Breaking News

एक ऐसा मंदिर जहा राक्षस पिता है हजारो लीटर पानी

Posted on: 30 Jun 2018 05:20 by shilpa
एक ऐसा मंदिर जहा राक्षस पिता है हजारो लीटर पानी

नई दिल्ली : हमारे देश में बहुत से ऐसे मंदिर है जहा के चमत्कार सुन कर हमारी भगवान में आस्था और बढ़ा देते है .आज हम ऐसे ही मंदिर के बारे में जानेंगे जो राजस्थान के पाली जिले में स्थित है.यहाँ हर साल सेकड़ो साल पुराना इतिहास और चमत्कार दोहराया जाता है .

Image result for rajasthan pali shitlamata mandir

via

ग्रामीणों के अनुसार करीब 800 साल से यह परम्परा चल रही है. शीतला माता के मंदिर में स्तिथ आधा फीट गहरा और इतना ही चौड़ा घड़ा है. घड़े से पत्थर साल में दो बार हटाया जाता है .पहला शीतला सप्तमी पर और दूसरा ज्येष्ठ माह की पूनम पर। श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ के लिए खोला जाता है।

दोनों मौकों पर गांव की महिलाएं इसमें हज़ारो लीटर पानी डालती हैं, लेकिन घड़ा नहीं भरता है। फिर अंत में पुजारी प्रचलित मान्यता के तहत माता के चरणों से लगाकर दूध का भोग चढ़ाता है तो घड़ा पूरा भर जाता है। दूध का भोग लगाकर इसे बंद कर दिया जाता है। इन दोनों दिन गांव में मेला भी लगता है।Image result for राजस्थान के पाली में शीतला माता मंदिर

via

ऐसी भी मान्यता है कि इसका पानी राक्षस पीता है, जिसके चलते ये पानी से कभी नहीं भर पाता है। दिलचस्प है कि इस घड़े को लेकर वैज्ञानिक स्तर पर कई शोध हो चुके हैं, मगर भरने वाला पानी कहां जाता है, यह कोई पता नहीं लगा पाया है।Image result for राजस्थान के पाली में शीतला माता मंदिर

via

मान्यता के अनुसार आज से आठ सौ साल पूर्व बाबरा नाम का राक्षस था जिसने गाँव में अपना आतंक फैला रखा था .जब भी किसी ब्राह्मण के घर में शादी होती तो राक्षस दुल्हे को मार देता था तब ब्राह्मणों ने शीतला माता की तपस्या की। इसके बाद शीतला माता गांव के एक ब्राह्मण के सपने में आई। उसने बताया कि जब उसकी बेटी की शादी होगी तब वह राक्षस को मार देगी।

Image result for rajasthan pali shitlamata mandir

via

अपने वचनानुसार माता ने शादी में छोटी कन्या के रूप में आकर अपने घुटनों से राक्षस को दबोचकर मार डाला इस दौरान राक्षस ने शीतला माता से वरदान मांगा कि गर्मी में उसे प्यास ज्यादा लगती है। इसलिए साल में दो बार उसे पानी पिलाना होगा। शीतला माता ने उसे यह वरदान दे दिया। तभी से यह मेला भरता है .

Latest News

Copyrights © Ghamasan.com