीति में इन दोनों नेताओं को नदी के दो किनारों की तरह माना जाता है जो कभी एक नहीं हो सकते।

सिंधिया ने बढ़ाया हाथ

मप्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अचानक डॉ. गोविंद सिंह को फोन कर उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल होने की संभावना पर ही न केवल बधाई दी बल्कि यह भी कहा कि वे चाहते हैं कि सबसे वरिष्ठ विधायक होने के नाते डॉ. सिंह को सम्मान जनक मंत्रालय मिले। अगस्त के आखिरी सप्ताह में डॉ. गोविंद सिंह ने भिंड में अवैध रेत खनन के मुद्दे पर अपनी ही सरकार को घेरा तो सिंधिया ने तत्काल गोविंद सिंह को दिल्ली मिलने का न्यौता भेज दिया। एक सिंतबर को दिल्ली के बिड़ला हाउस में इन दोनों नेताओं की पहली वन-टू-वन और लंबी चर्चा हुई। दोनों ने मतभेदों को भुलाने और ग्वालियर चंबल संभाग में साथ चलने के एक दूसरे से वायदे किए। इस मुलाकात के ठीक चार दिन बाद सिंधिया समर्थक विधायक रणवीर जाटव ने डॉ. गोविंद सिंह और उनके परिवार पर अनर्गल आरोप जड़ दिए। जाटव का कहना था कि रेत खनन में डॉ. सिंह के परिजनों की भागीदारी है। बताते हैं कि बयान के तत्काल बाद सिंधिया ने जाटव को लताड़ लगाई और गोविंद सिंह के घर जाकर माफी मांगने के निर्देश दिए। अगले दिन रणवीर जाटव ने भोपाल में गोविंद सिंह के बंगले पर पहुंचकर अपने बयान के लिए माफी मांगी। मीडिया में उन्होनें अपना बयान भी वापस लिया।

सिंधिया को चाहिए जनाधार

दरअसल, ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास आज भी भिंड में जनाधार वाले नेता की कमी है। उनके समर्थक विधायक एक चुनाव जीतते हैं तो अगला हार जाते हैं। डॉ. गोविंद सिंह पूरे मप्र में एक मात्र विधायक हैं जो पिछले सात बार से लगातार जीतकर आ रहे हैं। खबर है कि मप्र की राजनीति में अपना कद बढ़ाने सिंधिया ने अपनी राजनीति को बदलने का फैसला किया है। उन्होंने तय किया है कि इसकी शुरुआत घर से की जाए। यही कारण है कि उन्होंने ग्वालियर चंबल संभाग के सबसे जनाधार वाले नेता गोविंद सिंह की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया है।

डिनर के नाम पर एकता

डॉ. गोविंद सिंह के घर डिनर करने सिंधिया अकेले नहीं पहुंचे थे। उनके साथ डॉ. सिंह के कट््टर विरोधी भिंड के जिला कांग्रेस अध्यक्ष रमेश दुबे, विधायक रणवीर जाटव, ओपीएस भदोरिया, पूर्व मंत्री चौधरी राकेश सिंह भी डॉ. सिंह के घर गए थे। डॉ. सिंह ने भी इस मौके पर अपने तमाम समर्थकों को बुलवा लिया था। भिंड से लोकसभा के प्रत्याशी देवाषीश जरारिया भी खाने की टेबल पर सिंधिया-सिंह के साथ नजर आए। 30 साल में पहली बार भिंड में कांग्रेस एक साथ नजर आई थी।

इनका कहना है

सिंधिया-सिंह की दोस्ती के बारे में वरिष्ठ पत्रकार रहे और लंबेे समय से डॉ. गोविंद सिंह के नजदीकी खिजर मोहम्मद कुरैशी का कहना है कि यदि यह दोस्ती आगे बढ़ती है तो सिंधिया का कद तो बढ़ेगा ही साथ ही पूरे इलाके में भाजपा को भारी नुकसान होगा। उनका कहना है कि इस दोस्ती के लिए दोनों नेताओं को अहम और वहम से दूर रहना होगा। खासकर अपने-अपने समर्थकों पर नियंत्रण जरूरी है।

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